प्राची और आकाश अच्छे दोस्त थे, लेकिन आकाश इस दोस्ती को प्यार समझ बैठा. उस की यह गलतफहमी दोनों को ही महंगी पड़ी. प्राची जान से गई और आकाश…

प्राची महाराष्ट्र के ठाणे के उपनगर किशोर नगर स्थित आनंद भवन सोसायटी में रहती थी. वह के.जी. जोशी और एन.जी. वेडकर कालेज से बीकौम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थी. इस के साथ ही साथ वह घर की आर्थिक मदद के लिए ठाणे की एक प्राइवेट कंपनी में पार्टटाइम जौब करती थी. वैसे तो प्राची अकसर अपने औफिस के लिए दोपहर 1 बजे के आसपास निकलती थी, लेकिन 4 अगस्त, 2018 को शनिवार था इसलिए कालेज बंद होने के कारण प्राची 11 बजे ही औफिस के लिए निकल गई थी. प्राची हंसमुख और मेहनती युवती थी. औफिस के लोग जितना काम पूरे दिन में नहीं करते थे, उस से अधिक काम वह पार्टटाइम में कर दिया करती थी. यही कारण था कि औफिस स्टाफ और बौस प्राची की बहुत इज्जत करते थे.

उस दिन प्राची स्कूटी से जब ठाणे आरटीओ के सामने पहुंची तो आकाश ने ओवरटेक कर के अपनी मोटरसाइकिल उस की स्कूटी के आगे लगा दी. प्राची आकाश को जानती थी. अचानक ब्रेक लगाने से वह गिरतेगिरते बची. उसे आकाश की यह हरकत अच्छी नहीं लगी. इस बेहूदे कृत्य पर प्राची आकाश पर भड़क गई, ‘‘यह क्या बदतमीजी है, तुम ने इस तरह से रास्ता क्यों रोका?’’

‘‘हां, रोका है, एक बार नहीं हजार बार रोकूंगा.’’ आकाश अपनी मोटरसाइकिल स्टैंड पर खड़ी करते हुए बोला.

‘‘देखो, मैं तुम से बहस नहीं करना चाहती. मेरा रास्ता छोड़ो, मुझे औफिस के लिए देर हो रही है.’’ प्राची ने अपनी स्कूटी स्टार्ट करते हुए कहा.

‘‘अगर मैं ने रास्ता नहीं छोड़ा तो मेरा क्या कर लोगी, पुलिस के पास जाओगी? जाओ, शौक से जाओ. पुलिस के पास तो तुम पहले भी गई थी, क्या कर लिया मेरा?’’ आकाश ने प्राची की स्कूटी की चाबी निकालते हुए कहा.

‘‘देखो आकाश, बहुत तमाशा हो चुका. तुम मेरा पीछा करना बंद करो और मेरी स्कूटी की चाबी मुझे दे दो.’’

कहते हुए प्राची अपना हेलमेट सिर पर लगाने लगी. तभी आकाश ने प्राची का हेलमेट छीन कर उसे हवा में उछालते हुए कहा, ‘‘तमाशा हमारा नहीं तुम्हारा है, प्राची. आखिर तुम यह मान क्यों नहीं लेतीं कि तुम्हें मुझ से प्यार है. हम दोनों एकदूसरे के लिए बने हैं. दोनों मिल कर एक नई दुनिया बसाएंगे, जहां हमारे ऐशोआराम के सारे साधन होंगे.’’ आकाश नरम लहजे में प्राची को समझाने की कोशिश करने लगा. लेकिन प्राची ने इस की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया.

‘‘आकाश, यह तुम्हारी गलतफहमी है. मैं ने न तो तुम्हें कभी प्यार किया था और न करती हूं. यह बात मैं तुम्हें कितनी बार कह चुकी हूं. मैं पहले भी तुम्हें अपना एक अच्छा दोस्त मानती थी और आज भी मानती हूं. इस से ज्यादा तुम मुझ से और कोई अपेक्षा न रखो, समझे.’’ प्राची ने साफसाफ कह दिया.

‘‘तो क्या यह तुम्हारा आखिरी फैसला है?’’ आकाश ने निराशा भरे शब्दों में पूछा.

‘‘हां…हां,’’ प्राची ने लगभग चीखते हुए कहा, ‘‘हां, अब तुम मुझे भूल जाओ. तुम भी जियो और मुझे भी जीने दो.’’

‘‘प्राची, यही तो मुश्किल है. न तो मैं तुम्हें भूल सकता हूं और न तुम्हारे बिना रह सकता हूं. इस के लिए तो सिर्फ अब एक ही रास्ता बचा है…’’ कहते हुए आकाश का चेहरा गुस्से से लाल हो गया.

‘‘एक ही रास्ता…क्या मतलब है तुम्हारा? कहना क्या चाहते हो तुम?’’ प्राची ने पूछा.

जब आकाश को लगा कि प्राची मानने वाली नहीं है और न ही वह उस की बात को तवज्जो दे रही है तो गुस्से में वह अपना संयम खो बैठा. उस ने तय कर लिया कि प्राची अगर उसे प्यार नहीं करती तो वह उसे किसी और से प्यार करने के लिए भी नहीं छोड़ेगा. यह सोचते हुए उस ने अपनी पैंट की जेब से चाकू निकाल लिया और यह कहते हुए उस पर हमला कर दिया कि अगर वह उस की नहीं हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा. प्यार की आग में जल रहे आकाश ने प्राची के ऊपर इतनी ताकत से अनेक वार किए कि उस के चाकू का फल टूट कर जमीन पर गिर गया. इस के बाद वह आत्महत्या करने के मकसद से सड़क के दूसरी तरफ से आती हुई राज्य परिवहन निगम की बस के सामने कूद गया.

गनीमत यह रही कि बस के ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिस से वह बच गया. उस के सिर में हलकी सी चोट आई थी. वह फटाफट उठा और वहां से औटो पकड़ कर फरार हो गया. भीड़ ने बस तमाशा देखा भीड़भाड़ भरे इलाके में फिल्मी स्टाइल से घटी इस घटना को वहां से गुजर रहे लोगों ने देखा था. लेकिन भीड़ में से कोई भी उस की मदद के लिए आगे नहीं आया, बल्कि कुछ लोग तो अपने मोबाइल से फोटो खींचने और वीडियो बनाने में लग गए. हद तो तब हो गई, जब जमीन पर घायलावस्था में पड़ी प्राची दर्द से कराहती और तड़पती रही. उसे उस समय अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं था.

किसी दूसरे शहर से आए 3 लोगों ने जब प्राची को सड़क पर लहूलुहान देखा तो वह उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश करने लगे. लेकिन कोई औटो और टैक्सी वाला तड़प रही प्राची को अपनी गाड़ी में ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ. किसी तरह वे तीनों एक प्राइवेट वाहन से प्राची को जब करीब के अस्पताल ले कर पहुंचे तो वहां के डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. यह घटना थाणे के नौपाड़ा पुलिस स्टेशन इलाके में घटी थी. इस बीच किसी ने इस मामले की जानकारी नौपाड़ा के थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव को दे दी थी. थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव बिना देर किए सहायक इंसपेक्टर धुमाल और इंसपेक्टर सोडकर के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. वहां अपने एक अधिकारी को तैनात कर के वह क्रिटिकेयर सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल रवाना हो गए.

थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव ने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों और थाणे पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. अस्पताल पहुंच कर थानाप्रभारी ने डाक्टरों से बात की और प्राची के शव का बारीकी से निरीक्षण किया. प्राची के गले और शरीर पर चाकू के 7-8 गहरे घाव थे. डाक्टरों ने बताया कि प्राची को अगर समय रहते अस्पताल लाया गया होता तो शायद वह बच सकती थी. प्राची के पास से मिले कालेज के परिचय पत्र से प्राची के घर का पता मिल गया था. पुलिस ने यह जानकारी प्राची के घर वालों को दे दी. बेटी की हत्या की सूचना मिलते ही पिता विकास जाडे सन्न रह गए, घर में रोनापीटना शुरू हो गया. उन्हें जिस अनहोनी का डर था, आखिर वह हो ही गई. घर वाले जिस हालत में थे, उसी हालत में क्रिटिकेयर अस्पताल की ओर दौड़े.

अस्पताल पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें सांत्वना दे कर कुछ पूछताछ की. पर प्राची के परिवार वालों ने थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव को बताया कि उस की हत्या आकाश ने की होगी. क्योंकि आकाश ही एक ऐसा युवक था, जो उन की बेटी को एकतरफा प्यार करता था. आए दिन वह उसे परेशान किया करता था. प्राची के परिवार वालों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दी. सरेराह घटी घटना से पुलिस भी रह गई हैरान घटनास्थल का मंजर काफी मार्मिक और डरावना था. उस मंजर को जिस ने भी देखा, उस का कलेजा कांप उठा. घटनास्थल पर खून में सना टूटा हुआ चाकू पड़ा था. वहीं पर मृतका की स्कूटी और आकाश की पल्सर बाइक खड़ी थी. उसी समय थाणे के पुलिस कमिश्नर विवेक फणसलकर, डीसीपी डा. डी.एस. स्वामी, एसीपी अभय सायगांवकर मौकाएवारदात पर आ गए. उन के साथ फोरैंसिक टीम भी थी.

फोरैंसिक टीम का काम खत्म होने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरसरी तौर पर घटनास्थल का मुआयना कर थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव को आवश्यक दिशानिर्देश दिए. वरिष्ठ अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी कर के घटनास्थल से सबूत एकत्र किए. मौके की काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी थाने लौट आए. वह प्राची के पिता विकास जाडे को भी साथ ले आए थे. उन की तहरीर पर उन्होंने आकाश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. दिनदहाड़े दिल दहला देने वाली इस वारदात से इलाके के लोगों में दहशत फैल गई थी. आरोपी आकाश की तलाश के लिए डीसीपी ने 5 पुलिस टीमों का गठन किया. सभी टीमों को अलगअलग जिम्मेदारी सौंपी गई.

आकाश पवार भिवंडी के नारपोली थाने के अंतर्गत आने वाले गांव कल्हार का रहने वाला था. थाना नारपोली के थानाप्रभारी सुरेश जाधव सबइंसपेक्टर संजय गलवे, हैडकांस्टेबल संजय भोसले, सत्यवान मोहिते कोली और नंदीवाल को ले कर संजय के घर गए. लेकिन वह घर से फरार मिला. बाद में टीम ने अपने मुखबिरों की इत्तला पर कुछ ही घंटों में आकाश को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. उस के सिर में हलकी सी चोट लगी थी, जिस का उपचार करवा कर पुलिस टीम उसे थाना नौपाड़ा ले आई और उसे थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव को सौंप दिया. आकाश ने बिना किसी दबाव के अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस तफ्तीश और आकाश पवार के बयानों के आधार पर प्राची जाडे हत्याकांड की दिल दहला देने वाली जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी—

वर्षीय आकाश पवार एक साधारण लेकिन भरेपूरे परिवार का युवक था. उस के पिता का नाम कुमार पवार था. वह मुंबई की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करते थे, जहां उन की अच्छीखासी सैलरी और मानसम्मान था. परिवार में किसी भी चीज की कमी नहीं थी. परिवार की गाड़ी बड़े ही आराम से चल रही थी. आकाश परिवार में सब से छोटा था. इसलिए परिवार के सभी सदस्य उसे बहुत प्यार करते थे. इसी वजह से वह जिद्दी बन गया था. वह जिस चीज की हठ करता था, उसे ले कर ही मानता था. आकाश सुंदर और स्मार्ट था. इस के अलावा वह फैशनपरस्त और दिलफेंक था. लेकिन पढ़ाई में उस का मन नहीं लगता था. बीकौम पहले साल में फेल हो जाने की वजह से कालेज प्रशासन ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इस के बाद भी वह अपने आवारा दोस्तों से मिलनेजुलने कालेज परिसर में आताजाता रहता था.

करीब 3 साल पहले 2015 में प्राची जाडे और आकाश पवार तब मिले थे, जब दोनों ने इंटरमीडिएट कक्षा में दाखिला लिया था. आकाश पहली ही नजर में प्राची का दीवाना हो गया था. इस के बाद वह प्राची के करीब जाने की कोशिश करने लगा. 65 वर्षीय विकास जाडे कोपरी पुलिस थाने के पास अपने 6 सदस्यों वाले परिवार के साथ रहते थे. उन की किराने की दुकान थी, जो अच्छीखासी चल रही थी. दुकान की आय से परिवार का आसानी से भरणपोषण हो रहा था. उन की चारों बेटियां परिवार के लिए मिसाल थीं. क्योंकि वे सभी अपने काम से काम रखती थीं. विकास जाडे के लिए उन की बेटियां ही सब कुछ थीं. इसलिए वह अपनी बेटियों की पढ़ाईलिखाई पर अधिक ध्यान देते थे.

जुनूनी आशिक था आकाश 20 वर्षीय प्राची चारों बेटियों में दूसरे नंबर की थी. वह अपनी तीनों बहनों से कुछ अलग थी. नरमदिल, चंचल स्वभाव और आधुनिक विचारों वाली प्राची किसी से भी बेझिझक बातें कर लिया करती थी. उस की मीठीमीठी बातें सब के दिल को छू लेती थीं. प्राची जितनी पढ़ाईलिखाई में होशियार थी, उतनी ही खेलकूद में निपुण थी. लंबी दौड़, ऊंची कूद में उसे बहुत रुचि थी. इस के अलावा वह स्कूल और कालेज के हर प्रोग्राम में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. वह चाहती थी कि अगर उस की मौत हो जाए तो उस की आंखें दान दे दी जाएं. ताकि उस के न रहने पर उस की आंखों से कोई और यह संसार देखे. और ऐसा ही हुआ. उस की आंखें बेकार नहीं गईं. उस के मातापिता ने आंखें नेत्र बैंक को दान कर दीं.

चूंकि आकाश प्राची के कालेज का साथी था, इसलिए उस की आकाश से दोस्ती हो गई. लेकिन वह दोस्ती सिर्फ औपचारिकता भर थी. प्राची आकाश को सिर्फ अपना दोस्त मानती थी और उस के साथ हंसतीबोलती व घूमतीफिरती थी. लेकिन आकाश पवार ने उस की दोस्ती का अलग ही मतलब निकाल लिया था. प्राची जब भी आकाश के सामने आती तो आकाश के दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं. प्राची का सुंदर मन रंग और रूप उस की आंखों में समा जाता था. और तो और वह प्राची को ले कर अपने जीवन के रंगीन सपनों में खो जाता था. प्राची और आकाश की दोस्ती प्राची और आकाश की दोस्ती को धीरेधीरे 5 साल से अधिक का समय हो गया था.

जब आकाश आवारा लड़कों के साथ घूमनेफिरने लगा तो प्राची ने उस से दूरी बना ली. इसी बीच आकाश बीकौम फर्स्ट ईयर में फेल हो गया तो प्राची ने आकाश से अपनी दोस्ती पूरी तरह खत्म कर ली. खुद को व्यस्त रखने के लिए उस ने एक प्राइवेट फर्म में नौकरी कर ली थी. प्राची के इस रवैए से आकाश को गहरा धक्का लगा. वह उसे प्यार करता था. अपनी जिंदगी से उसे ऐसे जाने नहीं देना चाहता था. प्राची का पीछा कर के वह उस से बात करने की कोशिश करता था. बात न करने पर वह प्राची को तरहतरह की धमकियां देता था. हद तो तब हो गई जब 11 जून, 2018 कालेज परिसर में उस ने प्राची को अपने एक क्लासमेट के साथ बातें करते देख लिया. आकाश को यह अच्छा नहीं लगा. वह वहीं पर प्राची पर भड़कते हुए बोला, ‘‘देख प्राची, अगर तूने मुझ से दोस्ती तोड़ी तो बहुत बुरा नतीजा होगा. तू मेरी है और मेरी ही रहेगी. मैं तुझे किसी और की नहीं होने दूंगा. खत्म कर दूंगा तुझे.’’

आकाश पवार की इस धमकी से प्राची बुरी तरह डर गई थी. धमकी वाली बात प्राची ने अपने परिवार वालों को बताई तो प्राची के पिता विकास जाडे ने उसी दिन कापूरवाड़ी पुलिस थाने में आकाश पवार के खिलाफ शिकायत कर दी. लेकिन पुलिस ने उस पर कोई कड़ी काररवाई नहीं की. इस की जगह पुलिस ने आकाश पवार से माफीनामा लिखवा कर उसे छोड़ दिया. प्राची जाडे और उस के परिवार वालों के इस कदम से आकाश पवार की हिम्मत और बढ़ गई. उस ने एकदो बार प्राची से मिलने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुआ. इस से उस का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और उस ने प्राची के प्रति एक क्रूर फैसला ले लिया. बाजार जा कर वह एक लंबे फल का चाकू खरीद लाया.

घटना के दिन आकाश पवार ने प्राची का पीछा कर रास्ता रोक लिया और वादविवाद के बाद जेब में छिपा कर लाए चाकू से प्राची पर हमला कर उस की हत्या कर दी. पुलिस जांच और आकाश पवार के बयान से पता चला कि मामला एकतरफा प्यार का था. आकाश पवार की गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर कई सामाजिक संस्थाएं उतर गईं. उन्होंने प्राची जाडे की हत्या पर शोकसभा कर के कैंडल मार्च निकाला.

 

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