श्रद्धा की आंखों पर सूरज की रोशनी पड़ रही थी. वह सो रही थी. रोशनी से उस की नींद में खलल पड़ गई थी. तभी मां सुमन की आवाज सुनाई दी, ‘‘बेटी श्रद्धा, उठ भी जाओ. दिन काफी निकल आया है.’’

‘‘ममा! मैं ने कितनी बार कहा है कि खिड़की मत खोला करो, अभी थोड़ा और सो लेने दो,’’ श्रद्धा नाराज होती हुई अलसाई आवाज में बोली.

‘‘अब कितना सोएगी. दिन के 11 बजने वाले हैं.’’ सुमन बोलीं.

‘‘…तो क्या हुआ?’’ कच्ची नींद में ही करवट बदलती हुई श्रद्धा बोली.

‘‘तुम्हारे मोबाइल में मैसेज पर मैसेज आ रहे हैं. देखो, पता नहीं किस के हैं,’’ मां बोलीं.

‘‘लाओ, इधर दो मोबाइल. मैसेज पढ़ा तो नहीं?’’ श्रद्धा ने मैसेज के बारे में सुनते ही हड़बड़ा कर बैड पर बैठती हुई मां की ओर हाथ फैला दिया.

‘‘यह ले देख ले तू ही, पता नहीं तू कौन कौन सा ऐप चलाती है…बंबल लिखा आ रहा है,’’ मां बोलीं.

‘‘अरे ममा तुम क्या समझोगी बंबल क्या है? यही तो मेरा यार है, मेरा प्यार है.’’ श्रद्धा चहकती हुई बोली.

‘‘यार है, प्यार है, मतलब?’’ मां आश्चर्य से बोली.

‘‘मतलब यह ममा कि ये न्यू जनेरशन का डेटिंग ऐप है. तुम ने भी तो प्यार के लिए पापा संग डेटिंग की होगी. तब सिक्का डालने वाले फोन से होता था, अब मोबाइल ऐप से. जमाना बदल गया है न.’’

‘‘तू बेशरम होती जा रही है आजकल.’’

‘‘अच्छाअच्छा, एक कप कौफी तो पिला दो,’’ कहती हुई श्रद्धा मोबाइल के मैसेज पढ़ने लगी.

‘‘…पता नहीं आजकल की लड़कियों को सोशल साइट और ऐप की कैसी बीमारी लग गई है. जब देखो तब इसी में लगी रहती हैं.’’ बुदबुदाती हुई मां वहां से रसोई में चली गईं.

इधर मैसेज पढ़ रही श्रद्धा का चेहरा चमक उठा. उस ने तुरंत जवाबी मैसेज लिख डाला, ‘‘एस, मे बी सम लेट…बाहर ही इंतजार करना.’’

डेटिंग ऐप बंबल पर आया मैसेज उस के प्रेमी आफताब का था. वह हाल में ही उस के संपर्क में आई थी. श्रद्धा ने उस के फूड ब्लौग से प्रभावित हो कर इसी ऐप के जरिए उस से दोस्ती कर ली थी. कुछ मैसेजिंग और फिजिकल डेटिंग में ही श्रद्धा को आफताब ने प्रभावित कर दिया था. उस के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी अकाउंट थे, लेकिन डेटिंग के लिए बंबल का ही इस्तेमाल करता था. वह इस के जरिए मुंबई के मीटिंग पौइंट पर मिलने का समय तय करता था.

उस का पूरा नाम था आसिफ आफताब अमीन पूनावाला. वह एक शेफ और चर्चित फूड ब्लौगर था. हमेशा अपने ब्लौग ‘हंग्री छोकरो’ पर नईनई रेसिपी डालता रहता था. उस के चिकन करी रेसिपी की श्रद्धा दीवानी हो गई थी. उसे अपने घर में बनाना चाहती थी, लेकिन शाकाहारी मां की वजह से ऐसा नहीं कर पाती थी.

डेटिंग ऐप पर हुई थी दोस्ती

श्रद्धा मुंबई के मलाड के एक कालसेंटर में काम करने वाली 24 साल की युवती थी. एकदम से बिंदास अंदाज वाली लड़की. बेधड़क और मुंहफट. मांबाप के सामने भी कुछ भी बोलने से जरा भी नहीं हिचकती थी. अपने अधिकार के लिए उन से भी लड़ पड़ती थी. बातबात पर उन्हें एहसास दिलाती रहती थी कि वह अब बालिग हो गई है. अपनी जिंदगी का फैसला खुद लेने से कोई नहीं रोक सकता.

दुनिया भर की रेसिपी का मास्टरमाइंड आफताब उस के दिल में उतर चुका था. यह बात साल 2018 के मध्य की है. श्रद्धा प्यार की भूखी थी. उस के मातापिता के बीच मतभेद हो चुका था, जिस के चलते वह 2016 से ही मुंबई में इलैक्ट्रौनिक्स कारोबारी पिता विकास मदन वाकर से अलग हुई मां के साथ मलाड में रह रही थी. श्रद्धा के घर से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी ही आफताब पालघर के वसई स्थित हाउसिंग सोसाइटी में रहता था. उस की बिल्डिंग का नाम यूनिक था, जिस के 301 नंबर फ्लैट में आफताब का परिवार रहता था. श्रद्धा उस से कई बार मिलने भी जा चुकी थी.

उस की बात पिता से बहुत कम हो पाती थी. मांबाप की परवरिश में उसे प्यार के रूखेपन की अनुभूति भी होती थी. जब उस की मुलाकात आफताब से हुई, तब उस की बातों और व्यवहार में उसे ताजे प्यार की खुशबू का एहसास हुआ था. …और वह उस ओर खिंचती चली गई थी. जल्द ही इस की जानकारी उस की मां को हो गई. उन्होंने सिरे से आपत्ति जताई कि वह उस की जाति तो दूर समान धर्म का भी नहीं है. इसलिए उस के साथ दोस्ती भी ठीक नहीं, प्यारमोहब्बत तो काफी दूर की बात है.

इस बारे में सुमन ने श्रद्धा को काफी समझाया, किंतु श्रद्धा पर इस का कोई असर नहीं हुआ. उस की आफताब के साथ डिजिटल डेटिंग भी चलती रही और मुंबई में मिलनाजुलना भी होता रहा.

मां ने जब काफी विरोध किया और बात पिता तक जा पहुंची, तब श्रद्धा ने मां से खुलेआम विरोध जता दिया. वह आफताब के प्यार में अंधी हो चुकी थी. उसे अपना भविष्य और करिअर सिर्फ और सिर्फ प्रेमी आफताब में दिख रहा था. श्रद्धा से आफताब ने भावनात्मक दोस्ती कर ली थी. फिर दोनों ने तय किया कि लिवइन में रहेंगे. साल 2019 से दोनों लिवइन में रहने लगे. इस के लिए मलाड में ही किराए का एक कमरा ले लिया. मकान मालिक को उन्होंने पतिपत्नी बताया था.

यह श्रद्धा की मां सुमन को पता चली तो उन्होंने विरोध जताया तब श्रद्धा ने दोटूक जवाब दे दिया, ‘‘मैं 24 साल की हो गई हूं और मुझे अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है. मुझे आफताब  के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहना है. मैं आज से आप की बेटी नहीं, समझो.’’

यह बात कह कर श्रद्धा जब अपने घर से सामान ले कर जाने लगी थी, उस वक्त उस के पिता भी आए हुए थे. उसे मातापिता ने काफी समझाया था, लेकिन वह नहीं मानी. दोनों एक साथ लिवइन में रहने लगे. इधर, मांबाप परेशान. उन्हें बेटी के बारे में वाट्सऐप स्टेटस, फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए ही पता चल पाता था.

बेटी के गम में मां भी चल बसी

इस तरह एक साल का समय निकल गया. श्रद्धा की मां सुमन परेशान रहने लगीं. श्रद्धा ने मां को दोटूक सुना दिया था. सुमन अपनी बेटी के फैसले के आगे विरोध जताने की स्थिति में नहीं थीं. वह उस के स्वभाव से अच्छी तरह से वाकिफ थीं. आखिरकार श्रद्धा ने प्यार की खातिर अपने मांबाप की परवरिश को छोड़ दिया. सुमन अब अपने फ्लैट में अकेली रह गई थीं. उन की जिंदगी नौकरानी के भरोसे चल रही थी. बीमार भी रहती थीं. वैसे बीचबीच में श्रद्धा मां से फोन पर बात कर हालचाल ले लिया करती थी.

आखिरकार 23 जनवरी, 2020 को सुमन की मौत हो गई. इस की सूचना उसे पिता की मार्फत मिली. सुमन की मौत पर 4 साल पहले से अलग रहने वाले उन के पति और एक साल से लिवइन में रहने वाली बेटी श्रद्धा आखिरी बार मिले. बापबेटी के बीच तनाव का माहौल बना रहा.

मोहब्बत में आई खटास

मां के गुजर जाने के बाद श्रद्धा अपने भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगी थी. एक रोज सुबहसुबह चाय पीते हुए वह आफताब से अचानक पूछ बैठी, ‘‘फैमिली से हमारी शादी के बारे में कोई बात हुई?’’

कप में अपनी चाय निकालता हुआ आफताब अचानक यह सवाल सुन कर तिलमिला गया, ‘‘तुम्हें कितनी बार कहा है, उस बारे में कोई बात नहीं हुई है.’’

‘‘बात कब करोगे?’’श्रद्धा थोड़ी नाराजगी दिखाते हुई बोली.

‘‘वे लोग हमारे रिश्ते को ले कर ऐसे ही चिढ़े हुए हैं…और कोरोना भी है. लौकडाउन खत्म होते ही घर जा कर बात करूंगा.’’ आफताब टालने के अंदाज में बोला.

इस पर श्रद्धा चिढ़ती हुई बोली, ‘‘तुम मेरी कोई बात नहीं सुनते हो. हर बात को टाल देते हो. तुम्हारे चलते मैं ने अपना घरबार छोड़ा है …और तुम्हें जरा भी परवाह नहीं है.’’

उस के बाद श्रद्धा सांस लिए बगैर आफताब की खामियां गिनवाने लगी. चीखते हुए आफताब पर दनादन आरोप लगा दिए, जिस से वह भन्ना गया. गुस्से में उस ने चाय की प्याली श्रद्धा की ओर उछाल दी. गर्म चाय टेबल पर कुछ श्रद्धा के हाथों पर गिरी. वह गुस्से में आ कर और चीखने लगी, ‘‘जला दोगे क्या मुझे?’’

आफताब श्रद्धा के गर्म चाय से जले हाथ को देखने के बजाए कमरे में चला गया. गुस्से से भरी श्रद्धा तौलिए से हाथ पोंछती हुई उस के पीछेपीछे कमरे तक आ गई. आफताब ने उसे धक्का दे दिया. वह वहीं जमीन पर गिर पड़ी. आफताब का गुस्से से तमतमाया हुआ खौफनाक चेहरा देख श्रद्धा सहम गई. दोनों हाथों से चेहरा छिपा लिया और सिसकने लगी. थोड़ी देर बाद आफताब तैयार हो कर घर से बाहर चला गया. उदास श्रद्धा ने अपने क्लासमेट लक्ष्मण नाडर को फोन मिलाया. वह उस के बचपन का दोस्त था. उस से अपनी बातें बेहिचक शेयर कर लेती थी.

वह जब कभी किसी उलझन में होती थी, तब उस से सलाह लेती थी या फिर उस के जरिए अपनी कोई जरूरी बात मम्मीपापा तक पहुंचा दिया करती थी. उस रोज की घटना को ले कर श्रद्धा ने दोस्त को विस्तार से तो नहीं बताया, लेकिन इतना जरूर कहा कि आफताब उस से शादी करने में टालमटोल कर रहा है. इस बारे में बात करते ही गुस्से में आ जाता है. उस ने लक्ष्मण से यह भी बताया कि आफताब की क्या मजबूरी है, उसे नहीं मालूम, लेकिन उसे लगता है कि उस की मोहब्बत में खटास आ गई है.

इतना कहने के साथ ही वह फोन पर रोने लगी. तभी कालबेल बजी. उस ने फोन कट किया. आंसू पोंछे और आईव्यू से देखा. बाहर गार्ड खड़ा था. दरवाजा खोल कर उस के आने का कारण पूछने ही वाली थी कि उस ने पीले रंग की दवाई की ट्यूब उस ओर बढ़ा दी, ‘‘मैडम, सर ने आप को देने के लिए कहा है.’’

गार्ड ट्यूब दे कर चला गया. श्रद्धा ने उसे भरी नजर से देखा. वह जले में लगाने वाली दवा का ट्यूब था. वह समझ नहीं पाई कि जिसे वह कोस रही थी, आखिर वह उस से कैसी हमदर्दी भी रखता है. फिर भी श्रद्धा लिवइन पार्टनर के बारे में अपने पिता से बात करना चाहती थी. उसे भरोसा था कि उस के पिता आफताब के परिवार वालों को शादी के लिए राजी कर लेंगे. वह अकेली हिंदू लड़की नहीं है, जो मुसलिम युवक से प्रेम करती है और भी तो लिवइन में रह रही हैं.

करीना कपूर भी तो काफी समय तक शादीशुदा सैफ अली खान के साथ लिवइन पार्टनर बन कर रही. कई सालों बाद शादी की. उन्हें तो तब किसी ने कुछ नहीं कहा. इसलिए न, क्योंकि वे अमीर घराने की सेलिब्रेटी थे. हम साधारण लोगों पर ही पाबंदियां क्यों लगाते हैं लोग?

पिता से मांगा शादी कराने में सहयोग

इसी उधेड़बुन में खोई श्रद्धा के मन में कई तरह के खयाल आ रहे थे. आखिरकार उस ने अपने पिता से ही इस बारे में सलाह लेने और कोई रास्ता निकालने की सोची. वह अगले रोज ही सीधा पिता के पास जा पहुंची. उस ने पिता से सब कुछ सचसच बता दिया. उन से मदद मांगी कि चाहे जैसे भी हो, वह उस की आफताब से शादी करवाने की कोई तरकीब निकालें. उस के परिजनों को इस के लिए तैयार कर लें.

पिता ने आफताब को भी अपने घर बुलवाया. श्रद्धा खुश थी कि शायद कोई बात बन जाए. किंतु वह जैसा सोच रही थी, वैसा पिता ने नहीं किया. उन की शादी के लिए पहल करने के बजाय उन्होंने आफताब को ही बेटी से संबंध तोड़ लेने के लिए कहा. आफताब को अंतरधार्मिक भावना की बातें समझाने की कोशिश करने लगे. उन्होंने यहां तक कहा कि उस की शादी को लोग सिर्फ हिंदू और मुसलिम कीनजर से देखेंगे. वह नहीं चाहते कि उन की वजह से समाज परिवार में उन के उठनेबैठने पर असर पड़ जाए और उन का बिजनैस चौपट हो जाए.

पिता की इस पहल से श्रद्धा और भी आहत हो गई. वह असहाय और अकेला महसूस करने लगी. पिता ने तो दोनों पर अपनी राय के साथसाथ फैसला भी थोप दिया. और आगे का निर्णय उन पर छोड़ कर चले गए. दुखी मन से श्रद्धा ने आफताब को देखा. आफताब ने उसे गले लगा लिया. बीते दिनों की अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और भरोसा दिया कि अब उन्हें कोई सही राह निकालनी होगी.

इसी बीच कोरोना लहर का दूसरा दौर भी आ चुका था, जिस से काफी अफरातफरी मची हुई थी. लगातार मौतें हो रही थीं. मुंबई में भी मौतें हो रही थीं. लोग निगम से ले कर राज्य और केंद्र सरकार तक की पाबंदियां झेलने को मजबूर थे. श्रद्धा और आफताब को इस दौर में वर्क फ्रौम होम काम मिलता रहा. वे लौकडाउन की छूट का इंतजार करने लगे.

श्रद्धा धीरेधीरे मां की मौत के गम से उबर रही थी, लेकिन पिता द्वारा लाख मनाने के बाद भी वह आफताब के साथ रहती रही. हालांकि उन के रिश्ते की मधुरता में पहले जैसी ताजगी नहीं बची थी. दोनों एकदूसरे से खीझे रहते थे. श्रद्धा को एक ही गम खाए जा रहा था कि आखिर वह कब तक बिनब्याही लिवइन पार्टनर के साथ बनी रहेगी. उसे विवाहिता का अस्तित्व कैसे मिलेगा? मुश्किल यह थी कि आफताब कोर्टमैरिज के लिए भी राजी नहीं था.

दिन बीतते रहे और नोकझोंक के साथ श्रद्धा और आफताब की जिंदगी भी आगे बढ़ती रही. एक दिन आफताब के डेटिंग ऐप पर आफताब की तरफ किसी लड़की की रिक्वेस्ट देखी तो वह चौंक गई. उस बारे में श्रद्धा ने पूछा. आफताब ने इस का उस ने रूखेपन से जवाब दिया, ‘‘क्यों, कोई और मुझ से डेटिंग नहीं कर सकती क्या? तुम से अधिक मेरे इंस्टाग्राम पर फालोअर हैं. ब्लौग के व्यूअर्स लाख तक पहुंचने वाले हैं.’’

‘‘मेरे पूछने का तुम गलत अर्थ निकाल रहे हो, यह तो चोर की दाढ़ी में तिनका वाली बात हुई न,’’ श्रद्धा ने भी करारा जवाब दिया.

‘‘तुम को तो पता है न, बंबल पर फीमेल की रिक्वेस्ट ही मान्य होती है, मेल की नहीं. इस का मतलब तो साफ है न कि मैं ने उसे अप्रोच नहीं किया है, बल्कि उस ने मुझ से डेटिंग की रिक्वेस्ट की है. अब उसे रेसिपी सीखनी है तो इस में मैं क्या कर सकता हूं?’’ वह बोला.

बन गई नए ठिकाने की योजना

इस तकरार का अंत श्रद्धा के सौरी से हो गया, लेकिन मन अस्थिर बना रहा. दिमाग में संदेह के कुलबुलाते कीड़े को शांत नहीं कर पाई थी. साल 2022 आ गया. सब कुछ  पहले की तरह सामान्य होने लगा. घूमनेफिरने, बाजार, मौल, मल्टीप्लेक्स और टूरिज्म की मौजमस्ती के अड्डे  पर चहलपहल शुरू हो गई. आवागमन सामान्य हो गया. इन सब के बावजूद मुंबई में श्रद्धा और आफताब के लिए नया कुछ नजर नहीं आ रहा था. आफताब ने ही पहल की और श्रद्धा को खुश करने के लिए घूमने की योजना बनाई.

‘‘सुना है, दिल्ली में आईटी का अच्छा हब बन चुका है. एनसीआर गुड़गांव और नोएडा में आईटी प्रोफैशनल्स की मांग है. वहां रहने का खर्च भी कम है,’’ आफताब बोले जा रहा था और श्रद्धा उस के बोलने के अंदाज को प्यार से निहार रही थी.

बीच में ही बोल पड़ी, ‘‘…और वहां रेस्टोरेंट और फाइव स्टार होटलों में भी तुम जैसे शेफ की मांग है,’’ कहती हुई वह हंस पड़ी.

‘‘सही कहा तुम ने. आखिर वह कैपिटल है. वहां से हमें विदेश जाने के मौके मिल सकते हैं. कुछ नहीं तो स्टार्टअप तो शुरू कर ही सकते हैं. मल्टीनैशनल कंपनियां हैं, विदेशी पूंजी है..’’ आफताब बोला.

‘‘तो दिल्ली में रहने का इरादा है. वह मेरे लिए एकदम अनजाना मैट्रोपौलिटन है,’’ श्रद्धा ने चिंता जताई.

‘‘अनजाना है, लेकिन वहां के लोग बड़े दिलवाले हैं,’’ कहते हुए आफताब ने श्रद्धा को गले लगा लिया.

इस तरह दोनों ने जनवरी, 2022 में ही दिल्ली में जमने की नई योजना बना ली, लेकिन दिल्ली की सर्दी के बारे में सुन कर उन्होंने गरमी शुरू होने पर दिल्ली जाने का मन बनाया. आखिरकार योजना के मुताबिक दोनों 5 मई, 2022 को मुंबई से दिल्ली आ गए. उन्होंने पहाड़गंज के होटल में खुद को पतिपत्नी बता कर कमरा लिया. यहां एक दिन रहने के बाद वे हिमाचल प्रदेश चले गए और विभिन्न होटलों में छुट्टियां बिताते हुए दोबारा 8 मई को वापस दिल्ली आ गए. फिर उन्होंने पहाड़गंज के होटल में कमरा ले लिया और 11 मई तक वहीं ठहरे.

इस बीच दिल्ली में रहने के लिए कमरे की तलाश भी करते रहे. उन्हें महरौली के छतरपुर इलाके में  प्रौपर्टी डीलर के माध्यम से किराए का एक फ्लैट मिल गया. वहां वे 12 मई से रहने लगे. इस दौरान मिली खुशियों को श्रद्धा फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि में अपडेट करती जा रही थी. उस की आखिरी पोस्ट 11 मई को हुई थी. उस के बाद घर की व्यवस्था करने में समय ही नहीं मिल पाया था. जिंदगी की नई शुरुआत अच्छी हुई. अपनीअपनी उम्मीदें लिए हुए वे जोश से भरे हुए थे. श्रद्धा को उम्मीद थी कि निश्चित तौर पर वह यहां आफताब के साथ शादी रचा कर सेटल हो जाएगी, जबकि आफताब अभी भी लक्ष्य को ले कर दुविधा में था.

खासकर श्रद्धा के साथ निकाह के लिए घर वालों को मनाने में असफल रहा था और उस के पिता ने भी उस से संबंध तोड़ने का अपना फैसला सुना दिया था. यानी कुछ अच्छा और नया किया जाना था, किंतु उन की पुरानी जिंदगी भी पीछा नहीं छोड़ रही थी. हंसीखुशी में 6 दिन कैसे निकल गए, उन्हें पता ही नहीं चला. आफताब के मन में क्या चल रहा था, इस का श्रद्धा जरा भी अंदाजा नहीं लगा पर रही थी. करिअर और भविष्य को ले कर कभी कुछ तो कभी कुछ बातें करता था. शादी की बात जैसे ही होती, सिरे से गुस्से में आ जाता था.

चिंतित पिता ने की पहल

श्रद्धा नए शहर में अपनी नई जिंदगी की नई राह पर दौड़ लगाने को तैयार थी. जबकि मुंबई में उस के पिता विकास वाकर उसे ले कर चिंतित थे. उन की पिछले कई महीने से श्रद्धा से बात नहीं हुई थी. मई के बाद उन्होंने श्रद्धा का कोई नई पोस्ट भी नहीं देखी था. उन्होंने लक्ष्मण नाडर से बेटी के बारे में पूछा. इस पर लक्ष्मण ने बताया कि उस की भी श्रद्धा से 14 मई के बाद कोई बात नहीं हुई है और 4 माह बीत चुके हैं, इस बीच उस ने भी कोई फोन नहीं किया है. आज 14 सितंबर है. श्रद्धा दिल्ली जा कर इतनी लापरवाह कैसे हो गई?

विकास वाकर ने लक्ष्मण से उस के बारे में पता करने को कहा, लेकिन उस का कोई पता नहीं चल पाया. आफताब से बात हुई, तब उस ने बताया कि वह दिल्ली में उस के साथ नहीं है. कहां गई उसे नहीं मालूम. यह जान कर पिता और भी चिंतित हो गए कि पिछले कई महीनों से श्रद्धा की कोई अपडेट उस के दोस्त के पास नहीं थी और वह आफताब के साथ भी नहीं है. महीनों से उस का फोटो भी अपडेट नहीं हो रहा था. न वाट्सऐप पर और न ही फेसबुक पर. इसी अपडेट से उस के पिता अपनी बेटी की खोजखबर लेते थे.

तब वह अनहोनी की आशंकाओं से घिर गए कि कहीं न कहीं और कुछ न कुछ उन की बेटी के साथ गलत तो हुआ है. वह सीधे मुंबई के थाना वसई गए और श्रद्धा की गुमशुदगी की शिकायत की. करीब 50 दिन निकल गए, लेकिन मुंबई पुलिस को श्रद्धा के बारे में पता लगाने में रत्ती भर भी सफलता नहीं मिली. हार कर वह दिल्ली आए और 8 नवंबर को दिल्ली आ कर बेटी श्रद्धा के गुमशुदा होने की शिकायत की. उन के साथ बेटा भी आया था. उन्हें आफताब और श्रद्धा के फ्लैट का पता नहीं मालूम था. वे सिर्फ इतना जानते थे कि उन्होंने छतरपुर में कहीं किराए का फ्लैट लिया है, जो महरौली थानांतर्गत आता है.

विकास वाकर ने पुलिस को श्रद्धा और आफताब के लिवइन रिलेशन के बारे में पूरी जानकारी दी. उन के और श्रद्धा के अलावा आफताब की हुई बातचीत के बारे में भी विस्तार से बताया. उन के मोबाइल नंबर भी दिए. विकास और उन के बेटे से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने तहकीकात शुरू करते हुए दोनों के मोबाइल फोन की लोकेशन की जांच की, जो एक साथ कई दिनों तक दिल्ली के छतरपुर में मिली. किंतु बाद में श्रद्धा का फोन बंद मिला. उस के जरिए पुलिस ने छतरपुर में आफताब के एड्रैस का पता लगा लिया.

पुलिस जांच करते हुए उस पते पर पहुंची, जहां आफताब रहता था. वह पता दिल्ली के छतरपुर में गली नंबर-1 के एक मकान का था. पुलिस जब विकास को ले कर वहां गई, तब उन्हें उस मकान पर ताला लगा मिला. पुलिस को शक हुआ कि जरूर आफताब लड़की के साथ कुछ गलत करने के बाद फरार हो गया है. हिंदू लड़की और मुसलिम लड़के के बीच प्रेम संबंध और उन के परिजनों के विरोध को देखते हुए पुलिस लव जिहाद ऐंगल से भी जांचपड़ताल करने लगी.

सर्विलांस की मदद से आखिरकार शनिवार यानी 12 नवंबर, 2022 को आफताब दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आ गया. उस से पूछताछ की गई. पुलिस ने पाया कि उस के चेहरे पर किसी तरह की परेशानी या अफसोस नहीं था.  वह हर बात का जवाब अंगरेजी में दे रहा था. वह हिंदी जानता था, लेकिन अंगरेजी में बात करने में खुद को ज्यादा सहज महसूस कर रहा था. एसएचओ ने सीधा सवाल पूछा, ‘‘श्रद्धा कहां है?’’

उस ने भी सीधा सा जवाब दिया,‘‘आइ डोंट नो. मुझे नहीं मालूम.’’

‘‘नहीं मालूम. वह तुम्हारे साथ आई थी न? अब कहां है?’’ एसएचओ ने डांट लगाई.

‘‘चली गई?’’ आफताब के इतना बोलते ही एसएचओ ने उसे एक झापड़ लगाया, ‘‘कहां चली गई? तुम्हारी प्रेमिका है, लिवइन पार्टनर  है. ऐसे कहां चली जाएगी?’’

‘‘मुझे क्या पता? वह अब मेरे साथ नहीं है.’’ आफताब थोड़ा खीझता हुआ बोला.

‘‘…तो कहां है?’’ कहते हुए उन्होंने उस का कालर पकड़ा और तड़ातड़ 2-3 झापड़ लगा दिए.

‘‘आई किल्ड हर…उसे मार डाला मैं ने.’’ झापड़ की मार से तिलमिलाए हुए आफताब के मुंह से निकल गया.

आफताब ने स्वीकार कर लिया सच

इतना कह कर वह निश्चिंत हो गया. यह बता कर कि वह मर चुकी है उस के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं दिख रही थी. एसएचओ ने अगला सवाल किया, ‘‘क्यों और कैसे मारा?’’

‘‘उस ने मुझे काफी गुस्सा दिला दिया था. एक ही सवाल बारबार पूछती रहती थी.  गुस्से में उस का गला दबा दिया और मर गई.’’ आफताब बोला.

यह सुनते ही पास खड़े श्रद्धा के पिता अवाक रह गए. आफताब उन की तरफ देख कर बोलने लगा, ‘‘वह बारबार शादी की जिद करती थी. मैं उसे कितना समझाता कि आप लोगों को हमारी शादी मंजूर नहीं. उस रोज उस ने मुझे वही बात बोलबोल कर बेहद दुखी कर दिया था. तब मैं ने उस की हत्या कर दी.’’

यह सुन कर श्रद्धा के पिता और पुलिस वाले भी हैरान रह गए.

‘‘कब किया यह सब? डैडबौडी कहां है?’’ एसएचओ ने सवाल किया.

‘‘18 मई को… उस की बौडी जंगल में फेंक दी.’’ आफताब निश्चिंत हो कर महरौली के घने जंगल की ओर इशारा करता हुआ बोला.

‘‘जंगल में! अकेले? …और कोई था तुम्हारे साथ?’’

‘‘मैं ने अकेले ही श्रद्धा की बौडी को फेंका.’’

‘‘आश्चर्य है. पूरी बात विस्तार से बताओ. यह लो पहले पानी पियो…’’ कहते हुए एसएचओ ने उस की ओर पानी की बोतल बढ़ा दी.

उस के बाद आफताब ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर सभी के रोंगटे खड़े हो गए. कारण उस ने श्रद्धा की लाश के साथ जो किया था, वह कोई हैवान ही कर सकता है. वह एकदम अनहोनी और डरावनी खौफनाक हौलीवुड फिल्मों जैसी थी.

आफताब द्वारा श्रद्धा की मौत और उस की लाश को ठिकाने लगाने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

श्रद्धा की गला घुटने से हुई मौत की वारदात 18 मई की आधी रात के समय हुई थी. दोनों के बीच शादी को ले कर हुए विवाद के बाद दोनों ने एकदूसरे को काफी भलाबुरा कहा था. इस दौरान गुस्से में आए आफताब पर श्रद्धा ने एक थप्पड़ जड़ दिया था. जिस से आफताब ने गुस्से में दोनों हाथों से श्रद्धा की गरदन पकड़ ली. जब श्रद्धा तेजी से चिल्लाने लगी, तब उस ने एक हाथ से उस का मुंह दबा दिया. जब उसे श्रद्धा की मौत हो जाने का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. श्रद्धा की नब्ज थमने पर उसे मालूम हुआ कि उस की मौत हो चुकी है.

फिर पकडे़ जाने के डर से उस ने लाश को ठिकाने लगाने की सोची. शांति से योजना बनाई. हौरर वेब सीरीज देखने लगा, ताकि बचाव का कोई तरीका मिल जाए. ओटीटी प्लेटफार्म पर सर्च करते हुए उस ने हौलीवुड वेब सीरीज ‘डेक्स्टर’ देखी. उस के सीरियल किलर के कैरेक्टर से लाश को ठिकाने लगाने का तरीका जाना. इस सीरीज में सीरियल किलर द्वारा लाश के टुकड़ों को अलगअलग जगहों पर फेंकते हुए दिखाया जाता है. उसे देख कर ही आफताब को आइडिया मिल गया.

वह लाश को ठिकाने लगाना चाहता था, लेकिन लाश को कैसे बाहर ले जाता. दिल्ली में उस के पास कार भी नहीं थी. अकेले लाश को कैसे ठिकाने लगाता. इसलिए सोचा कि अब उसे कई टुकड़ों में काट कर ठिकाने लगाया जाए. अब ऐसा करने के लिए उस ने अपने पुराने फूड ब्लौगर वाला तरीका चुना. उस ने तय कर लिया कि वह लाश के छोटेछोटे टुकड़े कर के फ्लैट में ही रख लेगा और फिर उन्हें थोड़ाथोड़ा कर के ठिकाने लगाता रहेगा. होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान उसे बताया गया था कि गोश्त को ज्यादा दिनों तक फ्रैश कैसे रखा जाता है. वही तरीका आफताब ने अपनाया.

अगले रोज 19 मई, 2022 को वह बाजार से पहले चापड़, आरी और 300 लीटर का फ्रिज खरीद लाया. साथ में कई रूम फ्रेशनर और गुलाब की पंखुडि़यां भी ले आया. तब तक लाश को 24 घंटे तक कमरे में ही छिपाए रखा. सारा सामान जुटाने के बाद लाश को कमरे से जुड़े बाथरूम में ले जा कर आरी से कई टुकड़े काटे. हाथपैर और धड़ के 35 टुकड़े किए. फिर वह पौलीथिन में पैक कर फ्रिज में रख दिए. रूम फ्रेशनर को कमरे में फैला दिया. थोड़े से पानी भरे बरतन में गुलाब की पंखुड़ी डाल कर वह बरतन बालकनी में रख दिया, ताकि कमरे से बदबू नहीं आए.

उस के बाद उस ने 18 दिनों तक यानी 5 जून तक श्रद्धा के 35 टुकड़ों में कटी लाश को ठिकाने लगाता रहा. वह टुकड़ों को बैग में डाल कर रोजाना आधी रात में महरौली के जंगल के अलगअलग हिस्से में फेंकता रहा. पुलिस की छानबीन से पाया गया कि उस ने करीब 20 किलोमीटर के दायरे में तमाम टुकड़े फेंके थे. उस ने 100 फुटा एमबी रोड, श्मशान के पास के नाले, महरौली के जंगल और छतरपुर में धान मिल परिसर में ये टुकड़े फेंके थे. जब तक फ्रिज में लाश रखी रही, तब वह औनलाइन खाना मंगा कर खाता रहा. बचा हुआ खाना भी उसी फ्रिज में रखता था, जिस में प्रेमिका की लाश के टुकड़े रखे थे. जब कभी उसे श्रद्धा के साथ गुजारे गए हसीन पलों की याद आती तो फ्रिज में रखे उस के सिर को बाहर निकाल कर गालों को स्पर्श कर लेता था.

फ्लैट में वह सामान्य तरह की दिनचर्या का पालन कर रहा था. जब तक लाश के टुकड़ों को ठिकाने नहीं लगा देता, तब तक नहीं सोता था. हालांकि लाश को काटते हुए आरी से उस का भी हाथ कट गया था. उस की मरहमपट्टी के लिए पास के ही डा. अनिल कुमार की क्लिनिक पर गया था. जख्मी आफताब के बारे में डाक्टर ने पुलिस को बताया कि वह 20 मई की सुबह के समय उन के क्लिनिक आया था. उस का हाथ कटा हुआ था और खून भी निकल रहा था. वह बहुत आक्रामक और बेचैन लग रहा था.

जब मैं ने चोट के बारे में उस से पूछा तो उस ने बताया कि फल काटते समय उस का हाथ कट गया था. वह बातें काफी कौन्फिडेंस के साथ आंखें मिला कर कर रहा था. वह अंगरेजी में बोल रहा था. उस ने बताया कि वह मुंबई से है और दिल्ली आया है, क्योंकि यहां आईटी सेक्टर में अच्छा अवसर है. उस ने श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े कर दिए थे, लेकिन वह सिर को क्षतविक्षत नहीं कर पाया था. फ्रिज में रखे सिर को अपने प्यार की याद में बारबार निहारता था. श्रद्धा के सिर को उस ने सब से आखिर में ठिकाने लगाया था.

श्रद्धा के शव को ठिकाने लगाने के दौरान आफताब बदबू से बचने के लिए कई कैमिकल्स का इस्तेमाल भी करता रहा. पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह आर्थोबोरिक ऐसिड (बोरिक पाउडर), फार्मेल्डिहाइड और सलफ्यूरिक एसिड खरीद कर लाया था. इस की जानकारी उस ने गूगल सर्च कर मालूम की थी. श्रद्धा की हत्या के बाद आफताब ने खुद को बचाने के लिए न केवल उस की लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाया, बल्कि किसी को शक न हो, इसलिए श्रद्धा का इंस्टाग्राम अकाउंट भी लगातार चलाता रहा. वह श्रद्धा बन कर उस के दोस्तों से चैटिंग करता था.

फिर उस ने 10 जून को इंस्टाग्राम चलाना बंद कर दिया. इसी तरह से आफताब ने श्रद्धा की हत्या के बाद उस के क्रेडिट कार्ड का बिल भी चुकाया. उसे यह डर था कि अगर उस के के्रडिट कार्ड का बिल नहीं चुकाया तो ड्यू डेट के बाद बैंक से श्रद्धा के घर वालों के पास काल जाएगी और फिर वे श्रद्धा से संपर्क करने की कोशिश करेंगे. दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज और महरौली के आसपास बेहद घने और 43 एकड़ में फैले जंगलों में श्रद्धा की लाश के टुकड़े की तलाश करना काफी चुनौती का काम है.

कथा लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस को महरौली के जंगल से लाश के 12 पार्ट ही मिले थे, जिन के बारे यह कहना मुश्किल था कि वह श्रद्धा के ही हो सकते हैं. पुलिस उस के सिर को तलाश नहीं कर पाई थी. सिर मिलने से मृतका की पहचान साबित हो सकती है, लेकिन पुलिस श्रद्धा के पिता के डीएनए से मिलान कर शव की शिनाख्त की कोशिश कर रही थी. हड्डियों को डीएनए सैंपलिंग के लिए भेजा गया था.

आफताब का शातिराना और संदिग्ध अंदाज

पुलिस ने बताया कि आफताब ने वारदात को अंजाम देने के बाद खून साफ करने के लिए फ्रिज और कमरे को सल्फर हाइपोक्लोरिक एसिड से साफ किया. इसी वजह से खून के धब्बे नहीं मिले. केवल एक धब्बा किचन में मिला था, पर जांच रिपोर्ट आने से पहले यह कहना मुश्किल है वो खून किस का है. दिल्ली पुलिस ने आरोपी आफताब को फ्लैट पर ले जा कर क्राइम सीन को रीक्रिएट कर हत्याकांड की तह में जाने की कोशिश की है. आफताब की आदतों और उस के दूसरी लड़कियों के साथ संबंध होने के खुलासे के बाद हत्याकांड के कई कारण बताए जा रहे हैं.

सीन रीक्रिएशन से यह पता चला कि वारदात की रात जब अफताब और श्रद्धा के बीच झगड़ा हुआ था, तब आफताब ने पहले श्रद्धा की जम कर पिटाई की थी. पिटाई से श्रद्धा बेसुध हो गई थी, जिस के बाद आफताब श्रद्धा की छाती पर बैठ गया था और उस का गला दबा कर मार डाला था. क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए दिल्ली पुलिस फ्लैट में एक पुतला ले कर गई थी. घटनास्थल पर आफताब को भी ले जाया गया था. आफताब अमीन पूनावाला मुंबई का रहने वाला है. कहने को तो वह एक बढि़या शेफ है. जिस तरह श्रद्धा ने मुंबई के एक नामी संस्थान से मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की थी तो आफताब ने भी मुंबई के एक नामी कालेज एल.एस. रहेजा से बैचलर इन मैनेजमेंट स्टडीज की पढ़ाई की थी.

आफताब को फूड ब्लौगिंग का शौक है. इस ने खुद का फूड ब्लौग वेबसाइट बनाया है. इस का सोशल मीडिया प्रोफाइल देखने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. उस के सोशल मीडिया प्रोफाइल से पता चला कि वह एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी यानी स्त्रीस्त्री, पुरुषपुरुष समलैंगिक और बाइसैक्सुअल समुदाय, एसिड विक्टिम और वीमन राइट्स का समर्थक है. दीपावली पर पटाखों की जगह अपने अंदर के अंहकार को जलाने की बात करने वाले आफताब ने अपने कई शातिराना और संदिग्ध अंदाज से पुलिस को चकमा देने की कोशिश की है. पुलिस इस ऐंगल से भी पुलिस जांच कर रही है कि कहीं ओपन रिलेशनशिप और गे लेस्बियन का शौक हत्या की वजह तो नहीं है.

उस ने हत्या की वारदात के 10-12 दिनों के बाद ही बंबल डेटिंग ऐप के जरिए ही एक युवती को दिल्ली के फ्लैट पर बुलाया था. उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए थे. उस दौरान श्रद्धा की लाश के टुकड़े फ्रिज में ही रखे हुए थे. आफताब ने मुंबई पुलिस को न केवल चकमा दिया, बल्कि अपने परिवार की नजरों में भी सहज और सामान्य बना रहा. इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस की निगाह में श्रद्धा मर्डर केस का एकमात्र आरोपी आफताब मानसिक तौर पर बेहद शातिर है. दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद उसे अपनी कंपनी से ईमेल पर नौकरी से निकाले जाने का नोटिस भी मिला. वह उस वक्त तक एक निजी कंपनी क्लाइंट सर्विसिंग वर्टिकल में एक एसोसिएट के तौर पर काम कर रहा था.

उस ने हत्या के करीब एकदो सप्ताह बाद ही कालसेंटर में काम करना शुरू कर दिया था. उस का काम कंपनी के उत्पादों और सेवाओं को बेचना था. लेकिन पिछले 8-9 दिनों से काम पर नहीं आने के कारण उसे टर्मिनेशन नोटिस भेज गया था. इस केस में नएनए खुलासे होने के क्रम में यह भी पता चला कि श्रद्धा को मई में मौत के घाट उतारने के बाद भी आफताब उस के एटीएम और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता रहा. इस के अलावा उस ने श्रद्धा के अकाउंट से औनलाइन पैसे भी ट्रांसफर किए. आफताब की इस एक गलती ने उस की पोल खोल दी और पुलिस को केस को सुलझाने में मदद मिली.

श्रद्धा का फोन 26 मई, 2022 को बंद हुआ था और पुलिस ने जांच में पाया कि श्रद्धा का फोन 22 मई से 26 मई के बीच औनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल हुआ. इस दौरान श्रद्धा के बैंक अकाउंट से 54 हजार रुपए आफताब के अकाउंट में ट्रांसफर हुए थे और जिस समय फोन से औनलाइन ट्रांजैक्शन हुआ, तब फोन की लोकेशन छतरपुर (दिल्ली) ही थी.

कथा लिखने तक पुलिस आफताब के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा सबूत जुटाने की कोशिश कर रही थी ताकि वह अदालत से उसे सख्त सजा दिलवाने में सफल हो सके. पुलिस उस का नारको टेस्ट भी कराने की तैयारी कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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