Bollywood News : कंगना रनौत एक अच्छी एक्ट्रैस होने के साथसाथ निडर, बेबाक और जुझारू महिला हैं. उन के शब्दबाणों से घायल शिवसेना के नेता इतने विचलित हुए कि उन्हें अपशब्द तो कहे ही, साथ ही ठाकरे सरकार ने बदला लेने के लिए अपनी पावर का गलत इस्तेमाल कर के उन का 48 करोड़ का औफिस भी गिरा दिया. लेकिन कंगना…
16 साल की उम्र में घर छोड़ देने वाली कंगना रनौत मुंबई आ कर यूं ही इतनी बड़ी एक्ट्रेस नहीं बन गईं. इस के लिए उन्होंने कई साल अभावों में गुजारे. दिल्ली में मौडलिंग और थिएटर के नाटकों में हिस्सा ले कर गुजरबसर की. जब लगा दिल्ली में भविष्य नहीं है तो उन्होंने मुंबई की राह पकड़ी. वहां उन्होंने मौडलिंग करते हुए आशा चंद्रा के ड्रामा स्कूल में प्रशिक्षण लिया. इस के बाद कंगना के सामने कांटों भरी राह थी, जिस पर चलते हुए उन्होंने फिल्मी दुनिया के सैकड़ों रंग देखे, जिन में ज्यादातर बदरंग थे. अंतत: अभावों में रह कर भी उन्हें अपने टैलेंट के बूते पर फिल्म मिली और वह हीरोइन बन गईं.
उन की पहली फिल्म थी ‘वो लम्हे’ जिस में उन के अपोजिट थे शाइनी आहूजा. कंगना की दूसरी फिल्म थी ‘गैंगस्टर’ जो भट्ट कैंप ने बनाई थी, जिस में हीरो थे इमरान हाशमी और शाइनी आहूजा. सन 2006 में आई इन दोनों ही फिल्मों के लिए कंगना को जी सिने और फिल्मफेयर के बेस्ट फीमेल डेब्यू अवार्ड मिले. इस के बाद कंगना को फिल्म इंडस्ट्री में पहचाना भी जाने लगा और उन्हें काम भी मिलने लगा. प्रियंका चोपड़ा अभिनीत मधुर भंडारकर की फिल्म ‘फैशन’ में कंगना को दिल्ली की एक मौडल गीतांजलि नागपाल की भूमिका निभाने को मिली, जिस की ड्रग्स की वजह से मौत हो गई थी.
इस भूमिका को रियल बनाने के लिए कंगना अपने कर्ली बाल कटवा कर गंजी हो गई थीं. ‘फैशन’ 2009 में रिलीज हुई और इस के लिए कंगना को नैशनल अवार्ड मिला. अगले चंद सालों में कंगना रनौत बौलीवुड की पहली पंक्ति की हीरोइनों में गिनी जाने लगीं. उन के पास काम की कोई कमी नहीं रही. कंगना को बुलंदियों पर पहुंचाया उन की फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ और इसी की दूसरी कड़ी ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ ने. 2014 में आई कंगना की फिल्म ‘क्वीन’ ने रिकौर्ड तोड़ते हुए कंगना को सचमुच फिल्म इंडस्ट्री की क्वीन बना दिया था. इसी सब की बदौलत कंगना को 3 बार नैशनल अवार्ड मिला.
कंगना पतलीदुबली भले ही थीं, लेकिन थीं दबंग. किसी से न डरने वाली. कंगना जुझारू थीं और कदमकदम पर ठोकरें खाने के बाद इस मुकाम तक पहुंची थीं. अपने साथ कुछ गलत होते देख वह अड़ जाती थीं, इसलिए फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें पंगा गर्ल कहना शुरू कर दिया था. वैसे तो कंगना ने तमाम लोगों से पंगे लिए, लेकिन उन की दबंगई तब मुखर हो कर सामने आई जब उन्होंने रितिक रोशन की फिल्म ‘काइट्स’ के समय की एक बात पर रितिक रोशन और उन के पिता राकेश रोशन को खुला चैलेंज दिया. आखिर इस मामले में रितिक और उन के पिता राकेश रोशन को ही हथियार डालने पड़े.
उसी दौरान कंगना ने करण जौहर जैसे बड़े निर्माता को भी नहीं छोड़ा. कंगना ने करण जौहर पर भाईभतीजावाद का आरोप लगाया. करण ने पलटवार किया भी, लेकिन कंगना न तो डरने वालों में थीं और न पीछे हटने वालों में. उन्होंने दोटूक कह दिया, ‘करण होंगे बडे़ फिल्ममेकर, मुझे नहीं करना उन की फिल्मों में काम. एक फिल्म उंगली में काम किया, जो फ्लौप हो गई.’ सभी बड़े सितारे, निर्मातानिर्देशक ट्विटर पर हैं, लेकिन कंगना ट्विटर पर नहीं थीं. हालांकि वह अपनी बहन रंगोली और अपनी टीम के औफिशियल एकाउंट के जरिए अपनी बात रखती रहती थीं.
सुशांत सिंह की मृत्यु के बाद फिल्म इंडस्ट्री पर नेपोटिज्म के आरोप लगने शुरू हो गए और लोग भाईभतीजावाद को सुशांत की आत्महत्या का कारण बताने लगे. इस से भुक्तभोगी कंगना को लगा कि उन्हें भी अपनी बात रखनी चाहिए. बस, कंगना ने अपना एकाउंट बना कर ट्विटर पर आने का फैसला कर लिया. आखिर 22 अगस्त को वह अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर आ गईं. उन्होंने अपनी पहली ही पोस्ट में लिखा कि सुशांत मामले में मैं ने सोशल मीडिया की ताकत देखी, इसलिए मैं ने ट्विटर पर आने का फैसला किया. इस के बाद कंगना ने सुशांत का पक्ष लेते हुए फिल्म इंडस्ट्री के भाईभतीजावाद की कमजोर नस पर हाथ रख दिया. उन के निशाने पर करण जौहर भी थे. लेकिन इस बार करण ने पलटवार नहीं किया.
बाद में जब एनसीबी की जांच में ड्रग्स ऐंगल सामने आया तब भी कंगना ने अपनी ट्विटर वार जारी रखी. क्योंकि वह फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स की पैठ को जानती हैं. कंगना की ट्विटर वार कंगना ने बौलीवुड के कुछ लोगों को मूवी माफिया बताते हुए मुंबई पुलिस पर भी वार किया जो सुशांत की मौत से संबंधित जरूरी जांच नहीं कर रही थी. इतना ही नहीं, कंगना ने एनसीबी को बौलीवुड में ड्रग्स लेने वालों और सप्लाई करने वालों के नाम भी बताने को कहा. कंगना ने यहां तक कहा कि वह अगर कमजोर होतीं तो सुशांत की तरह कभी की आत्महत्या कर चुकी होतीं. उन का साफ कहना था कि मुंबई में आउटसाइडर से भेदभाव वाला बरताव किया जाता है. जब यह सब चल रहा था, तब कंगना मनाली स्थित अपने नए घर में थीं.
कंगना की दिलेरी और बेबाक बयानबाजी जगजाहिर है. यही वजह थी कि कंगना ने जब सुशांत की आत्महत्या पर सवाल उठाए तो मीडिया ने उन की आशंकाओं को पूरा महत्त्व दिया, सब से पहले कंगना ने ही आउटसाइडर की बात को सही ठहराते हुए अपना अनुभव सुशांत से रिलेट किया. इसी दौरान उन्होंने महेश भट्ट जैसे सीनियर फिल्मकार पर भी खुलेआम अंगुली उठाई. यह अलग बात है कि रिया वाले मामले में मीडिया महेश भट्ट का नाम पहले ही सार्वजनिक रूप से ले चुका था. सुशांत के मामले में कंगना रनौत ने शुरू से ही जिस उग्र तेवर के साथ बयान दिए, वह बौलीवुड के दिग्गजों को रास नहीं आए. लेकिन कंगना तो कंगना हैं, सब से अलग, बेबाक, जिंदादिल और निडर. उन्हें न तो फिल्ममेकर्स की परवाह है और न बौलीवुड में काम मिलने की. वह अन्य हीरोइनों की तरह बनीबनाई लीक पर चलने वालों में भी नहीं हैं.
उन्होंने तो अपने रास्ते भी खुद बनाए और अपनी मंजिल भी खुद ही निर्धारित की. रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरित कंगना ने फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन औफ झांसी’ में लक्ष्मीबाई का चरित्र निभाया ही नहीं वरन अपने अंदर हर बाधा को पार करने का हौसला, जज्बा और जुनून भी पैदा किया. कैसे मिली वाई श्रेणी सुरक्षा मुंबई पुलिस की हालत और महाराष्ट्र सरकार की कमजोरी को देख कंगना ने ट्विटर पर मुंबई की तुलना पीओके से कर दी. हालांकि उन का आशय कुछ और था, शिवसेना के नेताओं ने इसे किसी और रूप से लिया. यह 3 सितंबर की बात है. बस फिर क्या था, वाकयुद्ध में शिवसेना कंगना के सामने आ खड़ी हुई. मुंबई में कंगना के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिन में महिलाएं भी थीं. इन प्रदर्शनों में कंगना के पोस्टर जलाए गए, उन के फोटो को चप्पलों से पीटा गया.
बात तब बिगड़ी जब शिवसेना नेता और शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के सर्वेसर्वा संजय राउत ने कंगना को हरामखोर कहा. कंगना ने पलटवार किया तो शिवसेना सरकार और कंगना आमनेसामने आ गए. हालांकि संजय राउत ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने कंगना को नौटी कहा था. लोगों ने गलत मतलब निकाल लिया. इसी दरमियान संजय राउत ने कंगना को धमकी दी कि हिम्मत है तो मुंबई आ कर दिखाए. कंगना तो कंगना ठहरी, मजबूत इच्छाशक्ति वाली. उन्होंने ऐलान कर दिया कि वह 9 सितंबर को मुंबई पहुंचेंगी, जो रोक सकता है रोक ले. साथ ही यह भी कि मुंबई किसी के बाप की नहीं है.
कंगना ने मुंबई जाने की घोषणा कर दी थी तो उन्हें जाना ही था. खतरे के मद्देनजर वह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलीं. कुछ दिन पहले कंगना के मनाली वाले घर के बाहर रात में कुछ लोगों ने फायरिंग की थी, तब मुख्यमंत्री ने उन्हें 2 सुरक्षाकर्मी दिए थे. कंगना ने इस बार भी मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा तो जयराम ठाकुर ने अपनी रिकमेंडेशन केंद्र सरकार को भेजी. इसी आधार पर गृहमंत्री अमित शाह के आदेश पर कंगना रनौत को 7 सितंबर को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दे दी गई, जिस में 2 कमांडो, 2 पीएसओ सहित 11 सुरक्षाकर्मी थे. यह बात शिवसेना सरकार को पता चली तो उस ने केंद्र सरकार की आलोचना शुरू कर दी. अभी तक शिवसेना सरकार यही सोचे बैठी थी कि कंगना शायद ही आए.
लेकिन जब कंगना का आना तय हो गया तो महाराष्ट्र सरकार ने बदले की भावना से बीएमसी को आगे कर दिया. बीएमसी ने 8 सितंबर को कंगना के औफिस में छापा मारा, साथ ही गेट पर नोटिस चिपका दिया कि 24 घंटे में काररवाई होगी. 9 सितंबर को कंगना जब मनाली से मुंबई के लिए रवाना हुईं तो महाराष्ट्र सरकार कट्टर दुश्मनों की तरह बदला लेने पर उतर आई. उधर कंगना ने चंडीगढ़ से मुंबई के लिए उड़ान भरी और इधर बीएमसी बुलडोजर ले कर कंगना के पालीहिल स्थित औफिस पर जा पहुंची. फलस्वरूप कंगना के मुंबई पहुंचने से पहले ही उन का पालीहिल वाला ‘मणिकर्णिका’ औफिस गिरा दिया गया. कंगना ने करीब 48 करोड़ रुपए लगा कर यह औफिस बड़े मन से बनवाया था और रानी झांसी के नाम पर इस का नाम मणिकर्णिका रखा था.
उन के औफिस को तोड़ने के पीछे कारण बताया गया कि इस में कुछ अवैध निर्माण था और इस के लिए बीएमसी द्वारा कंगना को 2 साल पहले नोटिस दिया गया था. यहां स्पष्ट कर दें कि बीएमसी ने कंगना का अवैध निर्माण ही नहीं गिराया था, बल्कि वहां मौजूद महंगी चीजों को भी तहसनहस कर दिया था. हालांकि पालीहिल में ही कई ऐसे औफिस हैं जिन में अवैध निर्माण हुए हैं और उन्हें 2 साल पहले नोटिस भी दिए गए हैं. सवाल यह था कि कंगना का औफिस तोड़ने के लिए 9 तारीख ही क्यों चुनी गई. यह खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली बात थी. कंगना एयरपोर्ट पर हो रहे प्रदर्शनों की परवाह न कर के पूरी सिक्योरिटी में अपने घर पहुंची. घर टूटने का जैसा दर्द सब को होता है, कंगना को भी हुआ.
वह अपनी सिक्योरिटी के साथ अपना टूटा औफिस देखने गईं. लौट कर उन्होंने एक वीडियो रिकौर्ड कर के वायरल कर दिया. वीडियो में उन्होंने सीधा वार महाराष्ट्र सरकार के मुखिया उद्धव ठाकरे पर किया. सरकार पर सीधा वार वीडियो में कंगना ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है मूवी माफिया के साथ मिल, मेरा घर तोड़ कर तूने मुझ से बहुत बड़ा बदला ले लिया. आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा. ये वक्त का पहिया है, याद रखना, हमेशा एक जैसा नहीं रहता.’ इस संबंध में शिवसेना ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा और टिप्पणी करने को ले कर कंगना के खिलाफ विक्रोली और दिंडोशी 2 थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई. साथ ही महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि कंगना के खिलाफ ड्रग्स से संबंधित रिपोर्ट दर्ज करा कर जांच कराई जाएगी.
आश्चर्य की बात यह कि एक राज्य का गृहमंत्री होते हुए भी देशमुख ने इस का आधार बताया अध्ययन सुमन के कई साल पहले के एक इंटरव्यू को, जिस में उन्होंने कंगना पर तथाकथित रूप से ड्रग देने की बात कही थी. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ और संजय राउत कंगना पर अमर्यादित टिप्पणियां करते रहे और कंगना और ज्यादा उग्र हो कर ट्विटर पर जवाब देती रहीं, बिना डरे, बिना शिवसेना के डर के. जब तक कंगना मुंबई में रहीं, तब तक मीडिया भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत और रिया को भूली रही. 5 दिन मुंबई में रह कर 14 सितंबर को कंगना अपने घर मनाली लौट गईं. क्योंकि औफिस टूट जाने की वजह से वह काम तो कर नहीं सकती थीं. बहरहाल, कंगना और शिवसेना की लड़ाई अभी जारी है.
कंगना सब से अलग हैं, बिना किसी से डरे वह अपनी राह खुद चुनती हैं. कंगना कहती हैं, ‘मैं क्षत्राणी हूं. न किसी से डरूंगी, न झुकूंगी. तब तक लड़ती रहूंगी, जब तक मेरा सिर न कट जाए. एक बात और, मैं किसी भी लड़ाई को शुरू नहीं करती. हां, खत्म मैं ही करती हूं.’ फिलहाल कंगना का ट्विटर वार फिल्म इंडस्ट्री पर भारी पड़ रहा है. हालांकि जया बच्चन द्वारा संसद में उठाए गए फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने की बात पर कंगना ने जो ट्वीट किया, वह गलत था. उन्हें ट्विटर पर ऐसी बातें नहीं लिखनी चाहिए थी. लेकिन कंगना तो कंगना हैं, कहां अच्छेबुरे की सोचती हैं. हालांकि संसद में जया बच्चन की कही बातें भी बेमानी साबित हुईं, क्योंकि बौलीवुड में अब ड्रग्स से जुड़े जो बडे़बड़े नाम सामने आ रहे हैं, उन्होंने कंगना की बात को सही साबित कर दिया है.