रोजाना की तरह उस दिन भी नागपुर के थाना इमामबाड़ा के सीनियर इंसपेक्टर आनंद नर्लेकर सुबह 8 बजे ही अपनी ड्यूटी पर आ गए थे. लगभग साढ़े 8 बजे किसी ने फोन कर के उन्हें सूचना दी कि थाना क्षेत्र की जाटवरोड़ी बस्ती स्थित शुक्ला आटा चक्की के पास वाले मकान से तेज बदबू आ रही है. पुलिस ले कर आ जाएं और जांच करें क्योंकि मकान का दरवाजा बंद है.
जाटवरोड़ी बदनाम बस्ती थी, वहां आए दिन लड़ाईझगड़े होते रहते थे, जिन से पुलिस परेशान रहती थी. लेकिन यह मामला किसी जघन्य अपराध की ओर इशारा कर रहा था. सीनियर इंसपेक्टर नर्लेकर ने ड्यूटी पर तैनात सब इंसपेक्टर मुकुंद कवाड़े को फोन पर मिली सूचना के बारे में बता कर रवानगी दर्ज कराई और पुलिस टीम के साथ जाटवरोड़ी स्थित बताई गई जगह पर जा पहुंचे.
जिस मकान से बदबू आ रही थी वहां तमाम लोग एकत्र थे. पुलिस लोगों को हटा कर दरवाजे तक पहुंची. दरवाजा बाहर से बंद था और उस पर ताला लटक रहा था. पुलिस ने आसपड़ोस के लोगों से पूछताछ की तो पता चला, उस मकान में आर्केस्ट्रा डांसर पूजा अपने पति के साथ किराए पर रहती थी. यह भी जानकारी मिली कि दोनों कुछ ही महीने पहले वहां रहने के लिए आए थे. एक पड़ोसी ने यह भी बताया कि पूजा की एक मौसेरी बहन लता कभीकभी उस के पास आतीजाती थी, जो कहीं आसपास ही रहती है.
कोई और चारा न देख आनंद नर्लेकर ने अपने साथ आई पुलिस टीम को दरवाजा तोड़ने का निर्देश दिया. दुर्गंध चूंकि काफी तेज थी इसलिए पुलिस कर्मियों ने नाक पर रुमाल बांध कर दरवाजा तोड़ा. अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था.
कमरे के फर्श पर खून में डूबी एक लड़की की लाश पड़ी थी जिसे बेरहमी से कत्ल किया गया था. उस की हत्या संभवत: 2-3 दिन पहले की गई थी, इसी वजह से लाश में सड़न पैदा हो गई थी और बदबू आने लगी थी. मृतका की हत्या गला काट कर की गई थी.
मामला हत्या का था, इसलिए आनंद नर्लेकर ने इस की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी. साथ ही पुलिस फोटोग्राफर और फारेंसिक टीम को भी मौकाएवारदात पर बुला लिया. सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस आयुक्त चंद्रकिशोर मीना भी वहां आ गए. उन के सामने ही फारेंसिक टीम ने अपनी काररवाई की. लोगों को शव दिखाया गया तो उन्होंने उस की शिनाख्त पूजा के रूप में की. इस बीच किसी तरह पूजा की मौसेरी बहन लता तक भी सूचना पहुंच गई थी और वह रोतेबिलखते वहां आ गई थी. उस ने भी लाश पूजा की ही बताई.
कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने पूजा के शव को पोस्टमार्टम के लिए नागपुर मेडिकल कालेज भेज दिया. इस के बाद पुलिस पूजा की बहन लता को साथ ले कर थाने लौट आई. लता से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि पूजा पहले मुंबई में रहती थी. वहीं पर उस ने आसिफ शेख नाम के एक युवक से शादी की थी. आसिफ मनचले स्वभाव का था और उस का चालचलन ठीक नहीं था. दोनों में अकसर झगड़ा और मारपिटाई होती थी जिस की वजह से पूजा उसे छोड़ कर नागपुर आ गई थी, लेकिन आसिफ यहां भी आ गया था. उस के आने के बाद यहां भी मुंबई जैसा माहौल बन गया था.
शुरुआती जांच और लता के बयान के बाद पूजा का पति आसिफ शेख शक के घेरे में आ गया. लेकिन हकीकत उस की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आ सकती थी. आसिफ मुंबई में होगा या नहीं, इस बात की जानकारी लता को भी नहीं थी. लता के अनुसार आसिफ अपराधी प्रवृत्ति का था. ऐसे लोगों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती.
लता के बयान के बाद सीनियर इंसपेक्टर आनंद नर्लेकर ने अपने सहायकों के साथ मीटिंग कर के इस मामले के हर पहलू पर विचारविमर्श किया. तत्पश्चात उन्होंने इस की जांच की जिम्मेदारी सबइंसपेक्टर मुकुंद कवाड़े को सौंप दी. कवाड़े ने कांस्टेबल कृपाशंकर शुक्ला, प्रशांत साबरे, विनायक पाटिल और मूसासिंह को ले कर अपनी एक टीम बनाई और हत्या की जांच शुरू कर दी.
पुलिस को पता चला कि आसिफ नागपुर में रह कर कैटरर्स के साथ कैटरिंग का काम करता था. इस काम में कई लोगों से उस के करीबी संबंध बन गए थे. इसलिए पुलिस टीम ने सब से पहले नागपुर में अपनी जांच का केंद्रबिंदु उन लोगों को बनाया जिन से आसिफ के करीबी संबंध थे. इस का नतीजा भी जल्दी ही सामने आ गया. आसिफ ने अपने एक करीबी दोस्त से एक सप्ताह बाद नागपुर वापस आने की बात कही थी. उस ने यह भी कहा था कि पूजा को उसी ने मारा है.
अभी तक आसिफ संदेह के दायरे में था. इस के बाद पुलिस को पक्का यकीन हो गया कि पूजा का हत्यारा वही है. पुलिस ने उस के दोस्त की बातों को रिकौर्ड में शामिल कर के सरगर्मी से उस की तलाश शुरू कर दी.
जिस नंबर से आसिफ ने अपने दोस्त को फोन किया था, पुलिस ने जब उस की काल डिटेल्स निकलवा कर छानबीन की तो पता चला, वह काल मुंबई के थाना साकीनाका क्षेत्र में आने वाले जरीमरी इलाके से की गई थी. इसी के आधार पर मुकुंद कवाड़े की पुलिस टीम ने मुंबई आ कर जरीमरी इलाके में आसिफ की तलाश की. लेकिन एक काल के आधार पर जरीमरी जैसे घनी आबादी वाले इलाके में एक आदमी को ढूंढ़ना संभव नहीं था. फलस्वरूप पुलिस टीम को खाली हाथ नागपुर लौटना पड़ा.
नागपुर लौट कर मुकुंद कवाड़े ने वह नंबर जिस से आसिफ ने फोन किया था, सर्विलांस पर लगा दिया. साथ ही नाकासाकी थाने की पुलिस को सचेत भी कर दिया. आसिफ का नंबर सर्विलांस पर डालने के 2 हफ्ते बाद मुकुंद कवाड़े को मनचाही सफलता मिल गई. उन्होंने 19 मई को साकी नाका पुलिस की मदद से आसिफ को जरीमरी इलाके से गिरफ्तार कर लिया. उसे 2 दिन तक साकीनाका पुलिस की कस्टडी में रखा गया. 22 मई को उसे नागपुर लाया गया.
नागपुर में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उस से विस्तृत पूछताछ की गई तो पूजा की हत्या की पूरी जानकारी सामने आ गई.
28 वर्षीय आसिफ का पूरा नाम आसिफ इस्माइल शेख था. वह अपने मातापिता का इकलौता बेटा था. अधिक लाड़प्यार के कारण उस की आदतें बचपन से ही बिगड़ गई थीं. उस का पिता इस्माइल शेख आटो रिक्शा ड्राइवर था. वह साकी नाका विहार रोड और अंधेरी में आटो रिक्शा चलाता था. जबकि उस की मां सऊदी अरब में नर्स की नौकरी करती थी. व्यस्तता की वजह से इस्माइल शेख आसिफ का ज्यादा खयाल नहीं रख पाता था.
मांबाप के प्यार से वंचित आसिफ जैसेजैसे बड़ा होता गया वैसेवैसे उस के दिल से पिता का डर निकलता गया. कोई मार्गदर्शक न होने की वजह से वह अपनी ही बस्ती के रहने वाले कुछ आवारा और अपराधी प्रवृत्ति के लड़कों के संपर्क में रहने लगा. फलस्वरूप वह कम उम्र में ही चरस, गांजा, हेरोइन और शराबशवाब का आदी हो गया. कभीकभी वह डांस बारों में जा कर वहां की डांसरों के साथ भी मौजमस्ती कर लेता था. अपने इन शौकों को पूरा करने के लिए वह चोरी और राहजनी जैसे अपराध किया करता था.