‘‘प्रभात, कई बार मुझे लगता है कि तुम अब मुझे पहले की तरह से प्यार नहीं करते. हमारे प्यार में अब वह गरमाहट भी नजर नहीं आती, जो 6 साल पहले दिखती थी.’’ रितिका ने पति प्रभात से शिकायत भरे लहजे में कहा.
‘‘रितिका, ऐसा कुछ नहीं है. तुम अच्छी तरह जानती हो कि प्राइवेट जौब में काम का ज्यादा प्रेशर रहता है इसलिए मैं तुम्हारी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहा हूं. कोई बात नहीं कल तुम्हारा वीकली औफ है, मैं भी छुट्टी ले लेता हूं. कल का पूरा दिन तुम्हारे नाम ही रहेगा.’’ प्रभात ने कहा तो रितिका के चेहरे पर मुसकान तैर गई.
प्रभात जेएमआर मूवीलिंक कंपनी में मैनेजर था. जबकि रितिका एक फेमस ब्यूटी पार्लर में नौकरी करती थी. रितिका की मंगलवार को छुट्टी रहती थी इसलिए प्रभात ने उस से मंगलवार को छुट्टी करने की बात कही थी. ताकि दोनों छुट्टी एंजौय कर सकें. काफी देर तक इसी मुद्दे पर बातचीत के बाद दोनों सो गए. यह बात 23 दिसंबर, 2013 की है.
प्रभात और रितिका लखनऊ की सब से पौश कालोनी गोमती नगर के विवेकखंड में रहते थे. नीलकंठ चौराहा गोमतीनगर का सब से मशहूर चौराहा है. इन का मकान इसी चौराहे के पास था. 3 मंजिल के इस मकान में प्रभात और रितिका पहली मंजिल पर रहते थे. सुरक्षा के नजर से यहां के ज्यादातर लोगों ने मकानों में सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं.
अगले दिन यानी 24 दिसंबर को चूंकि पतिपत्नी दोनों ही छुट्टी पर थे. इसलिए वे सुबह देर से सो कर उठे. उस दिन रितिका बहुत खुश थी. वह दिन उसे बहुत प्यारा लग रहा था. क्योंकि प्रभात ने उसी के लिए छुट्टी की थी.
फ्रेश हो ने के बाद रितिका ने बड़े प्यार से पति के लिए चाय बनाई. चाय का एक ही कप देख कर प्रभात बोला, ‘‘एक ही कप! तुम नहीं पिओगी क्या?’’
‘‘वाह, चाय मैं ने बनाई और मैं ही नहीं पीऊंगी. भला ऐसा कैसे हो सकता है?’’ रितिका ने कहा.
‘‘पर चाय का तो एक ही कप है.’’
‘‘तो क्या हुआ, आज हम दोनों एक ही कप से चाय पी लेंगे. एक घूंट तुम पीना फिर एक घूंट मैं.’’ रितिका ने एक कप का राज खोलते हुए कहा.
रितिका और प्रभात का वह पूरा दिन ऐसे ही हंसीखुशी में बीत गया. दोपहर बाद रितिका ने प्रभात के करीब आ कर कहा, ‘‘प्रभात मेरी छुट्टी इतनी अच्छी बीती कि मैं सोच भी नहीं सकती. आज का दिन ऐसा लगा जैसे हमारे हनीमून के दिन थे.’’
प्रभात ने रितिका को प्यार से बांहों में समेटते हुए कहा, ‘‘तुम ऐसे ही सुंदर और सेक्सी दिखती रहो तो सारी जिंदगी हनीमून सी गुजर जाएगी.’’
‘‘प्रभात मुझे केवल एक बात की चिंता होती है कि तुम कहीं मुझ से दूर न चले जाओ. हमारा कोई बच्चा नहीं है. मुझे डर लगता है कि कहीं तुम्हारे घर वाले तुम्हारी दूसरी शादी न कर दें.’’
‘‘रितिका, ऐसा कुछ नहीं होगा. ऐसी बातें सोच कर आज के दिन की खुशियां खराब मत करो. अच्छा, अभी मैं पत्रकारपुरम चौराहे तक जा रहा हूं. आज रात को खाने में कुछ स्पेशल बनाने के लिए ले आता हूं.’’ कह कर प्रभात पत्रकारपुरम चौराहे की ओर चला गया. वहां से वह शाम करीब 7 बजे वापस आया. सामान रख कर वह रितिका से बोला, ‘‘जानू कल 25 दिसंबर है. हम लोग क्रिसमस रात को घर में ही एंजौय करेंगे. अब अगर तुम्हारी इजाजत हो तो मैं बीयर पी आऊं.’’
रितिका जानती थी कि प्रभात को बीयर बहुत पसंद है. आज वह मना कर के पूरे दिन का मजा खराब नहीं करना चाहती थी. उस ने प्रभात के गालों को थपथपाते हुए कहा, ‘‘ऐज यू विश माई लव.’’
प्रभात मोटरसाइकिल ले कर घर से निकल गया. रात करीब पौने 10 बजे जब वह वापस आया तो उसे घर का बाहरी दरवाजा खुला मिला. प्रभात को थोड़ा अजीब लगा क्योंकि रितिका इस तरह कभी भी घर का दरवाजा खुला नहीं रखती थी. वह सीधा बेडरूम की ओर गया. वहां की स्थिति देख कर उस की आंखों के आगे अंधेरा छा गया. बेडरूम में रितिका की खून से लथपथ लाश पड़ी थी.
पत्नी को इस हाल में देख कर प्रभात चीख पड़ा. उस की चीख सुन कर पड़ोस में रहने वाले मनीष और उस का भाई आशीष वहां आ गए. कमरे में रितिका की लाश देख कर उन्हें मामला समझते देर नहीं लगी. मनीष ने गोमतीनगर थाने का नंबर मिलाया. लेकिन वह नंबर व्यस्त था. गोमतीनगर थाना वहां से गरीब 400 मीटर दूर था, इसलिए दोनों भाई गोमतीनगर थाने की ओर भागे. थाने पहुंच कर मनीष ने थानाप्रभारी उमेश बहादुर सिंह को रितिका की हत्या की बात बताई. थानाप्रभारी उन के साथ तुरंत घटनास्थल की ओर चल दिए.
थानाप्रभारी ने घटनास्थल पर पहुंच कर लाश का मुआयना किया तो पता चला कि हत्यारों ने रितिका का गला किसी धारदार हथियार से काटा था. इस के अलावा उस के पेट पर भी कई वार किए गए थे जिस से उस की आतें तक बाहर निकल आई थीं. कमरे की दीवारों पर भी खून के छींटे थे. ड्राइंगरूम के बाहर 2 कुरसियों पर भी खून के निशान थे. वहीं पास पड़े दीवान पर टूटे हुए बाल पड़े थे. बाल चूंकि लंबे थे इसलिए अनुमान लगाया कि वे रितिका के ही रहे होंगे.
गद्दे पर जगहजगह खून लगा था. बेडरूम से ड्राइंगरूम तक जाने वाली गैलरी में भी खून से सने जूते के निशान मिले. तकिया भी जमीन पर पड़ा था. कमरे में चारों ओर खून ही खून फैला था. खून के निशान घर के बाहर तक गए थे. जिस से पता चल रहा था कि चोट शायद हत्यारे को भी लगी थी.
थानाप्रभारी ने यह खबर अपने आला अधिकारियों को दे दी. कुछ ही देर में डीआईजी नवनीत सिकेरा, एसएसपी जे. रवींद्र गौड़, एसपी (ट्रांसगोमती) हबीबुल हसन और सीओ (गोमतीनगर) विद्यासागर मिश्रा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. सभी अधिकारियों ने मौका मुआयना किया. डीआईजी ने प्रभात से बात की और एसपी को शीघ्र ही मामले का खुलासा करने के निर्देश दिए. पुलिस ने डौग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की टीम को भी बुला लिया था. टीम ने वहां से कुछ सुबूत अपने कब्जे में लिए.
पुलिस ने पड़ोसियों से बात की तो पता चला कि उन्होंने न तो रितिका के चीखने की आवाज सुनी थी और न ही कुत्ते के भौंकने की. प्रभात ने चूंकि एक कुत्ता पाल रखा था, इसलिए कुत्ते के न भौंकने वाली बात पुलिस को चौंकाने वाली लगी. इस से पुलिस को लगा कि हत्यारे पहले से घर में आतेजाते रहे होंगे.
बहरहाल पुलिस ने घटनास्थल पर जरूरी काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. चूंकि मामला पौश कालोनी में रहने वाली एक ब्यूटीशियन का था इसलिए उस की लाश का पोस्टमार्टम 5 डाक्टरों के पैनल ने किया. पुलिस ने भी अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली.