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फैसले में सुनाई सजा ए मौत

पीडि़त व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों को गौर से सुनने के बाद अब फैसले की बारी थी. कोर्ट रूम में मौजूद सभी की नजरें न्यायाधीश पर टिकी हुई थीं. सामने रखी फाइल के पृष्ठों को पलटने के कुछ समय बाद विद्वान न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा-

“तमाम गवाहों और सबूतों को मद्देनजर रखते हुए कोर्ट इस नतीजे पर पंहुची है कि सारे सबूत और एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह घर की नौकरानी रेनू शर्मा की अहम गवाही घटना को सच साबित करती है. दोष सिद्ध अपराधी तरुण गोयल जनपद मेरठ का मूल निवासी है. उस ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह मेरठ में सट्टे में पैसे हार गया था. उस के पिता से उस का कोई संबंध नहीं है. इसी कारण अपनी ससुराल फिरोजाबाद में आ गया था. फिरोजाबाद में उस के ससुरालीजनों ने उस का सहयोग किया.

“मृतका कमला देवी भी दोषसिद्ध अपराधी की पत्नी की नानी हैं और उन के यहां मुजरिम का सामान्य आवागमन था. घटना के दिन तरुण गोयल का पुत्र अर्नव गोयल व परिवार के अन्य सदस्य भी फिल्म देखने फिरोजाबाद के डीडी भारत सिनेमा में अर्पित जिंदल के परिवार के साथ गए थे. मृतका कमला देवी के घर पर अकेले रहने की जानकारी अपराधी को थी. इसी अवसर का लाभ उठा कर वह मृतका के घर गया.

“मुजरिम घरेलू नौकरानी रेनू शर्मा की मौजूदगी में मृतका के कमरे में लगभग सवा 2 बजे अपराह्न गया और 4 बजे के लगभग रेनू शर्मा ने उसे हाथ में पेचकस लिए तथा श्रीमती कमला देवी का शव बैड पर पड़ा देखा. इस के बाद उस ने रेनू शर्मा पर भी जान से मारने के आशय से वार किए ताकि कोई साक्ष्य शेष न रहे.

“मुजरिम तरुण गोयल का अपने मूल परिवार से कोई संबंध नहीं है. न्यायिक काररवाई के दौरान उस के परिवार का कोई सदस्य न्यायालय नहीं आया. अपने मूल परिवार से संबंध न होने के कारण उसे उस की ससुराल पक्ष द्वारा सहारा दिया गया.

“जिस परिवार द्वारा उसे सहारा दिया गया, उसी परिवार की वृद्ध महिला कमला देवी की लूट के आशय से पेचकस द्वारा वार कर के दर्द व पीड़ा दे कर नृशंस हत्या कर दी. यह परिस्थिति दर्शाती हैं कि रिहाई के बाद उस के सुधार की कोई संभावनाएं नहीं हैं.

“माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्णित विधि व्यवस्था में दिए गए दिशानिर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए मृतका श्रीमती कमला देवी की जघन्य हत्या विरल से विरलतम श्रेणी का मामला है और इस के लिए दोषसिद्ध अपराधी तरुण गोयल मृत्युदंड पाने का अधिकारी है. उसे भादंवि की धारा 302 के अंतर्गत मृत्युदंड से दंडित किया जाता है और उसे फांसी पर तब तक लटकाया जाए, जब तक उस की मृत्यु न हो जाए. इस के अलावा उसे 20 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया जाता है. अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास और भोगेगा.

“इस के अलावा भादंवि की धारा 307 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया जाता है. अर्थदंड अदा न करने पर भविष्यवर्ती परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगेगा. भादंवि की धारा 394 के अंतर्गत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपए अर्थदंड तथा इसे अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगेगा.

“भादंवि की धारा 411 के अंतर्गत 3 वर्ष कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड, जिस के अदा न करने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भोगेगा. भादंवि की धारा 506 के अंतर्गत 7 वर्ष कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड, इसे अदा न करने पर 3 माह का अतिरित कारावास भोगेगा. दोषसिद्ध अपराधी की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी.”

लोकेश जिंदल थे संपन्न व्यवसायी

आइए आप को बताते हैं कि एक साल पहले यह घटना कैसे हुई थी-

कांच की चूडिय़ों के लिए फिरोजाबाद शहर विश्व भर में प्रसिद्ध है. अब यहां चूडिय़ों के साथ ही कांच के अन्य सामान झाड़ (झूमर), लैंप, रंगबिरंगे खिलौने आदि भी बनाए जाने लगे हैं. आर्यनगर घनी आबादी वाला मोहल्ला है. आर्यनगर मोहल्ले की गली नंबर 9 में अपने पुश्तैनी मकान में कोयला व्यवसायी लोकेश जिंदल उर्फ बबली अपनी पत्नी शोभा, बेटे अर्पित व वृद्ध मां कमला देवी के साथ रहते थे.

असली कहानी एक साल पहले शुरू होती है. उस दिन शुक्रवार 1 अप्रैल, 2022 का दिन था. अर्पित अपनी मां, बुआ व चाचा के परिवार के सदस्यों के साथ अपने घर से करीब 6 किलोमीटर दूर आसफाबाद स्थित डीडी भारत टाकीज में फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का इवनिंग शो देखने गए थे.

घर पर 70 वर्षीय वृद्धा कमला देवी रह गई थीं. वह अस्वस्थ चल रही थीं. इसलिए जाने से पहले उन की देखभाल के लिए घर की नौकरानी रेनू शर्मा को फोन कर के बुला लिया था. अपराह्न 2 बजे रेनू घर आ गई थी. रेनू के आते ही सभी लोग घर से निकल गए थे.

रेनू को आए अभी मात्र 15 मिनट ही हुए थे कि डोरबैल बज उठी. घंटी की आवाज सुन कर नौकरानी रेनू ने दरवाजा खोला. दरवाजे पर तरुण गोयल खड़ा था. रेनू तरुण को अच्छी तरह जानती थी. क्योंकि वह घर का दामाद था. तरुण रेनू से बिना कुछ बोले कमला देवी के कमरे में चला गया.

उस समय कमला देवी सो रही थीं. कुछ देर बैठने के बाद तरुण ने रेनू को बुलाया और चाय बनाने के लिए कहा. उस ने रेनू से कहा, “अम्माजी सो रही हैं इसलिए चाय बना कर वहीं रख देना, मैं ले लूंगा.”

रेनू किचन में चाय बनाने चली गई.

उस समय कमला देवी सो रही थीं. तरुण ने जैसे ही कमरे में रखी अलमारी को खोला. आहट सुन कर कमला देवी जाग गईं. इस पर कमला देवी ने टोकते हुए कहा, “कौन है?”

तभी तरुण ने कहा, “नानी सास, कोई नहीं, मैं हंू.”

उन्होंने तेज आवाज में कहा, “अलमारी क्यों खोल रहे हो?”

इस पर तरुण ने कमरे में रखे पेचकस से उन के गले, छाती व पेट पर वार करने शुरू कर दिए. अचानक हुए हमले से कमला देवी की चीख निकल गई. उन्होंने शोर मचाया इस पर तरुण ने वाशबेसिन का शीशे को तोड़ दिया और उस के कांच से कमला देवी पर हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया. हमले से बैड की चादर खून से रंग गई.

                                                                                                                                                क्रमशः

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