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जरीना के घर वालों ने शैफी से उस की शादी उस की संपन्नता की वजह से की थी. शैफी 3 बच्चों का बाप था, जबकि जरीना कुंवारी थी. जरीना भले ही शैफी के 7 बच्चों की मां बन गई थी, लेकिन वह शैफी से न कभी तन से संतुष्ट हुई, न मन से. उस ने अपनी जवानी कसमाहट में निकाल दी थी. उस की भावना का जो ज्वार उफान मारता था, शैफी कभी उसे शांत नहीं कर पाया था.

समय का पहिया अपनी गति से घूमता रहा. शैफी ने पहली पत्नी से पैदा हुई संतानों का विवाह कर दिया. बड़ी बेटी हसीना का विवाह उस ने मथुरा के मांट कस्बे में किया तो बड़े बेटे शमशेर का विवाह आगरा के ही बाईपुर में किया था.

जरीना शैफी की पहली पत्नी के बेटे शमशेर को अपनी पत्नी के साथ कमरे में सोते देखती तो उस के मन में आता कि अगर उस का विवाह किसी हमउम्र के साथ हुआ होता तो वह भी इसी तरह उस के साथ कमरे में लेटी होती. ऐसा ही कुछ सोचतेसोचते उस की नजर घर के सामने रहने वाले हनीफ खां के बेटे वकील पर पड़ी, जो जवानी की दहलीज पर कदम रख रहा था.

वकील और उस की उम्र का अंतर इसी बात से लगाया जा सकता है कि जरीना की शादी के 2 साल बाद वकील पैदा हुआ था. वकील उम्र के उस दौर से गुजर रहा था, जब औरतें बहुत आकर्षित करती हैं. इस उम्र में अच्छेबुरे और रिश्तेनातों का भी खयाल नहीं रहता. आदमी की यह उम्र जल्द ही भटका देने वाली होती हैं.

जरीना की नजरें वकील पर पड़ीं तो उस ने उसे हुस्न के लटकेझटके दिखाने शुरू किए. महिला देह के आकर्षण में बंधे वकील को भटकते देर नहीं लगी. जरीना की देह को पाने के लिए उस का मन मचल उठा. पिता की मौत के बाद वकील के भाइयों ने घर का बंटवारा कर लिया था. वकील के हिस्से में भी एक कमरा आया था, जिस में वह अकेला ही रहता था. वही कमरा वकील और जरीना के मिलने का साधन बना.

पिता की मौत के बाद वकील का कोई निश्चित ठौर ठिकाना नहीं रहा था तो शैफी ने उस के खानेपीने की व्यवस्था अपने यहां करवा दी थी. कभी वह उन के घर जा कर खाना खा लेता था तो कभी जरीना उस के कमरे पर जा कर खाना दे आती थी. ऐसे ही पलों में दोनों का एकदूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ा था और परिणामस्वरूप उन के बीच अवैध संबंध बन गए थे.

दोनों मौके का फायदा उठा रहे थे. कोई उन पर शक भी नहीं करता था. इस की वजह दोनों की उम्र का अंतर था. जरीना की उम्र वकील की उम्र से दोगुनी से अधिक थी. दोनों मांबेटे जैसे लगते थे.

धीरेधीरे महीनों बीत गए. जरीना को प्रेमी से छिपछिप कर मिलना अच्छा नहीं लगता था. वह प्रेमी के साथ खुल कर मौजमजा करना चाहती थी. शैफी उस की जो इच्छाएं पूरी नहीं कर सका था, अब वह अपने आशिक के साथ पूरी कर लेना चाहती थी. लेकिन यह तभी संभव था, जब दोनों साथ रहें.

जरीना वैसे भी शैफी से बुरी तरह ऊब चुकी थी. इसी का नतीजा था कि उस ने अपनी आधी से भी कम उम्र के प्रेमी वकील के साथ भागने का निश्चय कर लिया. अपने शरीर के आकर्षण की बदौलत उस ने प्रेमी वकील को इस के लिए भी राजी कर लिया. वकील अकेला तो था ही, शायद इसीलिए जरीना ने जब उस से भागने को कहा तो वह खुशीखुशी तैयार हो गया.

योजना बनी और फिर उसी योजना के अनुसार एक दिन हैदराबाद जाने की बात कह कर वकील अपने कमरे पर ताला लगा कर जरूरत का सारा सामान अपने साथ ले कर चला गया.

वकील ने घर में भले ही हैदराबाद बताया था, लेकिन वह हाथरस गया था, जहां पहले ही उस ने मोहल्ला वालापट्टी में कमरा किराए पर ले रखा था. आगरा वाले कमरे का सामान उस ने वहां पहुंचा दिया. वह अपने साथ ऐसा कोई सामान नहीं ले गया था, जिस से लोग उस पर शक करते. वकील के जाने के 15 दिनों बाद अचानक एक दिन जरीना भी घर से गायब हो गई.

जरीना का इस तरह अचानक घर से गायब हो जाना हैरानी वाली बात थी. 7 बच्चों की मां जरीना के बेटे बेटियों में 2 की तो शादी भी हो चुकी थी. सालभर पहले वह नानी भी बन चुकी थी, इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता था कि किसी के प्रेम में पागल हो कर वह पति और बच्चों को छोड़ कर भाग गई होगी. 45-50 वर्षीया जरीना का अपने शौहर शैफी से कोई झगड़ा वगैरह भी नहीं हुआ था. वह किसी पराई औरत के प्यार में पागल भी नहीं था कि घर में किसी तरह का क्लेश रहा हो.

पूरे परिवार ने जरीना को कहांकहां नहीं खोजा, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला. शैफी उत्तर प्रदेश के शहर आगरा के थाना एत्माद्दौला के मोहल्ला इसलामनगर का रहने वाला था. मोहल्ले में उस की गिनती एक तरह से संपन्न और प्रभावशाली लोगों में होती थी. इसलिए दुख की इस घड़ी में पूरा मोहल्ला उस के साथ था. जरीना की खोजखबर में सभी उस की मदद कर रहे थे.

कई दिन बीत गए और जरीना का कुछ पता नहीं चला तो मोहल्ले के कुछ वरिष्ठ और प्रभावशाली लोगों के साथ वह थाना एत्माद्दौला पहुंच गया. थाना पुलिस ने जरीना की गुमशुदगी दर्ज कर ली और कहा कि वह तो जरीना को तलाश करेगी ही, वह खुद भी उस की तलाश करता रहे. यह 4 साल पहले की बात है.

पुलिस को जरीना की क्या चिंता थी, जो उस के पीछे भागती. लेकिन शैफी की तो पत्नी थी, इसलिए वह लगातार उस की तलाश करता रहा. अगर जरीना अपना मोबाइल फोन साथ ले गई होती तो उस के लोकेशन के आधार पर थाना पुलिस शायद उस का पता लगा लेती. लेकिन जरीना का फोन उस के बैड पर पड़ा मिला था.

दिन, हफ्ते, महीने ही नहीं, पूरे ढाई साल गुजर गए, जरीना का कुछ पता नहीं चला. वह जिंदा है या मर गई, इस बात का भी कुछ पता नहीं चला था. उस का इस तरह रहस्यमय ढंग से गायब हो जाना मोहल्ले वालों के लिए हैरानी की बात थी.

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