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18 मार्च, 2023 की रात करीब साढ़े 11 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के रीवा शहर की पडऱा इलाके की दुर्गा कालोनी में रहने वाली 31 साल की शालेहा परवीन बदहवास हालत में अपने पति शाहिद को ले कर अपनी मां के साथ संजय गांधी मेमोरियल जिला अस्पताल पहुंची. शालेहा आंखों में आंसू लिए ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से गुहार लगाते हुए बोली, “डाक्टर साहब, मेरे पति को बचा लीजिए.”

“आखिर क्या हुआ है इन को. इन की हालत तो काफी नाजुक है.” शाहिद की नब्ज पर हाथ रखते हुए डाक्टर ने पूछा.

“डाक्टर साहब, इन्होंने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किया है, जल्दी से इलाज कीजिए इन का.” कहते हुए शालेहा फफकफफक कर रोने लगी.

डाक्टर ने स्टेथेस्कोप को कान में लगा कर उस का चेकअप किया. कुछ ही सेकेंड बाद डाक्टर ने शालेहा की ओर मुखातिब होते हुए कहा, “आई एम सौरी, ही इज नो मोर.”

डाक्टर के इतना कहते ही शालेहा दहाड़ मार कर रोने लगी. शालेहा की मां ने उसे संभालते हुए कहा, “शालू रो मत बेटी, शायद खुदा को यही मंजूर था. अपने आप को संभाल और शाहिद के पापा को इत्तिला कर दे बेटी.”

कुछ देर बाद शालेहा ने अपने पर्स से शाहिद का मोबाइल फोन निकालते हुए अपने ससुर को यह दुखद खबर सुना दी. यूं तो

शालेहा के ससुर सलामत खान परिवार के खिलाफ जा कर शादी करने की वजह से शाहिद से नाराज थे. पिछले 7 सालों से दोनों के बीच बातचीत बंद थी. मगर बेटे की मौत की सूचना मिली तो जल्दी से अस्पताल पहुंच गए. हौस्पिटल पहुंचे तो देखा शाहिद का बदन सफेद चादर में लिपटा हुआ था. उस के पास ही बहू शालेहा और उस के अब्बूअम्मी खड़े थे.

तब तक अस्पताल प्रशासन की सूचना पर थाना सिविल लाइंस पुलिस अस्पताल आ चुकी थी. पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. शालेहा ने अपने ससुर को रोतेबिलखते हुए बताया, “अब्बाजान, किसी बात से नाराज हो कर शाहिद ने जहर पी लिया था, मैं उन्हें ले कर अस्पताल आई, लेकिन उन्हें बचा नहीं सकी.”

सलामत खान को वहां पर शालेहा और उस की अम्मी का रवैया संदिग्ध लग रहा था. उन्होंने देखा कि बहू शालेहा अपने अब्बू और अम्मी से बारबार कानाफूसी कर रही थी, इसलिए बहू की बात सुन कर सलामत खान वहीं पर बुरी तरह बिफर पड़े. उन्होंने बहू पर आरोप लगाते हुए कहा, “तुम्हारी हरकतों की वजह से ही मेरे बेटे की जान गई है.”

सलामत खान ने पुलिस से कहा कि मेरे बेटे ने आत्महत्या नहीं की है. उसकी पत्नी ने ही उसे जहर दे कर मारा है. पुलिस ने सभी के बयान दर्ज कर लिए, मगर पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था, जिस से सलामत खान की बात को सही साबित कर सके.

लव मैरिज से नाराज थे पिता

पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) में असिस्टेंट ड्राफ्ट्समैन के पद से रिटायर 65 साल के सलामत खान रीवा के घोघर मोहल्ले में रहते हैं. उन की 2 बेटियां और एक 37 साल का बेटा शाहिद था. शाहिद बचपन से ही होनहार था. उसे मोबाइल और नेटवर्क से जुड़े काम में काफी रुचि थी. साल 2015 में रीवा के न्यू बस स्टैंड के पास एक मोबाइल शोरूम खुला था. उस के लिए वैकेंसी निकली तो कई लडक़े व लड़कियों ने इस के लिए इंटरव्यू दिए.

इंटरव्यू में शाहिद के साथ शालेहा परवीन नाम की लडक़ी का भी चयन हुआ था. मोबाइल शोरूम में दोनों दिन भर साथ काम करते थे. इस वजह से शाहिद खान की दोस्ती शालेहा से हो गई. दोनों ड्यूटी पर साथ रहते, वहां से भी साथ में ही निकलते और खाली समय भी एकदूसरे के साथ बिताने लगे. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. जब उन का प्यार परवान चढऩे लगा तो दोनों के रिश्ते के बारे में घर वालों को भी पता चला.

शाहिद के पिता ने जब लडक़ी के बारे में जानकारी जुटाई तो उन के नजदीकी रिश्तेदारों ने बताया कि लडक़ी का चालचलन ठीक नहीं है. शाहिद तो शालेहा के प्यार में इस कदर दीवाना हो चुका था कि परिवार के लाख समझाने के बाद भी नहीं माना और घर वालों की मरजी के खिलाफ जा कर 2016 में शालेहा से लव मैरिज कर ली.

शाहिद के घर वाले इस बात से बहुत खफा हो गए और उन्होंने शाहिद को घर से निकाल दिया. शाहिद रीवा शहर की पडऱा इलाके की दुर्गा कालोनी में किराए के मकान में बीवी शालेहा के साथ रहने लगा. शादी के बाद शाहिद के सासससुर का उस के घर में दखल बढ़ गया था.

parents

शादी के 2 साल तक सब कुछ ठीक रहा, इस दौरान शालेहा ने एक बेटी को जन्म दिया. लेकिन उस के बाद दोनों के बीच छोटीछोटी बातों को ले कर विवाद होने लगा. इस बात की भनक शाहिद के वालिद सलामत खान को भी थी, मगर वह शाहिद से इतने खफा थे कि उस से कोई मतलब नहीं रखना चाहते थे. उन का मानना था कि जिस बेटे ने हमारी बात ही नहीं मानी तो हमें भी उस की फिक्र नहीं है. वह अकसर यही कहते थे कि शाहिद ने गलत कदम उठाया है तो खुद ही भुगते.

मृतक के मोबाइल में छिपा मौत का राज

शाहिद के पिता सलामत खान को यकीन नहीं हो रहा था कि शाहिद इस तरह खुदकुशी कर सकता है. मौत के तीसरे दिन 21 तारीख की बात है, उन्होंने देखा कि शाहिद की मौत का गम बहू के चेहरे पर कहीं नजर नहीं आ रहा था. शाहिद की मौत के बाद बहू दिन भर उस का मोबाइल यूज कर रही थी.

उन्होंने गुस्से में बहू को डांटते हुए उस से मोबाइल ले लिया था. सलामत खान को यह बात समझ नहीं आ रही थी कि उन के इकलौते बेटे की मौत से परिवार में मातम पसरा था, मगर बहू के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी. उस दिन शाम को वह शाहिद का मोबाइल साथ ले कर घर लौट आए.

21 मार्च को ही शाहिद की बहन मातमपुरसी के लिए अपने मायके आई हुई थी. उस समय वह अपने भाई को याद कर उस का मोबाइल देख रही थी, तभी अचानक मोबाइल में एक वीडियो देख कर उस की बहन चौंक गई. वह दौड़ती हुई अपने अब्बू के पास आ कर बोली, “अब्बा, इस मोबाइल में भाईजान का एक वीडियो है, जिस में वो बता रहे हैं कि उन्हें जान से मारने के लिए चाय में जहर मिला कर दिया गया है.”

“बेटी, जरा मुझे भी दिखाओ कैसा वीडियो है.” अपनी बेटी के हाथ से मोबाइल लेते हुए सलामत खान बोले. जैसे ही उन्होंने वीडियो देखा तो उन का शक पुख्ता हो गया. वे बिना देर किए मोबाइल ले कर सिविल लाइंस थाने पहुंच गए. वीडियो में शाहिद बारबार अपनी मौत के लिए ससुराल वालों को जिम्मेदार बता रहा था.

                                                                                                                                         क्रमशः

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