बदल गई जिंदगी
कल के गंगू तेली उज्ज्वला और रोहित एक झटके में राजा भोज बन गए थे. सब कुछ सैटल हो गया तो एन.डी. तिवारी अपनी नई पत्नी और नाजायज से जायज बन चुके बेटे के साथ दिल्ली स्थित डिफेंस कालोनी में आ कर रहने लगे. इस आलीशान हवेली की आलीशान जिंदगी रोहित को मिली तो वह बौरा उठा. शौकिया शराब पीने वाला रोहित अब आदतन पियक्कड़ बन चुका था.
वह अकसर अपने नजदीकी लोगों से कहता था कि वह शायद दुनिया का पहला शख्स है जिस ने अपने नाजायज होने की लड़ाई लड़ी, साथ ही वह प्रकाश मेहरा निर्देशित मशहूर फिल्म ‘लावारिस’ फिल्म का वह डौयलोग भी दोहराता था जो नायक अमिताभ बच्चन ने अपने नाजायज पिता बने अमजद खान से कहा था कि कोई भी बेटा नाजायज नहीं होता बल्कि बाप नाजायज होता है.
बहरहाल, जिंदगी ढर्रे पर आ गई तो अनुभवी एन.डी. तिवारी ने रोहित को राजनीति में उतारने की सोची क्योंकि तमाम बदनामियों और दुश्वारियों के बाद भी वे राजनीति से पूरी तरह खारिज नहीं हुए थे. यह वह दौर था जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस बेहद कमजोर पड़ने लगी थी. यह भी सच है कि इन राज्यों में अगर कांग्रेस को कोई वापस खड़ा कर सकता था, तो वह एन.डी. तिवारी ही थे.
लेकिन राहुल और सोनिया गांधी ने एन.डी. तिवारी पर दांव खेलने का जोखिम नहीं उठाया. रोहित के मुकदमे से हुई बदनामी तो इस की एक वजह थी ही, साथ ही वे 88 साल के हो रहे थे. लिहाजा पहले जैसी भागदौड़ नहीं कर सकते थे. एन.डी. तिवारी ने रोहित को कांग्रेस में जमाने की कोशिश की, लेकिन बात बनी नहीं. इस के बाद वह भाजपा की शरण में गए, लेकिन यहां के शटर भी उन के लिए गिर चुके थे.
जब उन्हें समझ आ गया कि अब कुछ नहीं हो सकता तो वे एक शांत जिंदगी जीने की कोशिश में लग गए. रोहित और उज्ज्वला ने अपना फर्ज बखूबी निभाया और बीमार एन.डी. तिवारी की सेवा की.
जब दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कैंसर जैसी घातक बीमारी से वह जूझ रहे थे, तब उन्हें उन्हीं लोगों ने सहारा दिया और संभाला, जिन्हें वह कभी दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक चुके थे. 18 अक्तूबर, 1925 को नैनीताल में जन्मे एन.डी. तिवारी की मौत भी 18 अक्तूबर, 2018 को ही हुई.
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अपूर्वा की एंट्री
मृत्यु से पहले वे बहू का मुंह देख चुके थे. रोहित ने अपनी पसंद की लड़की अपूर्वा शुक्ला से शादी कर ली थी. अपूर्वा मूलत: इंदौर की रहने वाली है और पेशे से रोहित की तरह वकील है. इन दोनों की मुलाकात अकसर सुप्रीम कोर्ट में होती रहती थी. अपूर्वा की पढ़ाई इंदौर में ही हुई थी, उस के पिता पी.के. शुक्ला इंदौर के नामी वकील हैं. इंदौर में प्रैक्टिस के साथसाथ अपूर्वा सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे लड़ने दिल्ली भी जाने लगी थी.
अपूर्वा एक मध्यमवर्गीय परिवार की महत्त्वाकांक्षी और बेइंतहा खूबसूरत लड़की है, जिस की प्रैक्टिस कोई खास नहीं चलती थी. रोहित जैसा भी था, उस की नजर और आकलन में बेशुमार दौलत का मालिक था. इसलिए उस ने शादी के लिए हां कर दी.
इधर रोहित की दिक्कत यह थी कि एक मशहूर शख्सियत का बेटा होने के बाद भी बराबरी के घराने की लड़की उस से शादी करने को शायद ही तैयार होती क्योंकि आखिरकार वह एक समय में नाजायज औलाद था.
उम्र का 40वां पड़ाव छू रहे रोहित को भी अपूर्वा भा गई थी. दोनों एक साल डेटिंग करने के बाद 11 मई, 2018 को शादी के बंधन में बंध गए. दिल्ली के नामी होटल अशोका में हुई इस शादी में देश की कई जानीमानी राजनैतिक हस्तियां शामिल हुई थीं.
अपूर्वा एन.डी. तिवारी की बहू और रोहित शेखर की पत्नी बन कर डिफेंस कालोनी के उन के आलीशान घर में आ कर रहने लगी थी. स्वास्थ्य कारणों से एन.डी. तिवारी बेटे की शादी में शामिल नहीं हो पाए थे.
इस शादी में सब कुछ ठीकठाक नहीं रहा था. एक ज्योतिषी की सलाह पर अपूर्वा की मां मंजुला शुक्ला ने एक खास तरह की पूजा संपन्न कराई थी, जिस से बेटी का दांपत्य जीवन सुखी रहे. वरमाला के वक्त स्टेज पर भी काफी कुछ असहज दिखाई दिया था, जिस का खुलासा रोहित की हत्या के बाद हुआ.
वह 13 अप्रैल, 2018 का दिन था, जब रोहित अपना वोट डालने के लिए उत्तराखंड के कोटद्वार के लिए अपने परिवारजनों के साथ कारों के काफिले के साथ रवाना हुआ था. रोहित की शादी के बाद उज्ज्वला दूसरे बंगले में रहने आ गई थीं जो तिलक लेन में स्थित है. उन के साथ रोहित का मुंहबोला भाई राजीव जो उज्ज्वला के पहले पति का बेटा है और उस की पत्नी कुमकुम रहते थे. रोहित का सौतेला भाई सिद्धार्थ रोहित के साथ रहता था.
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मां के दूसरे घर में चले जाने के बाद रोहित और भी बेलगाम हो चला था. उस के पास बेशुमार पैसा खर्च करने के लिए था, जिस का वारिस वह लंबी कानूनी लड़ाई और बदनामी के बाद बना था. लिहाजा उस ने पैसे की कीमत नहीं समझी. एन.डी. तिवारी की उसे राजनीति में लाने की कोशिशें नाकाम रही थीं यानी उसे अपने जैविक पिता के हिस्से की दौलत तो मिल गई थी, लेकिन शोहरत नहीं मिल पाई थी.
डिफेंस कालोनी के इस बंगले के अंदर क्या कुछ हो रहा है, इस का अंदाजा बाहर किसी को नहीं था. बड़े लोगों के घरों में किस तरह का तनाव पसरा रहता है, इस का अंदाजा आमतौर पर कोई नहीं लगा पाता. क्योंकि लोगों की नजर में पैसा है तो सब कुछ है, होता है. जबकि हकीकत में संभ्रांत और अभिजात्य कहे जाने वाले इन लोगों के घरों में भी खूब घटिया आरोप प्रत्यारोप, कलह और व्यभिचार होता है.
रोहित कोटद्वार में वोट डाल कर 15 अप्रैल की ही रात घर वापस आ गया था. वह शराब के नशे में था, लेकिन पूरी तरह धुत नहीं था. डिनर उस ने परिवारजनों के साथ लिया, इस के बाद उज्ज्वला तिलक लेन अपने घर चली गईं. उन के जाने के बाद अपूर्वा और रोहित में किसी बात पर कलह किचकिच हुई, जिस से दोनों का मूड औफ हो गया.
पतिपत्नी में हुई थी झड़प
कलह के बाद रोहित ऊपरी मंजिल के अपने कमरे में सोने चला गया और अपूर्वा रोज की तरह नीचे की मंजिल के कमरे में सोई. बंगले की बत्तियां बुझीं तो घरेलू नौकर गोलू और ड्राइवर अभिषेक भी अपनेअपने कमरों में जा कर सो गए. भाई भाभी की आज की कलह के अंजाम से अंजान सिद्धार्थ भी अपने कमरे में जा कर पसर गया, जिस ने एक गंभीर बीमारी का मरीज होने के चलते शादी नहीं की थी.
दूसरे दिन सुबह सभी उठ कर अपने अपने काम में लग गए, सिवाए रोहित के जो अकसर देर से उठता था.चूंकि कुछ महीने पहले ही उस की बाईपास सर्जरी हुई थी, इसलिए कोई उस की नींद में खलल भी नहीं डालता था. वैसे भी वह बीती रात कोटद्वार से लौटा था, इसलिए सभी को उस के देर तक सोने की उम्मीद थी. किसी ने उस के कमरे में झांकने तक की जरूरत नहीं समझी.
दोपहर ढलने लगी थी. शाम कोई 4 बजे गोलू किसी काम से रोहित के कमरे में गया तो वहां का नजारा देख घबराया हुआ उलटे पांव नीचे आ गया. उस ने अपूर्वा को बताया कि साहब बिस्तर पर बेसुध पड़े हैं और उन की नाक से खून बह रहा है. यह सुनते ही वह घबरा गई और उस ने तुरंत उज्ज्वला को फोन कर रोहित की हालत से अवगत कराया.
इत्तफाक से उज्ज्वला अपने इलाज के सिलसिले में उस वक्त साकेत के मैक्स अस्पताल आई थीं, इसलिए उन्होंने तुरंत अस्पताल की एम्बुलैंस डिफेंस कालोनी स्थित अपने घर भेज दी. एम्बुलैंस से अपूर्वा रोहित को ले कर मैक्स अस्पताल आ गई, लेकिन वहां मौजूद डाक्टरों ने चंद मिनटों की जांच के बाद रोहित को मृत घोषित कर दिया.
इस मामले में चूंकि मैडिको लीगल केस बनता था, इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने इस की खबर पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. यह मामला चूंकि थाना डिफेंस कालोनी क्षेत्र का बनता था, इसलिए कंट्रोल रूम ने थाना डिफेंस कालोनी को सूचना दे दी.
जांचकर्ता पुलिस टीम
पुलिस आई और जांच व पूछताछ में जुट गई. चूंकि मामला एन.डी. तिवारी के बेटे रोहित शेखर की संदिग्ध मौत का था, इसलिए पुलिस ने संभल कर काम लिया. अपने बयान में उज्ज्वला ने रोहित की बाईपास सर्जरी होने की बात बताई और यह भी बताया कि उस के पिता की मौत भी ब्रेन हेमरेज से हुई थी तो एक क्षण को पुलिस वालों को लगा कि यह स्वाभाविक मौत भी तो हो सकती है. अपूर्वा ने भी रात का घटनाक्रम दोहरा दिया.
चूंकि मौत संदिग्ध थी, इसलिए पुलिस कोई लापरवाही न करते हुए रोहित के घर तक गई. मौत का यह शक उस वक्त यकीन में बदलने लगा, जब अपूर्वा ने कानून की दुहाई देते पुलिस को घर में जाने से रोकने की कोशिश की.
रोहित की लाश पोस्टमार्टम के लिए सौंप चुके पुलिस वालों ने जब रोहित के बैडरूम की तलाशी ली तो बिस्तर के आसपास तरह तरह की दवाइयां बिखरी पड़ी थीं. रोहित के सभी परिवारजन मौत को स्वाभाविक बता रहे थे, इसलिए पुलिस ने कमरे को सील कर दिया. अब पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था.