उस के कंधों को पकड़ कर उस ने उसे अपनी तरफ घुमाया तो राधा का पूरा जिस्म कांप गया. किसी अंजान पुरुष का पहला स्पर्श था यह, वह रोमांच से भर गई.
“मेरी तरफ देखो राधा,” अनुराग प्यार से उस की ठोड़ी ऊपर उठाते हुए बोला, “मेरी आंखों में देखो राधा, इन में तुम्हारी छवि बस गई है. मैं तुम्हें पहले से जानता हूं, लेकिन कल शाम को तुम्हें देख कर मेरे दिल ने अंगड़ाई ली है, यह तुम्हें चाहने लगा है. क्या तुम मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह दोगी राधा?”
“हां.” राधा के थरधराते होंठों से स्वयं निकल गया.
खुशी से अनुराग ने उस का चेहरा ऊपर उठाया और माथा चूमते हुए बोला, “आज मेरी उड़ानों को तुम्हारे प्याररूपी पंख लग गए हैं. राधा, मैं तुम्हें शिद्दत से प्यार करूंगा, तुम्हें अपनी रानी बनाऊंगा.”
राधा का जिस्म प्यार के इस पहले अहसास के रोमांच से भर गया था, वह अनुराग के साथ सटी कांप रही थी. अनुराग उस से प्यार भरे वादे करता रहा और फिर उसे छोड़ कर कब चला गया, पता ही नहीं चला. उसे होश आया तो वह अपनी दशा पर लजा गई. पलंग पर औंधी लेट कर वह अनुराग के खयालों में खोती चली गई.
छूट गया राधा का प्यार
राधा के दिल में अनुराग रचबस गया था. राधा की मौसी मध्य प्रदेश के भिंड जिले के चतुर्वेदी नगर में रहती थी और राधा इटावा शहर में. अनुराग से प्यार हुआ तो राधा बारबार मौसी के घर भिंड आने लगी. अनुराग मौसी के पड़ोस में ही रहता था, इसलिए उस से बात करने में राधा को परेशानी नहीं होती थी. उन्हें बाहर जाना होता था तो आंखों ही आंखों में इशारा कर के वे शहर की रमणीक जगहों पर पहुंच जाते. घटों वहां बैठ कर प्यार की बातें करते, भविष्य के तानेबाने बुनते.
अनुराग ने राधा से वादा किया था कि प्रतियोगिता परीक्षा में पास होने के बाद वह नौकरी करेगा, फिर उस से शादी कर लेगा. राधा को अनुराग पर पूरा विश्वास था, वह पति के रूप में अनुराग को ही पाना चाहती थी. दोनों प्यार के सफर में मन से ही नहीं, तन से भी एक हो गए थे. राधा की मौसी जब किसी काम से बाहर जाती थी तो अनुराग और राधा अपने तन की प्यास बुझा लेते थे. अनुराग को अपना तन सौंप देने के बाद राधा ने उस से वादा ले लिया था कि वह उसे ही अपनी दुलहन बनाएगा.
अनुराग भी दिल से राधा को प्यार करता था, उसे इंतजार था अच्छी सी नौकरी का. नौकरी लग जाने के बाद वह अपने प्यार का जिक्र घर में मां, पिताजी से कर के राधा को बहू के रूप में स्वीकार कर लेने की जिद कर सकता था. अभी वह पिता सबल सिंह की कमाई पर जी रहा था. नौकरी पा लेने के बाद घर वाले उस की बात को नहीं टाल सकते थे.
इंतजार में कब 4 साल गुजर गए, दोनों को पता ही नहीं चला. प्रेम प्रसंग की कहानी ऐसे ही चलती रही. दोनों का प्यार परवान चढ़ चुका था. अभी तक उन के लव अफेयर्स की भनक किसी को नहीं लगी थी. राधा की मौसी की अनुराग की मां से गहरी छनती थी. दोनों एकदूसरे के दुखसुख में साथ खड़ी रहती थीं. यही वजह थी कि अनुराग बेधडक़ राधा की मौसी के घर में आताजाता था. राधा ग्रैजुएशन कर रही थी. अनुराग उस को किसी सब्जेक्ट में उलझ जाने पर समझाता था. दोनों साथसाथ बैठ कर पढ़ते थे. इसी बहाने उन्हें प्यार करने का मौका मिल जाता था, किसी को अभी तक यह समझ नहीं आया था कि उन दोनों के बीच क्या चल रहा है.
कहते हैं कि इश्क और मुश्क लाख परदे में छिप कर किया जाए, उजागर हो ही जाता है, उन के प्यार की महक भी आसपास फैलने लगी. धीरेधीरे यह राधा की मौसी को भी मालूम हो गया कि राधा और अनुराग के बीच प्यार की खिचड़ी पक रही है.
जवान लडक़ी का मामला था. ऊंचनीच हो जाएगी तो वह अपनी बहन जीजा को क्या जवाब देगी. मौसी ने राधा को सख्त हिदायत दे दी और उस की मां को कह दिया कि वह अब उस के घर कभी नहीं आएगी. मां को राधा का अनुराग से प्यार होने की बात बता कर उसे भी चेता दिया कि वह आईंदा राधा को चतुर्वेदी नगर न भेजे.
राधा की हरकतें जान लेने के बाद राधा की मां ने पति के कान में बात डाल कर दबाव बनाया कि वह राधा के लिए कोई अच्छा सा लडक़ा देख कर उस की शादी कर दें. राधा के पिता ने राधा के लिए लडक़ा देखने के लिए भागदौड़ शुरू कर दी. शीघ्र ही भिंड जिले के कोटपोरसा निवासी रघुवीर सिंह भदौरिया के बेटे करन भदौरिया को उन्होंने राधा के लिए पसंद कर लिया और 9 मई, 2022 का दिन शादी के लिए पक्का कर दिया.
राधा को पता चला तो वह तड़प कर रह गई. वह मौसी के घर अब नहीं जा सकती थी, इसलिए फोन करके उस ने अनुराग को इटावा बुला लिया. राधा इटावा में थी और अनुराग भिंड के चतुर्वेदी नगर में, इसलिए राधा के घरवालों ने राधा पर कोई पाबंदी नहीं लगा रखी थी.
प्रेमी को बताया दिल का हाल
राधा ने बाजार से अपने लिए कुछ जरूरी सामान लाने का बहाना बनाया और शहर में स्थित सुभाष पार्क में पहुंच गई. अनुराग को उस ने वहीं बुलाया था. अनुराग पार्क में आ गया था. वे दोनों पार्क के कोने में बैठ गए. “राधा, ऐसी क्या बात हो गई जो तुम ने मुझे इटावा बुला लिया. सब ठीक तो है न?” राधा का हाथ अपने हाथों में ले कर अनुराग ने हैरान होते हुए पूछा.
“कुछ ठीक नहीं है अनुराग. मेरे पिता ने…” राधा रुआंसे स्वर में बोली, “कोट पोरसा में मेरा रिश्ता पक्का कर दिया है, 3 दिन बाद मेरी शादी है. मैं यह शादी हरगिज नहीं करूंगी. तुम मुझे यहां से भगा कर ले चलो.”
“नहीं राधा, यह संभव नहीं है. चतुर्वेदी नगर में हमारे प्यार के चर्चे घरघर में हो रहे हैं, मेरे पिता इस मामले में मेरी क्लास ले चुके हैं. उन्होंने चेतावनी दे दी है कि यदि मैं ने तुम से शादी की तो वह मुझे अपनी जमीनजायदाद से बेदखल कर देंगे. राधा, मैं अपने पिता के खिलाफ नहीं जा सकता.”
“यानी तुम्हें अपनी जमीनजायदाद से प्यार है, मुझ से नहीं?” राधा ने अनुराग को घूरा.
“ऐसी बात नहीं है राधा, मैं तुम्हें दिल की गहराई से प्यार करता हूं. यदि मैं ने पिता की मरजी के खिलाफ शादी की तो मैं सडक़ पर आ जाऊंगा. अभी मैं बेरोजगार हूं, मैं खुद भूखा रह सकता हूं राधा, तुम्हें भूखा नहीं देख पाऊंगा.”
“क्या मुझे दूसरे की दुलहन बनते देख कर तुम जी पाओगे अनुराग?” भर्राए कंठ से राधा बोली.
“इसे मेरी बदकिस्मती समझो राधा, इस जन्म में हम बेशक नहीं मिल पाएंगे, लेकिन अगले जन्म में मैं तुम्हें दुलहन जरूर बनाऊंगा.”