स्कूली शिक्षा के दौरान ही धावक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले सुखदेव गोगामेड़ी फिल्म ‘पद्मावत’ और आनंद पाल एनकाउंटर केस के बाद राजस्थान में हुए प्रदर्शनों से काफी चर्चा में आए. वर्ष 2017 में फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली कृत फिल्म ‘पद्मावत’ की जयपुर के किले में शूटिंग के दौरान करणी सेना के लोगों ने तोडफ़ोड़ की और गोगामेड़ी ने भंसाली के थप्पड़ भी जड़ दिया था.
आइए जानते हैं कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी कौन थे. आज से करीब 60 साल पहले सुखदेव सिंह के पिता अचल सिंह शेखावत मूलरूप से गांव धमोरा, जिला झुंझुनूं से हनुमानगढ़ जिले के गांव गोगामेड़ी के चक 9 डीपीएन में जा कर बस गए थे. हालांकि उन का घर धमोरा गांव में भी है, यहां पर अचल सिंह शेखावत खेतीबाड़ी कर के परिवार का पालनपोषण किया करते थे. अचल सिंह की शादी इच्छा राजकंवर से हुई थी.
अचल सिंह के 3 बेटे दलीपसिंह, सुखदेव सिंह और कानसिंह थे. वहीं एक बेटी मधुकंवर थी. सुखदेव सिंह से एक भाई बड़ा था एवं एक छोटा. सुखदेव सिंह का जन्म गोगामेड़ी में हुआ था. सुखदेव सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा चादरा के विद्यालय में प्राप्त की. स्कूली पढ़ाई के बाद महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर से स्नातक किया.
आनंदपाल की मौत के बाद सुखदेव कैसे आए चर्चा में
कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह सांवराद का पुलिस ने 2017 में एनकाउंटर कर दिया था. इसे फरजी एनकाउंटर बताते हुए राजपूत समाज व करणी सेना ने कई दिनों तक आंदोलन किया था. इस आंदोलन की अगुआई सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने की थी. इस पर सुखदेव सिंह व अन्य पर रतनगढ़ थाने में मामला भी दर्ज किया गया था.
सुखदेव की हत्या के बाद उन के बड़े भाई दलीप सिंह के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई है. साल 2006 में सब से पहले करणी सेना बनी थी. बाद में लोकेंद्र सिंह कालवी ने अलग संगठन राजपूत करणी सेना बनाया था. साल 2012 में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को राजपूत करणी सेना का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बाद में लोकेंद्र सिंह कालवी और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी में विवाद हो गया था. सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने 2017 में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के नाम से अलग संगठन बना लिया था, जिस के वह अध्यक्ष थे.
गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला गैंगस्टर रोहित स्वामी उर्फ रोहित गोदारा निवासी गांव कपूरीसर नूण करण सर, जिला बीकानेर का रहने वाला है. 2 भाइयों में बड़ा हनुमान स्वामी है, जबकि छोटा रोहित गोदारा है.
हनुमान और रोहित जब 8-10 साल के थे, तब उन का बाल विवाह चोटाला (हरियाणा) की 2 सगी बहनों से हुआ था. 2005 में उन का गौना हो गया. खेत में ढाणी बना कर ये लोग रहते थे एवं खेतीबाड़ी से गुजरबसर करते थे. वर्ष 2005 में रोहित कपूरीसर से बीकानेर आ गया और मोबाइल की दुकान खोल ली.
उस का काम ठीक चल रहा था कि पत्नी से तूतूमैं मैं होने लगी. रोहित गरम स्वभाव का था, सो बीवी से पटरी नहीं बैठी. 2 साल बीतते ही 2007 में रोहित के खिलाफ उस की पत्नी ने दहेज उत्पीडऩ का केस दर्ज करा दिया. पुलिस ने रोहित को गिरफ्तार कर के बीकानेर जेल में डाल दिया. जेल में रोहित स्वामी से रोहित गोदारा बन गया. वर्तमान में वह राजस्थान में लारेंस के खास गुर्गों में शामिल है.
रोहित कैसे आया अपराध की दुनिया में
जेल में अपराधियों का साथ मिला तो वह भी अपराध की राह पर चल पड़ा. रोहित ने 19 साल की उम्र में ही अपराध की दुनिया में एंट्री कर ली थी. वह अब तक करीब 15 बार जेल जा चुका है, रोहित गोदारा के खिलाफ 2010 में पहला मुकदमा हत्या का दर्ज हुआ था.
रोहित जेल में बैठ कर भी वारदातों को अंजाम देता रहा और हर बार जमानत पर बाहर आ कर अपराध की दुनिया में लगातार पैर पसारता रहा. वहीं रोहित गोदारा के बारे में बताया जाता है कि वह खुद का गैंग भी चलाता है, जहां वह मोनू गैंग और गुठली गैंग को भी औपरेट करता है. इस के अलावा वह इन दिनों लारेंस बिश्नोई के लिए भी काम करता है और उस के खास लोगों में शामिल है.
सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद रोहित गोदारा 2022 में फरजी नाम से पासपोर्ट बनवा कर दुबई भाग गया था. तब से वह दुबई में बैठ कर पहले गैंगस्टर राजू ठेहठ और अब सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की अपने गुर्गों से हत्या करवा चुका है.
सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी शीला की रिपोर्ट पर थाना श्यामनगर में मामला दर्ज किया गया. रिपोर्ट निवर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पुलिस डीजीपी, रोहित राठौड़, नितिन फौजी, लारेंस बिश्नोई, रोहित गोदारा, संपत नेहरा एवं अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई.
दूसरी रिपोर्ट स्कूटी सवार हेमराज उर्फ बाबू खटीक (गोयल) निवासी सूर्य नगर, जयपुर ने दोनों शूटर रोहित राठौड़ एवं नितिन फौजी के खिलाफ 6 दिसंबर, 2023 को दर्ज कराई.
गैंगस्टरों की कैसे जुड़ी कड़ी से कड़ी
रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस जांच में जोरशोर से जुट गई. डीजीपी उमेश मिश्रा ने 6 दिसंबर, 2023 को शूटरों रोहित राठौड़ एवं नितिन फौजी को पकडऩे के लिए एसआईटी का गठन किया. एसआईटी का नेतृत्व एडीजी क्राइम दिनेश एम.एन., डीआईजी कैलाशचंद्र विश्नोई के सुपरविजन में किया गया.
एसआईटी ने मामले की जांचपड़ताल शुरू कर दी. 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी दौड़भाग करने लगे. आसपास के राज्यों के पुलिस अधिकारियों से भी मदद मांगी गई. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद डीजीपी उमेश मिश्रा ने 6 दिसंबर को दोनों शूटरों रोहित राठौड़ एवं नितिन फौजी को पकड़वाने वाले को 5-5 लाख रुपए के इनाम की घोषणा कर दी.
पुलिस को सूचना मिली कि दोनों आरोपी एक टैक्सी से सुजानगढ़ बसस्टैंड गए थे. पुलिस ने उस टैक्सी ड्राइवर से पूछताछ की. उस ने बता दिया कि उन युवकों ने उसे 1500 रुपए किराया दिया था.
शनिवार 9 दिसंबर, 2023 को नितिन फौजी के दोस्त रामवीर निवासी महेंद्रगढ़ (हरियाणा) को राजस्थान पुलिस ने महेंद्रगढ़ से धर दबोचा. रामवीर ने बताया कि वह नितिन फौजी के साथ 12वीं तक पढ़ा है और खास दोस्त है. 12 वीं पास करने के बाद नितिन वर्ष 2019 में सेना में भरती हो गया. वह 19 जाट रेजिमेंट में वर्तमान में अलवर में तैनात था.
नितिन की एक साल पहले शादी जाट बहरोड़ (अलवर) राजस्थान में हुई थी. नितिन 2 दिन की छुट्टी पर 8 नवंबर, 2023 को अपने गांव देगड़ा जाट आया था. 9 नवंबर को वह महेंद्रगढ़ गाड़ी ठीक कराने का कह कर घर से निकला था. 9 नवंबर को नितिन फौजी और उस के साथियों ने एक व्यापारी का अपहरण कर लिया. इस की जानकारी महेंद्रगढ़ पुलिस को हुई तो पुलिस पीछा करने लगी. महेंद्रगढ़ पुलिस से नितिन वगैरह की मुठभेड़ हुई. पुलिस ने 3 आरोपी पकड़ लिए.
सुखदेव सिंह की हत्या से पहले 3 दिसंबर, 2023 को नितिन फौजी जयपुर पहुंचा. यहां पहुंचने से पहले ही नितिन फौजी ने रामवीर से संपर्क कर लिया था.
रामवीर ने उसे पहले महेशनगर के कीर्तिनगर में रुकवाया. इस के बाद अगले दिन गांधीनगर रेलवे स्टेशन के पास होटल में ठहराया. कुछ समय प्रतापनगर क्षेत्र में भी रहे. 4 दिसंबर, 2023 को उन्होंने ‘एनिमल’ फिल्म देखी. इस के बाद 5 दिसंबर को नितिन जा कर रोहित राठौड़ से मिला और वारदात को अंजाम दिया.