बदला लेने के लिए खरीदी रिवौल्वर
उसे अपनी ये हार बरदाश्त नहीं हुई. जिस के बाद उस ने एक रिवौल्वर खरीद ली और अपनी हार का बदला लेने के लिए चुनाव जीतने वाली टीम से बदला लेने का इरादा बना लिया. लेकिन अगले साल के चुनाव में लारेंस खुद चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि अपने दोस्त विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की मिद्दूखेड़ा को छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जितवा कर अपने विरोधियों के मुंह पर तमाचा मार दिया.
लेकिन छात्रसंघ चुनाव में अपनी पहली हार को लारेंस भूला नहीं था और न ही अपने दुश्मनों को भूला था. 2011 में लारेंस का सामना जब उदय ग्रुप, जोकि चुनाव में उस से जीता था, से हुआ और दोनों में जब भिड़ंत हुई तो लारेंस ने फायरिंग कर दी और मामला पुलिस तक पहुंच गया. फिर इसी गुटबाजी के चलते लारेंस बिश्नोई पर अपराध का पहला केस दर्ज हुआ.
भले ही उस झगड़े के बाद लारेंस के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज हो गया हो, लेकिन उस दिन जिस दिलेरी से उस ने खुलेआम अपने दुश्मनों पर फायरिंग कर अपनी बहादुरी का परिचय दिया था, उस दिन से छात्र राजनीति में हर कोई लारेंस का नाम ले रहा था. इस के बाद लारेंस फायरिंग और पुलिस केस की वजह से मशहूर हो गया.
बस, यही उस के जीवन का टर्निंग पौइंट था. संयोग यह भी रहा कि उन्हीं दिनों लारेंस बिश्नोई के चचेरे भाई की कुछ लोगों ने हत्या कर दी. दुश्मन वही थे, छात्र राजनीति के कारण जिन से उस की दुश्मनी चल रही थी. लारेंस ने दुश्मनों से बदला लेने की ठान ली और पुलिस जब उसे फायरिंग मामले में जेल से अदालत में पेश करने के लिए ला रही थी, उस दिन वह पुलिस को चकमा दे कर हिरासत से फरार हो गया.
पुलिस कस्टडी से भागा नेपाल
जेल से भागे लारेंस को पता था कि अगर वह पुलिस की जद में रहा तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा. दुश्मनों से बदला लेने की तैयारी पूरी होने तक वह नेपाल भाग गया, जहां उस ने कुछ समय बिताया और दुश्मनों से बदला लेने के लिए हथियार एकत्र करने शुरू कर दिए.
लारेंस किसी भी सूरत में अपने चचेरे भाई के हत्यारे की तलाश कर उन से बदला लेना चाहता था. नेपाल से लौट कर जब विरोधी गुट के सदस्यों की तलाश कर रहा था, दुर्भाग्य से फिर पंजाब की फरीदकोट पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
दूसरी बार जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद लारेंस एक बात अच्छी तरह समझ गया कि अगर आप चालाकी से काम करो तो जेल के बाहर निकलने की जगह जेल में रह कर ही अपराध करो. इस के लिए बस आप को अपने गैंग की नेटवर्किंग को फैलाना होगा.
लारेंस अभी अपराध की दुनिया में कच्चा खिलाड़ी था, लेकिन उस के सपने बड़ा डौन बनने के थे. वह लोगों के बीच अपने नाम का खौफ देखना चाहता था. अपराध की दुनिया का मंझा हुआ खिलाड़ी बनने के लिए उसे एक ऐसे गुरु की जरूरत थी, जो उस की पसंद भी हो और जुर्म की दुनिया में लोग उसे मानते भी हों.
संयोग से फरीदकोट में गिरफ्तार होने के बाद जब लारेंस जेल गया तो इस बार उस की मुलाकात हुई जग्गू दादा यानी पंजाब में उन दिनों के एक बड़े गैंगस्टर जग्गू भगवान पुरी से. जग्गू से हाथ मिलाने के बाद लारेंस ने उस से अपराध के गुर सीखने शुरू कर दिए.
जेल में जग्गू दादा को बनाया गुरु
जग्गू भगवानपुरी पंजाब के भगवानपुर का रहने वाला है और देश के अमीर गैंगस्टर में इस का नाम शुमार है. इन दिनों वह तिहाड़ जेल में बंद है. अपने टाइम पर पंजाब की राजनीति और अपराध की दुनिया में जग्गू के नाम से ही कई काम हो जाते थे. कुछ साल पहले यह पकड़ा गया और उस के पास लगभग 2 करोड़ के हथियार बरामद हुए थे.
बहरहाल, जग्गू भगवानपुरी से हाथ मिलाने के बाद लारेंस बिश्नोई के कई बड़े बदमाशों से संबंध बने और कई रसूखदार लोगों से उस की पहचान हुई. वह जुर्म की दुनिया के ऐसे दांवपेच भी सीख गया, जिस के जरिए वह जेल में रह कर ही अपराध कराने की कला का खिलाड़ी बन गया.
जेल में मोबाइल फोन की सुविधा हासिल करने से ले कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने और जेल में रह कर ही लोगों की हत्या कराने व रंगदारी वसूलने का वह खलीफा बन गया. पैसे से पावर कैसे हासिल की जाती है और इस कला से सिस्टम को किस तरह अपने हिसाब से हांका जाता है, ये तमाम गुर उस ने जग्गू से सीख लिए थे.
इस के बाद उस ने दूसरे गैंगस्टर से जुड़ कर हथियार के दम से उगाही करने का नेटवर्क पूरे देश में फैला दिया. यही कारण है कि वह आज जेल में रहते हुए भी देश में अपने फैले हुए नेटवर्क के दम पर गुंडागर्दी कर रहा है. कई शहरों में उसके शार्प शूटर तैनात रहते हैं, जो बस इशारा होने पर काम को अंजाम दे देते हैं. जेल में रहते हुए भी वह उसी तरह बड़बड़े कामों को अंजाम दे रहा है जितना कि वह बाहर रह कर करता था.
जेल से ही करने लगा गैंग का संचालन
लारेंस बिश्नोई ज्यादातर अपराध जेल में रह कर ही कराता है. दरअसल, इस के पीछे उस की सोच थी कि अगर आप जेल की सलाखों के पीछे से काम कराओगे तो आप के खिलाफ पुलिस अपराध के ठोस सबूत एकत्र नहीं कर पाएगी, जिस से आप के बरी होने की उम्मीद रहती है.
आज लारेंस बिश्नोई के खिलाफ 11 साल की अपराध की जिंदगी में पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 65 से ज्यादा मुकदमे गंभीर मामलों के दर्ज हो चुके हैं. लेकिन साक्ष्यों के अभाव में इन में 32 मामलों में वह बरी हो चुका है.
फिल्मों में जेल से गैंग औपरेट करते आप ने गैंगस्टरों को तो देखा ही होगा लेकिन लारेंस रियल लाइफ में ये काम कर रहा है. जेल में रह कर ही वह एक इशारे पर किसी कारोबारी या किसी बड़े नेता की हत्या करवा देता है.
2015 में पंजाब पुलिस उसे कोर्ट में पेशी के लिए ले जा रही थी, उसी दौरान वह आखिरी बार पुलिस की हिरासत से भाग गया. बताया जाता है कि वह भाग कर नेपाल चला गया और वहां से आधुनिक हथियार ले कर लौटा. उस ने इधरउधर फैले अपने गैंग के शूटरों को वे हथियार उपलब्ध करा दिए. उस के तुरंत बाद पुलिस ने उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया.
भले ही वह पुलिस की गिरफ्त में क्यों न हो, पर उसे गैंग को चलाने और कत्ल करने से कोई रोक नहीं सकता. वह फोन से ही सारी चीजों को अंजाम देता है. वाट्सऐप के जरिए सुपारी लेता है. जेल में जिम करता है जिस की फोटो फेसबुक पर अपलोड करता है.
बताया जाता है कि उस ने जेल में रह कर 2017 में सीकर के पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या भी करवाई. जिस में उस ने अपने शूटर रविंदर काली को भेजा जोकि मोहाली का है. उस के बाद लारेंस ने जोधपुर में अपना दबदबा बनाने के लिए कारोबारी वासुदेव इसरानी की हत्या करवा दी. फिर तो बाद राजस्थान में भी उस का खौफ बन गया.
लारेंस न सिर्फ देखने में स्मार्ट गैंगस्टर है बल्कि वह जेल में रह कर स्मार्ट तरीके से फोन चलाने में भी माहिर है.