इस साल पंजाब में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के अलग किस्म की आबोहवा बन गई थी. स्टैंडअप कौमेडी और पंजाबी फिल्मों में काम कर पंजाब की राजनीति में जगह बनाने वाले भगवंत मान की नई सरकार द्वारा कई फैसले लिए गए.
उन में एक बड़ा फैसला वीवीआईपी की सुरक्षा कम करने का भी सामने आया था. इसे ले कर सुरक्षा प्राप्त सेलिब्रेटीज की चिंता बढ़ गई थी. उस के ठीक एक दिन बाद ही हिंसा की जो वारदात हुई, उस की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.
रविवार की शाम 29 मई को 5 बजे का वक्त था. पंजाबी सिंगर और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला ने गांव की सरपंच मां चरणजीत कौर सिद्धू से कहा कि वह अपनी मौसी से मिलने जाना चाहता है. चुनाव में व्यस्त होने के कारण काफी समय से मौसी से मिलनाबतियाना नहीं हो पाया था. वह उन का हालचाल लेना चाहता है.
सिद्धू की मां मानसा जिले में मूसेवाला गांव की सरपंच हैं और कांग्रेस के समर्थन में राजनीतिक पहचान रखती हैं.
पंजाब कांग्रेस में अच्छी पकड़ रखने की बदौलत ही कौर ने अपने सिंगर और मौडल बेटे शुभदीप सिद्धू को भी कांग्रेस से विधानसभा का टिकट दिलवा दिया था. सिद्धू मूसेवाला ने इस साल पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, किंतु सफलता नहीं मिल पाई थी. वैसे उस रोज चरणजीत कौर अपने बेटे के मौसी से मिलने जाने की बात पर खुश हो गई थीं. उन्होंने पूछा, ‘‘तुम्हारे साथ और कौन जा रहा है?’’
‘‘जी, वो गुरप्रीत और गुरविंदर है न,‘‘सिद्धू ने बताया.
गुरविंदर सिंह उन का पड़ोसी और गुरप्रीत सिंह चचेरा भाई था. दोनों सिद्धू के खास दोस्तों की तरह थे.
‘‘गाड़ी तू ड्राइव करेगा?’’ चरणजीत बोलीं.
‘‘हां तो! क्या हुआ बेबे?’’ सिद्धू ने मां को जवाब दिया.
‘‘अरे पुत्तर मैंनू बोलूं गाड़ी तेजी से मत भगइयो…वैसे कौन वाली गाड़ी ले जा रहा है?’’ बेबे ने पूछा.
‘‘थार से ही चला जाता हूं,’’ सिद्धू ने बताया.
‘‘थार से क्यों, उस में कम जगह होती है. गनर कहां बैठेंगे?’’ बेबो ने चिंता जताई.
‘‘तू तो बेवजह चिंता करती है बेबे… पजेरो का पिछला पहिया पंक्चर है. गनर मेरे साथ नहीं जाएगा तो क्या हो जाएगा? थोड़ी दूर ही तो जाना है. जल्द लौट आऊंगा.’’
‘‘देख ले भई, जैसी तुम्हारी मरजी. रब तेरी खैर रखे.’’ मां हाथ ऊपर उठा कर लंबी सांस लेती हुई बोलीं.
‘‘तू किसी रब से कम है क्या बेबे!’’ यह कहते हुए सिद्धू ने मां के गले लगने के बाद पैर छूए. फिर लंबे कद भरते हुए थार की ड्राइविंग सीट पर जा बैठे. उस में पहले से ही उस के दोनों दोस्त बैठ चुके थे. एक अगली और दूसरा पिछली सीट पर.
सिद्धू की गाड़ी के पीछे लग गए हमलावर
सिद्धू के पास थार जीप के अलावा पजेरो एसयूवी, टोयोटा फौर्च्युनर, मर्सिडीज बेंज, रेंज रोवर और अपने जमाने की लोकप्रिय मौडर्न बन चुकी जीप भी थी. उस रोज उन्होंने महिंद्रा की थार जीप से मौसी के घर जाने का निर्णय लिया था, जो बुलेटप्रूफ भी नहीं थी.
हालांकि कम जगह वाली थार ले जाने का कारण मूसेवाला ने अपनी मां को जल्द लौट आना बताया था. इस कारण उन्होंने गनमैन को भी साथ ले जाने की भी जरूरत नहीं समझी और अपने दोनों दोस्तों के साथ निकल पड़े.
वे ज्यादा दूर नहीं निकले थे. करीब 500 मीटर पहुंचे होंगे, तभी एक गाड़ी पीछा करने लगी थी. वो गाड़ी थी कोरोला. थार की पिछली सीट पर बैठे एक दोस्त ने देखा कि उन की गाड़ी का एक कोरोला गाड़ी पीछा कर रही है.
वह बोला, ‘‘लगता है कोई हमारा पीछा कर रहा है.’’
इस पर दूसरा दोस्त बोला, ‘‘अरे, होगा कोई फैन.’’
उस गाड़ी को मूसेवाला ने भी देखा. फिर बोले, ‘‘अरे, ये मेरे फैंस होंगे. फोटो खिंचवाने के लिए पीछे आ रहे होंगे. मेरे साथ अकसर ऐसा होता है.’’
‘‘हो सकता है,’’ दोस्त बोला.
फिर एक दोस्त के कहने के कुछ देर बाद ही एक जगह पर 2 मोड़ आए, जहां से मूसेवाला बाईं तरफ निकले तो पीछा कर रही गाड़ी दाहिनी तरफ चली गई.
ऐसा होते ही सिद्धू मूसेवाला खुद ही दोस्तों से बोले, ‘‘देखो क्या कहा था मैं ने, वो गाड़ी चली गई. वो फैंस ही थे. पहले पीछेपीछे आ रहे थे, जब हम अपने दूसरे रास्ते पर आए तब वह अपने रास्ते चले गए.’’
‘‘हां मूसे, तू सही कह रहा है. लेकिन…’’ एक दोस्त बोला.
‘‘अरे, तू बहुत लेकिनवेकिन करता है. अबे तेरी की… न्यू सौंग पर क्या गजब के कमेंट आए हैं.’’ दूसरा दोस्त पहले वाले को मोबाइल दिखाता हुआ बोला.
‘‘तो फिर इसी खुशी में इस बार भाई का बर्थडे धमाकेदार होना चाहिए.’’
‘‘हां क्यों नहीं. मैं दू्ंगा तुम सब को बड़ी पार्टी. बोल कहां लेगा? दिल्ली का कोई फार्महाउस बुक करें?’’ गाड़ी ड्राइव करते हुए मूसेवाला बोल पड़े.
‘‘अरे…अरे… देख वही गाड़ी फिर से आ रही है,’’ पहले वाला दोस्त इस बार तेजी से हड़बड़ाहट के साथ बोला.
‘‘अरे आने दे न उसे, मैं तो अपने रास्ते पर हूं,’’ लेकिन मूसेवाला के इतना कहते ही दूसरे रास्ते से वही कोरोला कार अचानक थार के साथसाथ चलने लगी. कुछ सेकेंड में ही थार के बिलकुल करीब आ गई. उस ने थार को ओवरटेक कर रोक लिया.
मूसेवाला ने भी तुरंत ब्रेक लगा दिए. थार वहीं एक झटके के साथ रुक गई. ठीक आगे कोरोला को देख कर मूसेवाला समझ गए कि उस में सवार फैंस नहीं, कोई और हैं. शायद उन के दुश्मन हो सकते हैं.
उन्होंने तुरंत अपने एक हाथ से पिस्टल निकाल लिया. मूसेवाला और पीछे बैठे दोस्त अभी सतर्क हो पाते कि इस से पहले ही कोरोला में सवार लोगों ने ताबड़तोड़ गोलियां दागनी शुरू कर दीं.
हमलावरों ने थार गाड़ी के टायरों में गोलियां मारीं, जिस से 3 टायर पंक्चर हो गए. इस अचानक हमले के बाद भी मूसेवाला ने दोस्तों से कहा, ‘‘डरने की जरूरत नहीं. हौसला रखो. मेरे पास पिस्टल है.’’ फिर मूसेवाला ने तुरंत पिस्टल निकाली और 2 फायर किए.
इसे देख हमलावर भी डर गए. और अपनी गाड़ी दूर कर ली. लेकिन इस के बाद ही मूसेवाला के पिस्टल की गोलियां खत्म हो गईं. उस वक्त इत्तफाक से मूसेवाला की पिस्टल में सिर्फ 2 ही गोलियां थीं.
फायरिंग बंद हो गई, लेकिन कुछ सेकेंड में ही वहां 2 बोलेरो गाड़ी भी आ गईं. उस में भी हमलावर सवार थे. हमलावरों की संख्या बढ़ गई. वे आधुनिक हथियारों से लैस थे. वे थार की बोनट पर चढ़ गए.
मूसेवाला को निशाना बना कर बरसाई गोलियां
सिर्फ मूसेवाला को ही निशाना बना कर अंधाधुंध गोलियां बरसाने लगे. जिस से पूरी गाड़ी में धुआं ही धुआं फैल गया. मूसेवाला लहूलुहान हो कर आगे बैठे दोस्त की गोद में गिर गए थे. उस के बाद हमलावरों ने इत्मीनान से मूसेवाला को चैक किया. एक हमलावर ने मूसेवाला के साथ सेल्फी तक ली. जब वे आश्वस्त हो गए कि उन की मौत हो चुकी है, तब वे वहां से फरार हो गए.
इस हिंसक वारदात के चश्मदीद मूसेवाला के दोनों दोस्त गुरविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह ही थे. वे भी घायल हो चुके थे. बाद में उन्होंने मीडिया को इस की जानकारी देते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया. तुरंत मूसेवाला पर हमले की खबर तेजी से फैल गई.