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पुलिस की अब तक की जांच में यह पता चल गया था कि मृतक की पत्नी आशा का विकास और दीपक नाम के युवकों के साथ चक्कर चल रहा है. प्रेम त्रिकोण की इस खबर की पुलिस को अब चश्मदीद की बात से पुष्टि हो चुकी थी.

इस के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस ब्लाइंड मर्डर सें शामिल तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जब सख्ती से पूछताछ की तो हत्या की सच्चाई खुल कर सामने आ गई.

राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के सुभाष चौक बस्ती नौहर के रहने वाले अमरचंद सरकारी नौकरी करते थे. आशा उन्हीं की बेटी थी. वह हाईस्कूल तक पढ़ी थी. फिर कदम बहकने पर पिता ने उस की शादी 14 फरवरी, 2020 को हनुमानगढ़ की बस्ती पीलीगंगा निवासी फकीरचंद के बेटे राजू से कर दी.

राजू भी कोई बहुत ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, लेकिन वह था बहुत मेहनती. वह खेतीकिसानी करता था. राजू और आशा का दांपत्य जीवन कुछ महीने तो ठीक से चला परंतु फिर धीरेधीरे आशा राजू के प्रति विमुख सी होने लगी. उस का कारण यह था कि जहां एक ओर आशा रंगीन शौकीन मिजाज की युवती थी, वहीं दूसरी ओर राजू सीधासादा था.

आशा चाहती थी कि उस का पति दिनरात उस से प्यार करता रहे, सदा उस के आगेपीछे घूमता रहे, उस की हर जरूरत को पूरा करता रहे. चाहे जरूरत सही हो या गलत. इस का परिणाम यह हुआ कि राजू आशा को कभीकभी झिड़क भी दिया करता था.

इस से अब आशा ने राजू की परवाह करनी छोड़ दी थी. इसी तरह 2 साल गुजर गए और आशा 2 बच्चों की मां भी बन गई. एक दिन बाजार में आशा की मुलाकात 22 वर्षीय दीपक से हो गई. दीपक राजू का दोस्त और दूर का रिश्तेदार भी था. दीपक श्रीगंगानगर के गांव नूरपुरा ढाणी का रहने वाला था. वह प्लंबर था.

उसे बाजार में देखते ही दीपक बोला, ‘‘अरे भाभी, आप बाजार में आई हैं. लेकिन साथ में राजू भैया क्यों नहीं आए?’’

‘‘आप के भैया को मेरी परवाह कहां? वो तो अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं.’’ आशा ने कहा.

‘‘अरे भाभीजी, आप भी क्या बात करती हैं. हम हैं न, आप जो हुक्म करें, आप का देवर हाजिर है.’’ दीपक ने अपना सिर झुकाते हुए कहा.

‘‘ठीक है, मेरा आज सिनेमा देखने का मन है,’’ आशा ने कहा.

‘‘फिर ठीक है, आप कोई बहाना कर के आ जाना, आज दिन का शो देख लेंगे,’’ दीपक ने हामी भरते हुए कहा.

दोनों अपनेअपने घर चले गए. वैसे दीपक की कई महीनों से आशा पर नजर थी. दीपक का एक दोस्त विकास (20 वर्ष) था. विकास भी उस के साथ प्लंबर का काम करता था. विकास ने ही एक दिन दीपक से कहा था कि यार तेरी भाभी आशा तो गजब की चीज है. तू उस से बात किया कर, बड़ी मस्त चीज है.

उस दिन खाना खाने के बाद जब दीपक आशा के साथ पिक्चर देखने जाने वाला था, तभी सामने से विकास आता दिखाई दे गया. जब दीपक ने बताया कि वह आशा भाभी के साथ पिक्चर देखने जा रहा है तो वह भी जिद करने लगा.

‘‘यार विकास, बड़ी मुश्किल से तो आशा भाभी आज पिक्चर देखने को राजी हुई है. अब तू भी आने की जिद करने में लगा. कबाब में हड्डी तो मत बन यार.’’ दीपक ने झुंझलाते हुए कहा.

‘‘देख भाई दीपक, मैं तेरे साथ चलता हूं. यदि तेरी भाभी मना कर देगी तो मैं वापस चला जाऊंगा,’’ विकास बोला.

जब दीपक और विकास सिनेमाघर पर पहुंचे तो आशा बारबार इधरउधर देख रही थी. जैसे ही आशा की नजर दीपक पर पड़ी तो उस ने हाथ से इशारा करते हुए अपने पास बुला लिया.

‘‘भाभी, ये मेरा दोस्त विकास है, ऐसे ही मुझे रास्ते में मिल गया,’’ दीपक ने विकास का परिचय कराते हुए कहा.

विकास टिकट लेने खिड़की पर चला गया तो दीपक ने धीरे से कहा, ‘‘भाभी, एक बात है, आप बुरा तो नहीं मानोगी?’’

‘‘क्या बात है? अपने प्यारे देवर की बात का भला मैं बुरा क्यों मानने लगी. बोलो तो सही, तुम क्या कहना चाहते हो,’’ आशा ने कहा.

‘‘भाभी, मेरा दोस्त विकास भी हम दोनों के साथ पिक्चर देखना चाहता है.’’ दीपक ने झिझकते हुए कहा.

‘‘चलो, उस को आने दो, फिर मैं बात करती हूं.’’ आशा ने कहा तो दीपक मन ही काफी डर सा गया था. दीपक अब अपने दिल में विकास को कोसने लगा था कि इस ने आज सब काम बिगाड़ कर रख दिया. अब आशा भाभी न जाने विकास से क्या कहेगी.

 

थोड़ी ही देर में विकास पिक्चर के टिकट ले कर आ गया और उस ने दीपक और आशा को टिकट दिए और हाल के अंदर चलने का आग्रह किया.

‘‘एक बात पूछूं विकास?’’ आशा ने कहा.

‘‘जी भाभीजी, पूछिए.’’ विकास ने नजाकत से झुकते हुए कहा, ‘‘चलो ठीक है, एक से भले दो और दो से भले तीन. वैसे विकास आज तुम ने भी मेरा मन जीत लिया,’’ और वह दोनों का हाथ पकड़ कर हाल के भीतर चली गई. आशा तो पहले से खेलीखाई थी. दोनों युवकों का साथ पा कर वह बहुत खुश हुई.

इत्तफाक से तीनों सीटें कोने से लगी एक साथ थीं. आशा ने अपने लिए बीच की सीट चुनी तो दीपक और विकास उस की अगलबगल में बैठ गए. पिक्चर शुरू हो गई. इस बीच दीपक ने ठंडा और स्नैक्स भी मंगा लिया था. तीनों फिल्म देखने में मस्त थे.

उसी दौरान दीपक और विकास ने आशा के साथ हलकी छेड़छाड़ की, जिस का आशा ने विरोध नहीं किया तो वे दोनों दोस्त बहुत खुश हुए.

जब वे तीनों घर को जाने लगे तो विकास ने आशा से कहा, ‘‘भाभीजी, आप जैसे चेहरे से खूबसूरत हो, उस से ज्यादा आप जिंदादिल हो. किसी दिन हमारी जिंदगी में भी रंग भर दो.’’

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