मुदित पर शक और गहराया तो रत्नेश सिंह ने मुदित और प्रियंका के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस रिपोर्ट ने पुलिस को और चौंका दिया. काल डिटेल्स से पता चला कि मुदित और प्रियंका के बीच हर रोज डेढ़दो घंटे बातचीत होती थी. पुलिस को शक हुआ कि कहीं मुदित और प्रियंका के बीच नाजायज संबंध तो नहीं हैं. कहीं इन अवैध रिश्तों के कारण डा.गौरव के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई. पर जो भी रहस्य है, इन दोनों के पेट में ही छिपा है. इस रहस्य का परदाफाश होना जरूरी था.
मुदित वायुसेना में सार्जेंट था. उस के पेट से रहस्य उगलवाना इतना आसान न था, इसलिए इंसपेक्टर रत्नेश सिंह ने मुदित पर शक होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ ही देर बाद डीसीपी (ईस्ट) रविंद्र कुमार तथा एसीपी (चकेरी) अमरनाथ यादव थाना चकेरी आ गए. उन्होंने मुदित से पूछताछ की. 2 राउंड की पूछताछ तक मुदित यही कहता रहा कि डा. गौरव उस के घर आए थे. वह नशे में थे. कार वह चला नहीं पाते, इसलिए कार हम ने घर पर खड़ी करा दी और उन्हें रोडवेज बस में बिठा कर उन्नाव भेज दिया था. उस के बाद वह कहां लापता हो गए, उसे जानकारी नहीं.
एयर फोर्स सार्जेंट ने उगला सच…
तीसरे राउंड की पूछताछ पुलिस अधिकारियों ने मोबाइल लोकेशन व काल डिटेल्स के आधार पर सख्ती से की. उन्होंने पूछा, ‘‘मुदित, 13 मार्च की रात 10 बजे तुम कहां थे? घर पर थे या फिर कहीं बाहर गए थे?’’
“सर, मैं घर पर ही था.’’ मुदित ने बताया.
“तुम कुलगांव या रूमा की तरफ नहीं गए थे?’’ मुदित कुछ देर सोचता रहा. उस की भंगिमा भी बदली. लेकिन फिर निडर हो कर बोला, ‘‘सर, मैं रूमा नहीं गया. घर पर ही था.’’
“लेकिन तुम्हारी फोन लोकेशन तो रूमा बता रही है. तुम सरासर झूठ बोल रहे हो और हमें गुमराह कर रहे हो. सचसच बताओ, वरना…’’ अमरनाथ गुस्से से बोले. पुलिस अधिकारियों की सख्ती से मुदित का मनोबल टूट गया. वह सिर झुका कर बोला, ‘‘सर, डा. गौरव अब इस दुनिया में नही है?’’
“क्या तुम ने डा. गौरव को मार डाला है?’’ डीसीपी (पूर्वी) रविंद्र कुमार ने पूछा.
“हां सर, मैं ने उसे बेरहमी से मार डाला. मैं हत्या का जुर्म कुबूल करता हूं.’’
“डा. गौरव तो तुम्हारा जिगरी दोस्त था. फिर उसे क्यों मारा?’’
“सर, यह सच है कि डा. गौरव मेरा जिगरी दोस्त था. इसी दोस्ती की आड़ में मेरे नाजायज संबंध डा. गौरव की पत्नी प्रियंका से हो गए थे. इस अवैध रिश्ते की जानकारी डा. गौरव को हो गई थी. उस के बाद वह मुझे शक की नजरों से देखने लगा था. कभीकभी कटाक्ष भी करता था. फिर मुझे लगा कि अगर मैं ने डा. गौरव की हत्या नहीं की तो वह मेरी हत्या कर देगा. इसलिए उसे मौत की नींद सुला दिया.’’
“हत्या में तुम्हारे साथ प्रियंका या कोई और भी शामिल था?’’
“नहीं, प्रियंका को कोई जानकारी नहीं थी. हत्या में अन्य कोई भी शामिल नहीं था.’’
“डा. गौरव की लाश कहां है?’’ एसीपी अमरनाथ ने पूछा.
“सर, उस की लाश कुलगांव फ्लाईओवर (महाराजपुर) के नीचे वाले जंगल में फेंक दी थी. उस का मोबाइल फोन भी वहीं तोड़ कर फेंक दिया था.’’
अब तक रात के 12 बज चुके थे. पुलिस अधिकारी आवश्यक पुलिस बल और मुदित को साथ ले कर कुलगांव फ्लाईओवर के पास जंगल में पहुंच गए. वहां मुदित की निशानदेही पर डा. गौरव के शव को पुलिस ने बरामद कर लिया. शव से कुछ दूरी पर डा. गौरव का चकनाचूर मोबाइल फोन पड़ा था. पुलिस ने उसे भी सुरक्षित कर लिया. मुदित ने डा. गौरव की हत्या बड़ी बेरहमी से की थी. उस ने उस का सिर हाइवे किनारे लगे पत्थर पर कई बार पटका था, जिस से उस का सिर फट गया था और उस की मौत हो गई थी. जामातलाशी में उस के पास से 7 लाख की रकम बरामद नहीं हुई थी.
पुलिस ने की लाश बरामद…
डा. गौरव मर्डर केस का खुलासा होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने हाइवे किनारे लगे उस पत्थर का भी निरीक्षण किया, जिस से मुदित ने सिर पटकपटक कर डा. गौरव की हत्या की थी. निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों ने डा. गौरव के शव को बरामद कर मौके की काररवाई पूरी की और शव को पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपतराय जिला अस्पताल भिजवा दिया तथा हत्या में प्रयुक्त क्रेटा कार मुदित के घर से बरामद कर ली.
अगले दिन सुबह को एसीपी (चकेरी) अमरनाथ यादव ने डा. गौरव की हत्या की खबर मृतका के पिता डा. प्रबल प्रताप सिंह तथा पत्नी प्रियंका सिंह को दे दी. डा. गौरव की हत्या की खबर सुनते ही प्रियंका के घर में कोहराम मच गया. कुछ देर बाद प्रियंका अपनी मां और बहन के साथ थाना चकेरी आ गई. वहां जब प्रियंका को पता चला कि पति की हत्या मुदित ने की है तो वह अवाक रह गई. मांबेटी मुदित से कुछ पूछना चाहती थीं, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने इजाजत नहीं दी.
अब तक सूचना पा कर डा. प्रबल प्रताप सिंह भी थाना चकेरी आ गए थे. एसीपी अमरनाथ से सामना होते ही वह फफक पड़े. बोले, ‘‘बेटे ने जिस सांप को पाला और उसे दूध पिलाया, उसी ने उसे डस लिया.’’ अमरनाथ ने किसी तरह उन्हें धैर्य बंधाया. मुदित ने हत्या का जुर्म भले ही कुबूल कर लिया था और डा. गौरव का शव भी बरामद करा दिया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों के मन में एक फांस चुभ रही थी कि हत्या में गौरव की पत्नी प्रियंका तथा उस की मां व बहन तो शामिल नहीं थीं.
इस के लिए पुलिस ने मुदित, प्रियंका उस की मां कमलेश तथा बहन का बेंजाडीन टेस्ट कराया. टेस्ट में केवल मुदित के कपड़ों और चप्पल पर खून के निशान सामने आए. बेंजाडीन टेस्ट में अगर ब्लड स्टेन मिलते हैं तो इस से खून का डीएनए विश्लेषण किया जाता है. दिल्ली के निर्भया गैंगरेप के मामले में भी पुलिस ने बस से मिले खून के धब्बों की जांच के लिए बेंजाडीन टेस्ट कराया था.
डा. गौरव की हत्या के जुर्म में मुदित श्रीवास्तव की गिरफ्तारी की जानकारी एयर फोर्स के अधिकारियों को हुई तो वह थाना चकेरी आए और सार्जेंट मुदित से पूछताछ की. एयर मार्शल की पूछताछ में मुदित ने गुनाह कुबूल किया. उस ने कहा, ‘‘सर, गलती हो गई. मैं यह करना नहीं चाहता था.’’ पूछताछ के बाद एयर मार्शल ने घटना तथा उस से जुड़े दस्तावेज मांगे. इस पर एसएचओ रत्नेश सिंह ने पुलिस कमिश्नर वी.पी. जोगदंड से बात की. उन्होंने एयर मार्शल की भी बात कराई. इस के बाद थाना चकेरी पुलिस ने एयर मार्शल को घटना तथा उस से जुड़े दस्तावेज सौंप दिए. सार्जेंट के खिलाफ अब विभागीय काररवाई भी हो सकती है.