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निर्मला की लाश पर कुरती के अलावा केवल पैंटी थी. ऐसी हालात में महिला पति या प्रेमी के साथ ही रह सकती है. हो सकता है, दोनों में किसी बात को ले कर तकरार हुई हो. बाद में वह बाथरूम में नहाने गई होगी तभी उस के साथी ने उस की हत्या कर दी. पुलिस प्रेम प्रसंग और प्रापर्टी हड़पने के मामले को ध्यान में रखते हुए भी जांच कर रही थी.

निर्मला ने कुछ पैसे इकट्ठे कर के बाहरी दिल्ली के नरेला क्षेत्र में एक आवासीय प्लाट खरीदा था, जिस की कीमत अब काफी बढ़ चुकी है. इसलिए यह भी अनुमान लगाया जा रहा था कि किसी ने प्रापर्टी हड़पने के लिए उसे मार दिया हो. निर्मला का पति मेहरूलाल सोनीपत के गन्नौर थाने के अंतर्गत पुगथला गांव में रहता था. यह काम उस के पति ने तो नहीं कर दिया, यह जानने के लिए पुलिस ने मेहरूलाल को थाने बुला कर पूछताछ की.

मेहरूलाल ने पुलिस को बताया कि सन 2004 से उस का निर्मला से कोई वास्ता नहीं है. वह कहां रहती है, क्या करती है इस से उसे कोई मतलब नहीं. उस की हत्या के बारे में भी उसे कोई जानकारी नहीं है. निर्मला के पड़ोसियों से पुलिस ने पूछा. तो पता चला कि निर्मला के यहां एक आदमी आता था. वह आदमी कौन है यह तो पता नहीं लेकिन वह वकीलों की तरह काला कोट पहन कर आता था.

निर्मला अस्पताल में बने फ्लैट नंबर 108 में 7-8 महीने पहले ही आई थी. यहां आने से पहले वह अस्पताल के बराबर में मुस्कान हौस्टल में किराए पर रहती थी. हौस्टल में रहने वाले लोगों से बात की तो उन्होंने भी बताया कि निर्मला से मिलने एक वकील आता था. वह वकील कौन था, कहां रहता था, पुलिस को पता नहीं चला.  इस बारे में पुलिस ने एक बार फिर मृतका के भाई आनंद कुमार से बात की. बहन से मिलने कौन वकील जाता था इस की जानकारी आनंद कुमार को भी नहीं थी.

सघन तफ्तीश करते हुए 2 दिन बीत चुके थे, लेकिन पुलिस के हाथ ऐसा कोई क्लू नहीं मिल रहा था जिस से हत्यारे तक पहुंचा जा सके. पुलिस ने निर्मला के मोबाइल फोन की कालडिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स की जांच में पुलिस को एक फोन नंबर ऐसा मिला जिस पर निर्मला की काफीकाफी देर तक बातें होती थीं. जाहिर है वह शख्स निर्मला का कोई नजदीकी ही रहा होगा तभी तो वह उस से ज्यादा बातें करती थी. पुलिस ने उस फोन नंबर की छानबीन की तो पता चला कि वह हरियाणा के सोनीपत जिले के राठघना रोड निवासी विश्वबंधु का था.

पुलिस ने विश्वबंधु के बारे में गोपनीय रूप से जांच की तो पता चला कि वह एक वकील है जो हरियाणा की सोनीपत कोर्ट और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करता है. यह जानकारी मिलते ही जांच टीम चौंक गई कि निर्मला से उस के फ्लैट पर मिलने के लिए एक वकील जाता था. कहीं वो वकील विश्वबंधु ही तो नहीं है.

चूंकि विश्वबंधु एक वकील था इसलिए पुलिस बिना कोई ठोस सुबूत के उसे गिरफ्तार करने से कतरा रही थी. पुलिस नहीं चाहती थी कि वकील के गिरफ्तार करने पर कोई हंगामा खड़ा हो.  विश्वबंधु के बारे में सोनीपत और दिल्ली में जानकारी हासिल करने के बाद पुलिस ने 25 सितंबर, 2014 को उसे हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से नर्स निर्मला देवी की हत्या की बाबत बात की तो उस ने बताया कि उस की हत्या से उस का कोई लेनादेना नहीं है.

थानाप्रभारी यशपाल सिंह ने उसे निर्मला के फोन की काल डिटेल्स दिखाते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारी निर्मला से वक्त बेवक्त क्या बातें होती थीं?’’

‘‘निर्मला मेरी क्लाइंट थी. उस ने अपने पति के खिलाफ कोर्ट में जो केस डाल रखे थे, उन्हें मैं ही देख रहा था. उन के केसों के बारे में ही उस से बातें होती थीं.’’ एडवोकेट विश्वबंधु ने कहा.

‘‘जितनी देर तक तुम्हारी निर्मला से बातें होती थीं, मुझे नहीं लगता कि वह बातें केस के बारे में होती होंगी. मान भी लें कि तुम उस से केस के सिलसिले में बातें करते थे तो निर्मला के अलावा तुम्हारे और भी क्लाइंट हैं, क्या तुम उन से भी इतनी देर बातें करते हो?’’

‘‘यह जरूरी नहीं है कि सभी क्लाइंटों की समस्या एक जैसी हो. केस को ले कर निर्मला कभीकभी ज्यादा परेशान हो जाती थी तो वह मुझे फोन कर के अपनी परेशानी बता देती थी. इंसपेक्टर साहब इस से ज्यादा मुझे निर्मला से कोई मतलब नहीं था. आप मुझे इस मामले में बेजवह घसीट रहे हैं.’’ विश्वबंधु बोला.

‘‘वकील साहब, तुम भले ही झूठ बोलो लेकिन ऐसी कोई तो खास वजह है जिस से तुम निर्मला के घर आते थे, वहां रुकते थे.’’

‘‘ये आप क्या कह रहे हैं?’’

‘‘हमें तुम्हारे बारे में काफी जानकारी मिल चुकी है. इसलिए तुम हम से सच्चाई छिपाने की कोशिश मत करो. 17 सितंबर को तुम्हारी निर्मला से फोन पर आखिरी बार बात हुई थी. उस दिन के बाद  निर्मला की फोन पर किसी से बात नहीं हुई. अब बेहतर यही होगा कि वकील साहब तुम हकीकत खुद ही बता दो.’’

इतना सुनने के बाद विश्वबंधु खामोश हो गया. इंसपेक्टर यशपाल सिंह से इजाजत ले कर वह सिगरेट पीने लगा. कुछ ही देर में उस ने कई सिगरेट पी डालीं. उस समय वह काफी तनाव में दिख रहा था. थानाप्रभारी उस की बौडी लैंग्वेज देख कर सारा माजरा समझ रहे थे. उन्होंने भी उस से कुछ नहीं कहा. कुछ देर बाद विश्वबंधु को पुलिस के सामने मजबूरन स्वीकार करना पड़ा कि निर्मला देवी की हत्या उस ने ही की थी.

एडवोकेट विश्वबंधु से पूछताछ के बाद नर्स निर्मला देवी की हत्या की जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार निकली….

निर्मला देवी हरियाणा के सोनीपत जिले के थाना खरखौदा के गांव बरौना के रहने वाले चंदर सिंह की बेटी थी. बताया जाता है कि अपनी 7 बहनों में वह मंझली थी. 7 बहनों के बीच एक ही भाई था आनंद कुमार.  चंदर सिंह एक संपन्न किसान थे. वह गांव में रहते जरूर थे लेकिन उन की सोच अन्य गांव वालों से अलग थी. उसी सोच की बदौलत उन्होंने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई.

निर्मला ने स्टाफ नर्स की पढ़ाई की. इस के बाद 1994 में दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में उस की नौकरी लग गई. बाद में उस के भाई आनंद कुमार की भी एक बैंक में अधिकारी के पद पर नौकरी लग गई.  लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में नौकरी लगने के बाद निर्मला अस्पताल के बराबर में ही स्थित मुस्कान हौस्टल में रहने लगी.

जैसेजैसे बच्चे सयाने होते गए, चंदर सिंह ने उन की शादी कर दी. 15 मार्च 1999 को उन्होंने निर्मला की शादी भी सोनीपत जिले के ही गन्नौर थाने के अंतर्गत स्थित गांव पुगथला के रहने वाले मेहरूलाल के साथ कर दी. शादी के कुछ दिनों बाद से ही निर्मला के पति से मतभेद शुरू हो गए. जिस की आंच उन के रिश्ते पर आनी शुरू हो गई. इस बीच निर्मला ने एक बेटे को जन्म दिया.

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