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9 जनवरी, 2017 को पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना के रहने वाले 65 वर्षीय रामजी सिंह पटना के सचिवालय थाने पहुंचे तो उस समय इंसपेक्टर प्रकाश सिंह अपने कक्ष में बैठे कुछ जरूरी फाइलें निबटा रहे थे. रामजी सिंह उन के सामने खाली पड़ी कुरसी पर बैठ गए.

इंसपेक्टर ने फाइलों को एक तरफ किया और रामजी सिंह से मुखातिब हुए. रामजी सिंह ने उन्हें बताया कि उन का बेटा विनोद कुमार सिंह पटना के सचिवालय में लघु सिंचाई विभाग में नौकरी करता है. वह अंतरराष्ट्रीय तैराक भी रह चुका है. जन्म से उस के दोनों हाथ नहीं हैं. पिछले 2 दिनों से उस का कहीं पता नहीं चल रहा है और उस का मोबाइल भी बंद है.

रामजी सिंह की बात सुन कर इंसपेक्टर प्रकाश सिंह चौंके. हाई प्रोफाइल मामला था और सचिवालय से जुड़ा हुआ भी. उन्होंने सारा काम छोड़ कर रामजी की पूरी बात सुनी. रामजी ने उन्हें आगे बताया कि 2 दिन पहले 7 जनवरी, 2017 को दोपहर को बेटे से उन की बात हुई थी. उस ने कहा था कि वह कुछ जरूरी काम से भागलपुर जा रहा है. काम निपटा कर वह वापस पटना लौट जाएगा.

उस के बाद से उस का फोन बंद बता रहा है. वह 2 दिनों से लगातार उस के मोबाइल पर फोन कर रहे थे, लेकिन उस से न तो बात हो सकी और न ही उस का कुछ पता चल रहा है.

मामला गंभीर था, इसलिए बिना देर किए प्रकाश सिंह ने इस मामले की जानकारी एसएसपी मनु महाराज और आईजी नैयर हसनैन खान को दे दी. मामला सचिवालय से जुड़ा होने की वजह से अधिकारियों के भी हाथपांव फूल गए. वे किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने प्रकाश सिंह को उचित काररवाई करने के आदेश दिए.

त्वरित काररवाई करते हुए प्रकाश सिंह रामजी सिंह के साथ विनोद के कमरे पर पहुंचे. विनोद शास्त्रीनगर के राजवंशीनगर, रोड संख्या 6 के मकान नंबर 396/400 में अपने भांजे अंकित कुमार सिंह के साथ रहता था. प्रकाश सिंह ने सब से पहले अंकित से विनोद के बारे में पूछताछ की. लेकिन वह विनोद के बारे में कुछ खास नहीं बता सका तो उन्होंने कमरे में रखे विनोद के सामान की जांच की. तो उस में उन्हें विनोद की एक पुरानी डायरी मिली.

उस डायरी में भागलपुर के रहने वाले एक तैराक संजय कुमार का मोबाइल नंबर लिखा था. इस के अलावा वहां से ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस से विनोद के बारे में कुछ पता चलता. प्रकाश सिंह ने यह बात एसएसपी मनु महाराज को बता दी. मनु महाराज ने उन्हें आदेश दिया कि एक पुलिस अफसर को भागलपुर भेज कर वहां से पता लगाने की कोशिश करें. इस पर उन्होंने रामजी सिंह के साथ एसआई अरविंद कुमार को भागलपुर भेज दिया.

10 जनवरी, 2017 को रामजी सिंह और एसआई अरविंद कुमार भागलपुर पहुंचे. संजय कुमार के मोबाइल पर संपर्क करके वे उसके घर पहुंच गए. वह तिलकामांझी मोहल्ले में अपने निजी मकान में रहता था. उससे अरविंद कुमार ने विनोद के बारे में पूछताछ की तो उस ने जो जानकारी दी, उसे सुन कर दोनों हैरान रह गए.

संजय ने बताया कि 1 जनवरी, 2017 को विनोद रंजना नाम की एक लड़की से मिलने भागलपुर आया था. रंजना को ले कर उस की रंजना के बहनोई शंभू मंडल और उस के मौसेरे भाई बिट्टू से कहासुनी हुई थी. कहासुनी के बीच शंभू मंडल ने विनोद के गाल पर कई थप्पड़ मारे थे, साथ ही उस पर अपनी साली का मोबाइल चुराने का आरोप भी लगाया था. इस के बाद दोनों उसे ले कर तिलकामांझी थाने गए थे.

तिलकामांझी थाने के थानाप्रभारी विनोद को देख कर दंग रह गए थे, क्योंकि विनोद के दोनों हाथ नहीं थे. ऐसे में वह चोरी कैसे कर सकता था. थानाप्रभारी को शंभू और बिट्टू पर शक हुआ तो उन्होंने उन से पूछताछ की. उन्होंने कहा कि जिस के दोनों हाथ ही नहीं हैं, वह भला चोरी कैसे कर सकता है. यह कुछ और ही मामला लगता है.

उन्होंने शंभू से रंजना के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि वह यहां नहीं है. हां, उस से बात करा सकता है. इस के बाद उस ने रंजना की थानाप्रभारी से बात कराई. रंजना ने उन्हें बताया कि विनोद ने उस का मोबाइल चुराया नहीं, बल्कि जबरन अपने पास रख लिया है, जिसे वह उसे लौटा नहीं रहा है.

थानाप्रभारी तिलकामांझी ने रंजना के मोबाइल के बारे में विनोद से पूछा तो उस ने कहा कि उस का मोबाइल उस के पास है. थानाप्रभारी ने विनोद से उस का मोबाइल लौटाने को कहा तो उस ने मोबाइल शंभू मंडल को लौटा दिया. शंभू मंडल और बिट्टू मोबाइल ले कर चले गए. थानाप्रभारी ने विनोद को समझाया कि वह अपने घर लौट जाए. ये अच्छे लोग नहीं हैं. उन दोनों के चले जाने के बाद थानाप्रभारी ने थाने के 2 सिपाहियों के साथ विनोद को स्टेशन पहुंचवा दिया. इस के आगे संजय कुछ नहीं बता सका.

संजय ने जो भी बताया था, उस की तसदीक करने के लिए एसआई अरविंद कुमार और रामजी सिंह तिलकामांझी थाने पहुंचे. वहां से पता चला कि संजय द्वारा दी गई जानकारी सही थी. सच्चाई जानने के बाद एसआई अरविंद कुमार ने रामजी सिंह से रंजना के बारे में पूछा.  वह केवल इतना ही बता सका कि रंजना राज्य स्तर की वौलीबाल खिलाड़ी थी. दोनों का एकदूसरे से परिचय खेल के माध्यम से ही हुआ था. 6 महीने पहले दोनों को पटना सचिवालय में एक साथ देखा गया था.

रामजी सिंह ने इस बारे में बेटे विनोद से पूछा था तो उस ने बताया था कि भागलपुर की रहने वाली वौलीबाल खिलाड़ी रंजना उस की दोस्त है. रामजी सिंह को इस से ज्यादा कुछ पता नहीं था. जो भी जानकारी मिली, उसी के आधार पर एसआई अरविंद कुमार को यह प्रेमप्रसंग का मामला लगा.

विनोद कुमार का मामला रहस्यमय ढंग से उलझ गया था. जब कोई सुराग हाथ नहीं लगा तो दोनों पटना लौट आए. 2 दिनों तक रामजी सिंह पटना में रह कर अपने स्तर से बेटे की तलाश करते रहे. उन्होंने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों के यहां पता लगाया, लेकिन विनोद का कहीं पता नहीं चला. जब कहीं से भी कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने 13 जनवरी को बेटे की गुमशुदगी थाना सचिवालय में दर्ज करा दी.

गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस की काररवाई में तेजी आई. कई दिनों तक पुलिस विनोद की खोज करती रही. मुखबिर भी लगाए गए, फिर भी विनोद के बारे में कुछ पता नहीं चला. 21 जनवरी, 2017 को पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय तैराक विनोद कुमार सिंह के अपहरण का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ भादंसं की धारा 363, 365 और 34 के तहत दर्ज कर लिया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने विनोद की सुरागरसी में जमीनआसमान एक कर दिया. पूछताछ के लिए उस के कुछ दोस्तों को भी हिरासत में लिया गया, लेकिन इस से भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा. स्थानीय अखबारों ने दिव्यांग तैराक विनोद के अपहरण की खबरों को खूब सुर्खियों में उछाला, जिस से पुलिस की खूब छीछालेदर हो रही थी.

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