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एसआई की थोड़ी सी सख्ती ने ही उन्हें गिड़गिड़ाने पर विवश कर दिया. अरमान डरते हुए बोला, ”छोड़ दीजिए साहब, मैं कुबूल करता हूं कि मैं ने इन दोनों दोस्तों के साथ मिल कर माहिर की जान ली थी.’’

एएसआई विपिन त्यागी ने उसी समय एसएचओ प्रवीण कुमार को बुला लिया. उन्होंने बहुत गंभीर स्वर में पूछा, ”तो तुम कुबूल करते हो कि माहिर की तुम्हीं तीनों ने हत्या की है?’’

”हां साहब,’’ अरमान हाथ जोड़ते हुए कराहते हुए बोला.

”तुम तीनों ने माहिर की हत्या क्यों की, तुम्हारी उस से ऐसी क्या दुश्मनी थी कि तीनों ने इतनी बेरहमी से माहिर की जान ले ली?’’

”माहिर मेरे प्यार में कांटा बन गया था साहब. मैं जिस लड़की से प्यार करता हूं, उसे माहिर हासिल कर लेना चाहता था, मजबूरन मुझे उसे रास्ते से हटाना पड़ा.’’

”मुझे विस्तार से बताओ.’’ एसएचओ इस ट्रिपल लव स्टोरी की हकीकत जानने के लिए उत्सुक हुए तो अरमान ने ऐसी प्रेम कहानी का खुलासा किया, जो आधुनिक प्रेम में युवकयुवती के भटकाव को दर्शाती थी. यह कहानी इस प्रकार थी—

इंस्टाग्राम पर हुई थी जैनब से दोस्ती

अरमान उम्र का 20वां साल पार कर चुका था. इस उम्र में युवा मन में किसी सुंदर लड़की की चाहत अंगड़ाई लेने लगती है. अरमान दिखने में सुंदर था. उस पर कुरता पायजामा ही नहीं, जींस और शर्ट भी खूब जंचती थी. हीरो की तरह रहने वाला अरमान अपने लिए हीरोइन की तलाश कर रहा था.

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अरमान को मोबाइल चलाने का शौक था. उसे मालूम था कि फेसबुक पर जवान जवान लड़कियां दोस्ती के लिए रिक्वेस्ट डालती हैं, उन से दोस्ती की जा सकती है.

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        आरोपी अरमान

अरमान ने फेसबुक खोल कर देखना शुरू किया तो उसे एक पोस्ट पर जैनब नाम की एक लड़की की फ्रेंड रिक्वेस्ट दिखी. जैनब ने अपनी हौबी और अपनी उम्र भी लिखी हुई थी. वह 19 साल की थी. उस की हौबी हमउम्र लड़कों से दोस्ती करना, संगीत सुनना थी. उस ने फेसबुक पर अपनी खूबसूरत फोटो भी लगा रखी थी. अरमान को वह बहुत पसंद आई.

उस ने जैनब की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. जैनब ने उस की दोस्ती को तुरंत स्वीकार कर लिया. उस ने अरमान से शुरू में मैसेज से बातचीत की, फिर उस से फोन मिला कर बातें करने लगी. उस की सुरीली आवाज और खनकती हंसी का अरमान दीवाना हो गया.

दूसरे दिन उस ने जैनब को फोन मिला दिया, ”हैलो जैनब, कहां पर हो?’’

”घर पर ही हूं अरमान. कहो कैसे फोन किया?’’ जैनब ने पूछा.

”तुम्हें अपने सामने देखने का मन हो रहा है जैनब, क्या तुम मुझे बाहर कहीं मिल सकती हो?’’

”मिल लूंगी अरमान, बताओ कहां आऊं मैं?’’

”तुम खुद डिसाइड कर लो जैनब, तुम जहां कहोगी मैं पहुंच जाऊंगा.’’

”मैं कनाट प्लेस आ जाती हूं, तुम पालिका बाजार के गेट नंबर एक पर मेरा इंतजार करना. मैं एक घंटे में पहुंच जाऊंगी.’’ जैनब ने कह कर काल डिसकनेक्ट कर दी.

अरमान हवा में उडऩे लगा. उसे लगा कि जैसे आज मनमांगी मुराद मिल गई है. वह जल्दी जल्दी तैयार हुआ और आटोरिक्शा द्वारा कनाट प्लेस पहुंच गया. पालिका बाजार के गेट नंबर एक पर पहुंच कर उस ने मोबाइल में समय देखा तो अभी एक घंटा पूरा होने को 10 मिनट शेष दिखाई दिए. वह अपने उतावलेपन पर मुसकरा पड़ा. यहां आने में उस ने जैनब से बाजी मार ली थी.

जैनब 15 मिनट देर से आई. चूंकि फेसबुक पर उन की चैटिंग होती रहती थी, इसलिए दोनों एकदूसरे को तुरंत पहचान गए. अरमान ने लपक कर जैनब का हाथ पकड़ लिया और उस की बड़ी बड़ी आंखों में देखने लगा.

”क्या ढूंढ रहे हो तुम मेरी इन आंखों में?’’ जैनब ने इठला कर पूछा.

”देख रहा हूं मेरे लिए इन आंखों में कितना प्यार है.’’

”यह तो तुम्हें इन आंखों की गहराई में उतरने के बाद ही मालूम होगा.’’ जैनब मुसकरा कर बोली.

”तुम्हारी इजाजत चाहिए जैनब. इन आंखों में तो क्या मैं तुम्हारे दिल की गहराई में भी उतर जाऊंगा.’’ अरमान गहरी सांस भर कर बोला.

”मेरे दिल की गहराई में तुम्हें मेरा प्यार ही प्यार मिलेगा. मेरी हर धड़कन तुम्हारा ही नाम ले रही होगी अरमान.’’ जैनब सर्द आह भर कर बोली.

”बहुत दिलचस्प हो तुम जैनब, तुम्हारे साथ खूब निभेगी.’’ अरमान हंस कर बोला, ”आओ, पहले कौफी हाउस चल कर कौफी पीते हैं. फिर पालिका पार्क में बैठ कर बातें करेंगे.’’

अरमान जैनब को ले कर कौफी हाउस में आ गया. वहां कौफी पी लेने के बाद वे पालिका पार्क में आ बैठे.

”कहां रहते हो अरमान?’’ जैनब ने पूछा.

”मैं गोकलपुरी के भागीरथी विहार में रहता हूं जैनब, तुम कहां रहती हो?’’

”मैं घड़ौली, मयूर विहार फेज-3 में रहती हूं.’’ जैनब में बताया.

”जैनब मेरी जिंदगी में आने वाली तुम पहली लड़की हो.’’ अरमान जैनब की कोमल हथेली अपने हाथ में ले कर बोला, ”मैं तुम्हें अपनी जान से ज्यादा प्यार करूंगा, तुम्हें अपने दिल में बसा कर रखूंगा. तुम्हें अपनी दुलहन बनाऊंगा.’’

जैनब मुसकराई, ”अगर तुम्हारे ऐसे सपने हैं तो इन सपनों को साकार करने के लिए ढेर सारी दौलत कमानी होगी अरमान, तुम पढ़लिख कर किसी अच्छी सर्विस पर लग जाओ, फिर हम शादी कर लेंगे.’’

”मैं अपना बिजनैस करूंगा जैनब. देखना तुम, मैं पैसों का अंबार लगा दूंगा.’’

”तुम्हारी मनोकामना पूरी हो अरमान, तुम राजा बन जाओगे तो मैं तुम्हारी रानी बन जाऊंगी.’’ जैनब ने दिल से कहा.

”मैं बहुत जल्दी अपना सपना पूरा करूंगा जैनब. आओ, तुम्हें भूख लगी होगी, किसी रेस्तरां में बैठ कर कुछ खा लेते हैं.’’ अरमान उठते हुए बोला.

जैनब ने भी जगह छोड़ दी. अरमान ने उसे एक रेस्तरां में लंच करवाया. अरमान से फिर मिलने का वादा कर के जैनब अपने घर के लिए निकल गई. अरमान भी वापस आ गया. अरमान और जैनब का प्यार दिन पर दिन गहरा होता जा रहा था. अरमान समय समय पर जैनब को कुछ न कुछ तोहफे देता रहता था.

कुछ दिनों बाद अरमान का जन्मदिन था. यह बात उस ने फोन द्वारा जैनब को बता दी थी. जैनब अरमान को उस के जन्मदिन पर कोई कीमती गिफ्ट देना चाहती थी. क्या दे, वह इसी सोच में थी कि उसे माहिर का खयाल आया.

माहिर विजय विहार, लोनी (गाजियाबाद) में रहता था. वह भी जैनब का हमउम्र था. 20 साल का उभरता युवा. जैनब उस से भी प्रेम करती थी. माहिर से भी उस की जान पहचान फेसबुक के द्वारा ही हुई थी. वह माहिर के साथ भी शादी का ख्वाब पाले हुए थी. जैनब एक साथ 2-2 युवकों को फांसे हुए थी. वह जानती थी माहिर उसे बहुत प्यार करता है, इसलिए उस ने अरमान को जन्मदिन गिफ्ट देने के लिए माहिर की मदद लेने का मन बना लिया.

उस ने माहिर को फोन किया. दूसरी ओर से तुरंत उस की फोन अटेंड की गई. माहिर का उतावला स्वर उभरा, ”कहां पर हो उर्वशी, मैं तुम्हारे लिए 2 दिनों से परेशान हूं. तुम्हारा फोन नौट रीचेबल आ रहा था.’’ जैनब ने माहिर को अपना नाम उर्वशी बताया हुआ था.

”क्यों? मैं तो यहीं थी. हो सकता है नेटवर्क की प्राब्लम हो.’’ जैनब उर्फ उर्वशी ने बात घुमाई, ”मुझे तुम से शाम को मिलना है.’’

”हां मिलो न, मैं तुम्हारी खातिर बहुत बेचैन हूं. मिलोगी तब चैन आएगा. बोलो, कहां आना है?’’ माहिर की ओर से बेसब्री से पूछा गया.

”वही पुरानी जगह, इंडिया गेट आ जाना, शाम को 4 बजे.’’

”ठीक है.’’

फोन डिसकनेक्ट कर जैनब ने घड़ी देखी. दोपहर का एक बज रहा था. वह माहिर से मिलने जाने के लिए तैयार होने लगी.

शाम को माहिर और उर्वशी इंडिया गेट के पार्क में एक पेड़ के नीचे बैठे थे. माहिर के बालों में अंगुलियां चलाते हुए उर्वशी उसे एकटक देख रही थी. माहिर ने आंखें मूंद ली थीं. अपने बालों में उर्वशी की अंगुलियां घूम रही थीं तो उसे बहुत अच्छा लग रहा था.

”माहिर.’’ उर्वशी ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया, ”मुझे एक अच्छा सा फोन दिलवाओ न.’’

”फोन है तो तुम्हारे पास.’’ माहिर आंखें खोल कर बोला.

”मुझे अपनी एक सहेली को उस के जन्म दिन पर गिफ्ट देना है, मुझे नया फोन चाहिए.’’

माहिर ने कुछ देर सोचा फिर बोला, ”मैं कल तुम्हें मोबाइल फोन ला कर दे दूंगा. एक नया फोन है मेरे पास. आईफोन-14. उस का लुक अच्छा है, तुम्हारी सहेली को पसंद आ जाएगा.’’

”ठीक है. मैं कल मिलती हूं तुम से.’’ कहते हुए उर्वशी खड़ी हुई तो माहिर चौंक पड़ा, ”इतनी जल्दी जा रही हो.’’

”एक काम है माहिर, घर में मेरा इंतजार हो रहा होगा. कल मिलती हूं न, फिर इत्मीनान से बैठेंगे.’’ उर्वशी बात बना कर बोली, ”कल मैं इसी समय तुम्हें यहीं मिलूंगी. फोन ले कर आना.’’

”ले कर आऊंगा.’’ माहिर ने कहा तो उर्वशी उस से विदा हो कर चली गई. माहिर को उर्वशी के इस रवैए पर हैरानी हुई, लेकिन वह चुप रह गया. उर्वशी के जाने के बाद वह पैदल ही एक ओर बढ़ गया.

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