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थाने में जब उस से अरुण के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. उस ने अरुण को जाननेपहचानने से ही इंकार कर दिया. लेकिन जब उस पर सख्ती की गई तो वह टूट गया. उस के बाद अमित उर्फ गुड्डू ने जो कुछ पुलिस को बताया, उसे सुन कर पुलिस चकित रह गई.

अमित ने बताया कि अरुण कुमार अब इस दुनिया में नहीं है. संदीप व उस के भाई पवन ने 16 जुलाई, 2022 की शाम ही गोली मार कर उस की हत्या कर दी और शव को गंगरौली गांव के बाहर नदी किनारे खेत में दफन कर दिया था. किसी को शक न हो इसलिए खेत को ट्रैक्टर से जोत दिया था.

19 जुलाई, 2022 की सुबह 10 बजे एसएचओ अंजन कुमार सिंह पुलिस दल के साथ गंगरौली गांव स्थित उस खेत पर पहुंचे, जहां अरुण के शव को दफनाया गया था. अब तक युवक की हत्या कर शव को दफनाए जाने की खबर सपई व गंगरौली गांव में फैल गई थी, जिस से सैकड़ों लोग वहां आ गए थे. पुलिस की सूचना पर अरुण की पत्नी नीतू, भाई कुलदीप व पिता रामकुमार भी खेत पर मौजूद थे.

लगभग 12 बजे अमित कुमार उर्फ गुड्डू को पुलिस कस्टडी में खेत पर लाया गया. फिर उस की निशानदेही पर मिट्टी हटा कर शव को गड्ढे से बाहर निकाला गया. शव को देख कर कुलदीप व रामकुमार फूटफूट कर रोने लगे.

कुलदीप ने पुलिस को बताया कि शव उस के भाई अरुण कुमार का है. पति का शव देख कर नीतू भी दहाड़ मार कर रोने लगी. पुलिस ने किसी तरह उसे शव से दूर किया.

एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने अरुण कुमार की हत्या किए जाने तथा शव को खेत से बरामद करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसीपी दिनेश कुमार शुक्ला, डीसीपी (क्राइम) सलमान ताज पाटिल तथा एसपी (कानपुर आउटर) तेजस्वरूप सिंह मौका ए वारदात आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से शव का निरीक्षण किया. अरुण की उम्र 28 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या सीने पर गोली मार कर की गई थी. पुलिस अधिकारियों ने मृतक के घर वालों तथा हत्या के आरोप में पकड़े गए युवक अमित उर्फ गुड्डू से भी हत्या के संबंध में पूछताछ की.

शव निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने एसएचओ अंजन कुमार सिंह को आदेश दिया कि वह शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजें तथा रिपोर्ट दर्ज कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करें. गिरफ्तारी में कोई प्रभावशाली व्यक्ति बाधा पहुंचाए तो उसे भी कानून की गिरफ्त में ले लें. किसी कीमत पर उसे बख्शा न जाए.

अधिकारियों का आदेश पाते ही अंजन कुमार सिंह ने शव को पोस्टमार्टम हेतु माती भेज दिया. इस के बाद थाने वापस आ कर मृतक की पत्नी नीतू की तहरीर पर आईपीसी की धारा 302/201 के तहत संदीप, अमित कुमार व पवन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

अमित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ काररवाई कर संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया. संदीप की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया. जिसे उस ने नदी किनारे झाडि़यों में छिपा दिया था. तीसरा आरोपी पवन पुलिस के हाथ नहीं आया.

चूंकि संदीप और अमित कुमार ने अरुण की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और संदीप ने हत्या में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद करा दिया था, अत: एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया. संदीप और अमित से की गई पूछताछ में त्रिकोण प्रेम की सनसनीखेज कहानी सामने आई.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर एक कस्बा है-चौबेपुर. यह कस्बा गल्ला और पशु व्यवसाय के लिए जाना जाता है. यहां का पशु मेला दूरदराज के गांवों तक मशहूर है.

इसी चौबेपुर कस्बे से 5 किलोमीटर दूर बेला-बिधुना रोड पर एक गांव बसा है पसेन. हरेभरे पेड़ों के बीच बसा यह गांव अपनी अलग ही छटा बिखेरता है. इसी पसेन गांव में रामकुमार कुरील अपने परिवार के साथ रहते थे.

उन के परिवार में पत्नी कमला के अलावा 2 बेटे कुलदीप तथा अरुण थे. रामकुमार कुरील अपने खेत में सब्जियां उगाते थे और कस्बे में ले जा कर बेचते थे. सब्जी के इस व्यवसाय में उन्हें जो आमदनी होती थी, उसी से अपने परिवार का भरणपोषण करते थे.

रामकुमार कुरील चाहते थे कि उन के दोनों बेटे पढ़लिख कर सरकारी नौकरी करें. लेकिन उन की यह तमन्ना पूरी न हो सकी. कारण उन के दोनों बेटों का मन पढ़ाई में नहीं लगा और वे 10वीं कक्षा भी पास नहीं कर पाए.

पढ़ाई बंद करने के बाद कुलदीप तो पिता के काम में हाथ बंटाने लगा, लेकिन अरुण का मन गांव में नहीं लगा. वह गांव छोड़ कर कानपुर शहर आ गया. यहां वह मेहनतमजदूरी करने लगा. एक रोज अरुण की मुलाकात राजमिस्त्री राम अचल से हुई. वह उसी की जाति का था सो दोनों में खूब पटने लगी. राम अचल ने उसे राजमिस्त्री का काम सिखाया और उसे मजदूर से राजमिस्त्री बना दिया.

अरुण तेजतर्रार नौजवान था. उस ने राजमिस्त्री के साथसाथ मकान बनाने के ठेके भी लेने लगा. उस काम में उसे अच्छी आमदनी होने लगी.

कुछ समय बाद अरुण ने अपने भाई कुलदीप को भी गांव से बुला लिया. अब दोनों भाई कानपुर शहर के पनकी कलां मोहल्ले में किराए पर रहने लगे. अरुण ने 8-10 लोगों का एक समूह बना लिया. वे सभी उस के साथ काम करते थे.

अरुण कुमार अच्छा कमाने लगा तो उस का रहनसहन भी बदल गया. अब वह ठाटबाट से रहता और पिता के हाथों पर भी चार पैसा रखता.

अरुण की रिश्तेदारी कानपुर देहात जिले के सपई गांव में थी. वहां उस की बुआ ब्याही थी. बुआ के घर अरुण का आनाजाना लगा रहता था. बुआ उस की खूब आवभगत करती थी, सो वह उन से प्रभावित था.

बुआ के घर आतेजाते एक रोज अरुण की मुलाकात सीमा से हुई. सीमा का घर उस की बुआ के घर से कुछ दूरी पर था. उस के पिता रजोल किसान थे. 3 भाईबहनों में सीमा सब से बड़ी थी.

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