पुलिस ने फायजा के मोबाइल के वाट्सऐप को चैक किया तो वह दोनों ही नंबरों पर चैटिंग करती थी. जिस से यह साफ हो गया था कि फायजा एक साथ प्यार की 2 नावों पर सवार हो कर यात्रा कर रही थी. यानी फायजा का एक साथ 2 युवकों के साथ चक्कर चल रहा था.
इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि चाकू के हमले से ही शरीर के कई अंग कट गए थे, जो उस की मौत का कारण भी बने थे.
पोस्टमार्टम हो जाने के बाद पुलिस ने उस का शव उस के घर वालों को सौंप दिया था. इस केस में मृतका के अब्बू नन्हे की ओर से हसन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. जिस के बाद पुलिस ने आरोपी की धरपकड़ के लिए 2 पुलिस टीमों का गठन किया.
पुलिस की एक टीम ने उसी वक्त आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए उत्तराखंड के सितारगंज में उस के आवास पर दबिश दी. लेकिन वह घर से फरार मिला. उस के बाद भी पुलिस ने उस की कई संभावित ठिकानों पर छापा मारा. लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका. फिर पुलिस ने उस की खोजखबर के लिए मुखबिर लगा दिए.
3 अगस्त, 2022 को पुलिस को एक मुखबिर ने सूचना दी. आरोपी हसन कहीं जाने की फिराक में रामपुर के विलासपुर रोड पर पुल के नीचे खड़ा हुआ है. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने आरोपी को चारों ओर से घेरने के बाद गिरफ्तार कर लिया.
हसन को गिरफ्तार कर पुलिस उसे मिलक थाने ले आई. पुलिस ने उस से इस हत्याकांड की बाबत जानकारी ली. हसन ने पुलिस के सामने आते ही आसानी से अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस पूछताछ के दौरान इस हत्याकांड की जो हकीकत सामने आई, वह इस प्रकार थी—
उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के मिलक कोतवाली क्षेत्र में आता है एक गांव जालिफ नगला. इसी गांव में नन्हे अपने परिवार के साथ रहता था. नन्हे का रेडीमेड कपड़े का कारोबार था. वह आसपास के गांव व शहरों में लगने वाले बाजारों में फड़ लगा कर कपड़े बेचता था. नन्हे की एक ही बेटी थी फायजा.
बीवी आसिफा को मिला कर घर में मात्र 3 प्राणी थे. कपड़े के व्यापार से नन्हे को अच्छी आमदनी थी. उसी आमदनी के सहारे ही नन्हे ने गांव में अच्छा मकान बनवा लिया था.
घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण नन्हे ने अपनी बेटी फायजा को बहुत ही शौक से पालापोसा था. नन्हे ने बेटी के भविष्य को देखते हुए उसे अच्छी शिक्षा दिलाने की कोशिश की. लेकिन ज्यादा लाड़प्यार में पली होने के कारण वह इंटरमीडिएट तक ही पढ़ पाई थी. उस के बाद उस ने आगे की पढ़ाई बंद कर दी और जौब की तलाश में जुट गई.
फायजा ने कंप्यूटर कोर्स भी कर रखा था, जिस से वह हर वक्त लैपटाप पर कुछ न कुछ करती रहती थी. साल 2021 में उस की मुलाकात एक व्यक्ति से हुई. वह व्यक्ति आयुष्मान कार्ड बनाने वाली एक संस्था से जुड़ा था. उसी के मार्फत फायजा को भी उसी संस्था में आयुष्मान कार्ड बनाने का काम मिल गया. वह उसी संस्था के माध्यम से अलीगढ़ में संविदा पर काम करने लगी थी.
घर छोड़ कर अलीगढ़ काम करना फायजा को उचित नहीं लगा. उस का वहां पर मन नहीं लगा तो एक महीने बाद ही वह अपने घर वापस चली आई थी.
फायजा के गांव में ही हसन का एक दोस्त था राशिद. राशिद के साथ हसन की पक्की दोस्ती थी. उसी दोस्ती के सहारे उस का राशिद के घर आनाजाना था. फायजा के घर के पास ही राशिद का घर था. उसी आनेजाने के दौरान एक दिन उस की नजर फायजा पर पड़ी.
चूंकि फायजा के अब्बू रेडीमेड कपड़े के व्यवसाय से जुड़े थे. इसी कारण वह हर रोज नएनए लिबास में नजर आती थी. फायजा देखने में तो सुंदर थी ही, ऊपर से उस का पहननाओढ़ना ऐसा था कि उस की खूबसूरती में चार चांद लग जाते थे.
हसन उसे देखते ही मन ही मन चाहने लगा. एक दिन फायजा किसी काम से राशिद के घर गई तो उस वक्त हसन भी आया हुआ था. हसन ने उसे करीब से देखा तो उस का दिल बेकाबू हो गया.
राशिद यह तो जानता था कि हसन फायजा के रंगरूप पर मर मिटा है. उस दिन मौका मिला तो राशिद ने हसन की मुलाकात अपने दोस्त के रूप में कराई. उस के घर से जाते ही हसन अपने दिल को थाम कर बैठ गया. हसन ने राशिद से फायजा का मोबाइल नंबर भी ले लिया था.
अगले ही दिन हसन ने फायजा के मोबाइल पर काल कर के अपना परिचय देते हुए बातचीत आगे बढ़ाई. उस दिन हसन ने काफी देर तक फायजा से मोबाइल पर बात की. दोनों पहले ही राशिद के घर पर एकदूसरे से मुखातिब हो चुके थे. इसी कारण दोनों को आगे बात बढ़ाने में टाइम नहीं लगा था.
बातों ही बातों में हसन ने फायजा के सामने दोस्ती की पेशकश की तो उस ने स्वीकार कर ली. फायजा के दोस्ती कुबूलते ही हसन का दिल बागबाग हो उठा. उसे फायजा से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह इतनी जल्दी उस से दोस्ती कर लेगी. फिर हसन उस से मिलने के लिए बेताब रहने लगा था.
वह जल्दी ही उस से मिलने की आस लिए राशिद के घर जा पहुंचा. हसन के आने की खबर पाते ही फायजा भी तुरंत उस से मिलने राशिद के घर जा पहुंची. फायजा को सामने पा कर हसन को बहुत खुशी हुई. अब उस के नजरिए में भी पहले के मुकाबले काफी बदलाव आ गया था.
दूसरी मुलाकात में ही दोनों के बीच प्यार अंकुरित हो चुका था. उस के बाद दोनों मोबाइल पर प्यार भरी बातें करने लगे थे. फिर एक दिन ऐसा भी आया कि हसन उस से सीधा मिलने उस के घर भी जाने लगा था.
उस ने अपने अब्बूअम्मी से उस का परिचय देते हुए बताया कि उस की मुलाकात अलीगढ़ में काम करने के दौरान हुई थी. वह अभी भी वहीं पर जौब करता है. वह वहीं पर उस की फिर से जौब लगवाने की कोशिश कर रहा है.
यह सुन कर उस के अब्बूअम्मी को बहुत खुशी हुई. उस के बाद फायजा को अपने घर वालों की तरफ से उस के साथ आनेजाने की पूरी छूट मिल गई थी.