आज से करीब 2 साल पहले रुखसाना काकोड़ (जिला टोंक) से अपने चारों बेटों के साथ मालपुरा गेट इलाका जयपुर में आ कर रहने लगी. उस ने एक कमरा किराए पर लिया और सांगानेर की एक फैक्ट्री में नौकरी कर ली. रुखसाना की गाड़ी चलने लगी.
जयपुर आने के महीने भर बाद एक रोज किसी अंजान व्यक्ति का फोन रुखसाना के मोबाइल पर आया. रुखसाना ने काल रिसीव कर कहा, “हैलो.”
तब दूसरी तरफ से व्यक्ति बोला, “आप रुखसाना बोल रही हैं?”
“हां, मैं रुखसाना बोल रही हूं. आप कौन बोल रहे हैं? मैं ने पहचाना नहीं आप को.” रुखसाना ने कहा.
तब वह बोला, “मैं नजलू खान बोल रहा हूं. मुझे आप की आवाज बड़ी प्यारी लगती है.”
यह सुनते ही रुखसाना को गुस्सा आ गया. उस ने कहा, “बकवास मत करो और सुनो, दोबारा फोन भी मत करना.”
रुखसाना ने फोन काट दिया. सोचा कि कोई लफंगा है. एक बार डपटने के बाद दोबारा फोन नहीं करेगा. मगर यह उस की सोच तब गलत साबित हुई, जब 5 मिनट बाद उस का दोबारा फोन आ गया.
वह बोला, “मुझे तुम्हारी आवाज बहुत मीठी लगती है. मैं ने जब से तुम्हें देखा है और आवाज सुनी है. मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूं. लगता है मुझे तुम से प्यार हो गया है…”
सुन कर रुखसाना उस की बात बीच में काटते हुए बोली, “मैं तुम्हें जानती नहीं. फिर क्यों बारबार फोन कर रहे हो. दोबारा मुझे फोन मत करना. यही ठीक रहेगा तुम्हारे लिए.”
रुखसाना के संपर्क में आया नजलू खान
कहने के साथ ही रुखसाना ने फिर काल डिसकनेक्ट कर दी. मगर उस व्यक्ति का फोन जिस ने अपना नाम नजलू खान बताया था, दिन में कईकई बार रुखसाना के पास आने लगा. वह हमेशा उस की आवाज की तारीफ करता था. बोली बड़ी प्यारी लगती है. रुखसाना उस के दिन भर आने वाले फोन काल्स से तंग आ गई थी. मगर वह करती भी तो क्या.
नजलू खान (24 साल) निवासी गांव सूरवाल, जिला सवाई माधोपुर कामधंधे की तलाश में आज से करीब 4 साल पहले जयपुर आया था. उस ने शिकारपुरा रोड, सेक्टर-35 सांगानेर में किराए का कमरा लिया और रहने लगा. वह कुंवारा था और थोड़ा पढ़ालिखा भी. नजलू जयपुर आ कर कपड़े खरीदने और बेचने का काम करता था.
कपड़े के इस धंधे से उसे अच्छीखासी आमदनी होती थी. रुखसाना जब जयपुर आई थी, उन्हीं दिनों एक रोज नजलू की नजर रुखसाना पर पड़ी. तब वह उस की सुंदरता पर मर मिटा. नजलू ने पता किया कि यह महिला कौन है और कहां रहती है, नजलू ने उस के बारे में सारी बातें पता कर लीं.
उसे पता चला कि रुखसाना के पति की मौत हो चुकी है. उस के 4 बेटे हैं. वह अपने बच्चों के साथ मालपुरा गेट इलाके में किराए के कमरे में रहती है और सांगानेर की एक फैक्ट्री में नौकरी करती है. बस, उस के बाद नजलू ने उस फैक्ट्री से रुखसाना का मोबाइल नंबर जुटाया और उसे फोन कर उस की सुंदरता व मीठी बोली की तारीफ करने लगा.
बारबार अजनबी का फोन आने से रुखसाना को फैक्ट्री में परेशानी होने लगी. उस ने उसे डांटाफटकारा, लेकिन वह नहीं माना. आखिर में परेशान हो कर रुखसाना ने नजलू खान को पति की मौत और बच्चों के बारे में सब कुछ बता दिया, ताकि उस से पीछा छुड़ा सके. इस के बाद भी नजलू ने फोन करना बंद नहीं किया.
नजलू ने रुखसाना से कहा, “मैं तुम्हारे चारों बच्चों को अपनाऊंगा. तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को बहुत अच्छी तरह से रखूंगा.”
रुखसाना उस की बातों में आ गई. रुखसाना ने पति की मौत के बाद जो धक्के खाए थे, उस से उसे ऐसा लगा था कि बिना सहारे के एक औरत का जीवन बहुत कठिन है. नजलू उसे अच्छा लगा था. नजलू की मीठी बातों के जाल में रुखसाना फंस गई थी.
नजलू के साथ रहने लगी लिवइन रिलेशन में
रुखसाना ने तय कर लिया था कि वह नजलू के साथ रहेगी. वह उस के कमरे पर आनेजाने लगा. लव अफेयर के बाद रुखसाना और नजलू खान के बीच अवैध संबंध बन गए तो दोनों लिवइन में साथ रहने लगे. रुखसाना ने नजलू खान को अपना तनमन सब समर्पित कर दिया. नजलू से रुखसाना उम्र में भले ही 6 साल बड़ी थी, मगर वह नजलू को शारीरिक सुख दे कर जब तृप्त कर देती तो वह उस के आगेपीछे मंडराता रहता.
रुखसाना के नजलू के साथ लिवइन रिलेशन में रहने का पता जब मुन्नी को लगा, तब वह रुखसाना को समझाने लगी, “बेटी, तू गलत आदमी के साथ रह रही है. यह रिश्ता तोड़ डाल. मैं अपनी बिरादरी में अच्छा लडक़ा देख कर तेरा निकाह कर दूंगी. अगर तू निकाह करना चाहेगी तो. मगर ये रिश्ता तोड़ दे.”
सुन कर रुखसाना बोली, “अम्मी, ये बहुत भोला है. बहुत अच्छा है. इस से निकाह करूंगी तो मेरी और बच्चों की जिंदगी सुधर जाएगी.”
यह सुन कर मुन्नी कसमसा कर रह गई. मुन्नी ने नजलू को भी बहुत समझाया. मगर मुन्नी की बात न रुखसाना ने मानी और नजलू ने. नजलू ने रुखसाना पर ऐसा जादू किया था कि उस ने मां की एक नहीं सुनी और वह उस के साथ रहने लगी.
शुरू में नजलू काफी अच्छे से रहा. बच्चों के कपड़े धोता, खाना बना देता. रुखसाना फैक्ट्री में काम करने जाती तो पीछे बच्चों का ध्यान भी रखता था. बच्चों को मोबाइल तक ला कर दिया. रुखसाना यह सब देख कर नजलू के छलावे में आ गई.
एक साल तक तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन उस के बाद नजलू का बरताव बदल गया. वह रुखसाना पर हाथ उठाने लगा. जब रुखसाना अपनी मां के घर जाती तो शरीर पर कई जगह नील के निशान दिखते थे. मां पूछती कि ये निशान कैसे हैं?
रुखसाना बात छिपा जाती और कुछ न कुछ बहाना कर देती. लेकिन मुन्नी पास बैठ कर रुखसाना का हाथ अपने सिर पर रखवा कर कसम दिलाती थी. तब रुखसाना सच बताती, वह रोते हुए बताती थी, “अम्मी, गलती हो गई. मैं ने नजलू को पहचानने में गलती कर दी.”
मां ने रुखसाना को नजलू से दूरी बनाने को कहा
रुखसाना ने मां को बताया कि नजलू ने एक रोज सिर पर भी वार किया था. रुखसाना का सिर फूट गया था, टांके आए थे. एक बार रुखसाना का हाथ भी फ्रैक्चर कर दिया, तब पट्टी करवानी पड़ी थी. मुन्नी ने थाने में रिपोर्ट भी कराई थी कि नजलू मेरी बेटी को मारता है. नजलू रुखसाना को धमकी भी देता था कि तेरे बच्चों और भाई को मार दूंगा. रुखसाना अब नजलू की मारपीट व बच्चों, भाई को मारने की धमकी से डरने लगी थी और चुपचाप लिवइन पार्टनर के जुल्म सहती रही.
मुन्नी ने रुखसाना से कहा कि वह नजलू को छोड़ दे. तब रुखसाना ने मां से कहा था, “मां, अगर मैं ने नजलू को छोड़ा और इस ने मेरे परिवार को कुछ कर दिया तो मैं कैसे जी पाऊंगी.”
तब मुन्नी ने नजलू को समझाया था. तेरी उम्र कम है, रुखसाना का पीछा छोड़ दे. उस के छोटेछोटे 4 बच्चे हैं. लेकिन वह पीछा छोडऩे को तैयार ही नहीं था.