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इश्क और मुश्क कभी छिपाए नहीं रखे जा सकते. यही उन दोनों प्रेमियों के साथ हुआ था. किसी ने गोपी के पति धोलू तक बात पहुंचा दी थी. शांतिप्रिय व खुद में मस्त रहने वाले धोलू के लिए यह खबर विचलित करने वाली साबित हुई.

कोई राह नहीं सूझी तो उस ने अपने बड़े साले इंद्रपाल, जो दबंग प्रवृत्ति का था, के साथ यह बात साझा कर ली. अगले दिन इंद्रपाल माणकथेड़ी पहुंच गया.

उस ने अपनी बहन गोपी को समझाया और राजेंद्र की दुकान पर पहुंच गया. उस ने राजेंद्र को ओछी हरकत से बाज आने व भविष्य में देख लेने की धमकी दे डाली. वहां से लौटते समय इंद्रपाल गोपी का मोबाइल फोन भी छीन ले गया.

दोनों प्रेमियों के बीच कई महीने तक बात होनी तो दूर दर्शन तक दुर्लभ हो गए. होली के दिन रंग में सराबोर हुआ राजेंद्र गोपी तक एक मोबाइल फोन पहुंचाने में सफल हो गया था. अब सावधानी के साथ दोनों प्रेमी 3-4 दिनों के अंतराल से बात करने लगे थे. लेकिन यह बात किसी तरह इंद्रपाल को पता चल गई.

24 जून को इंद्रपाल के ममेरे भाई की शादी थी. बारात में इंद्रपाल, राधेश्याम, मांगीलाल, सोनू आदि दोस्तों की ड्राइवरों के साथ लड़ाई हो गई. उक्त सभी पुलिस से बचने के लिए अपने जीजा धोलू के पास जा पहुंचे. वहां पर बहन और राजेंद्र की हकीकत जान कर इंद्रपाल का खून खौल उठा. पर धोलू ने कोई लफड़ा नहीं करने की हिदायत दे डाली थी.

2 महीने गुजर चुके थे. राजेंद्र की गुस्ताखी उसे अशांत किए हुए थी. पर उसे कोई राह नहीं सूझ रही थी. उस की योजना थी कि राजेंद्र को किसी अज्ञात स्थान पर बुला कर उस की जबरदस्त पिटाई की जाए, पर राजेंद्र को बुलाने की कोई तरकीब नहीं सूझ रही थी.

अगले ही पल उस की आंखें चमक उठीं. संगरिया में उस की एक महिला दोस्त संजू धानक रहती थी. संजू इंद्रपाल के लिए शरीर तो क्या जान देने को भी तैयार रहती थी. उस ने उसी समय संजू को राजेंद्र का मोबाइल नंबर दे कर राजेंद्र को प्रेम जाल में फांसने को कह दिया.

इंद्रपाल ने संजू को यह भी समझा दिया कि वह राजेंद्र को यह विश्वास दिला दे कि गोपी उस की पक्की सहेली है और वह उसी के कहने पर खुद को राजेंद्र को सौंप रही है.

संजू ने उसी समय राजेंद्र को फोन किया. राजेंद्र ने काल रिसीव कर कहा, ‘‘हैलो, कौन बोल रहे हैं? किस से बात करनी है?’’

सामने नारी कंठ की मीठी व आकर्षक आवाज में जवाब मिला, ‘‘प्यारे जीजाजी, घबराओ मत. हम भी आप को चाहने वाले हैं.’’ राजेंद्र की घबराहट भांप कर उस ने खुलासा कर दिया, ‘‘देख यार जीजा, मैं संजू और गोपी 2 बदन एक जान हैं. उसी ने आप का नंबर मुझे दिया है. वह कई दिन आप से संपर्क नहीं कर पाएगी,’’ संजू ने कहा.

‘‘संजू, मैं तो डर गया था. गोपी मेरा कितना खयाल रखती है.’’

‘‘देखो जीजाजी, जब भी आप को महिला बदन की तलब लगे, मुझे घंटी मार देना. लेकिन याद रखना, मैं 10-12 दिन में एक बार ही मिल सकूंगी. मेरी मजबूरी है.’’ संजू ने राजेंद्र को फांसने के लिए पासा फेंक दिया था.

प्रणय निवेदन का पासा फेंकने में संजू वास्तव में गोल्ड मैडलिस्ट थी. हकीकत यह थी कि विवाहिता संजू जो एक बच्चे की मां थी, पति से खटपट होने के कारण 2 साल से संगरिया स्थित पीहर में रह रही थी. गुजरबसर के लिए वह एक कपड़े की दुकान पर सेल्सगर्ल के रूप में काम कर रही थी.

इंद्रपाल के प्लान के मुताबिक, संजू अपने फोन में रिकौर्ड हर बातचीत इंद्रपाल तक पहुंचा देती थी. अब राजेंद्र संजू की सैक्सी बातों से प्रभावित हो कर उस का गुलाम बन चुका था.

इंद्रपाल का प्लान अब सही राह पकड़ चुका था. वह अपनी बहन गोपी का बचाव करने के लिए संजू को मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा था. 16 जुलाई, 2022 को इंद्रपाल ने अपने दोस्तों राधेश्याम जीतराम, सोनू, मांगीलाल व एक नाबालिग प्रेम को अपनी ढाणी में बुला लिया.

इंद्रपाल ने संजू से कह दिया कि वह राजेंद्र को किसी तरह 17 जुलाई को रावतसर स्थित खेतरपाल मंदिर बुला ले. संजू ने ऐसा ही किया. उस ने 17 जुलाई की सुबह ही राजेंद्र को फोन कर कहा, ‘‘यार, आज मिलन का मूड है. मैं फ्री हूं. दोपहर तक रावतसर के खेतरपाल मंदिर पहुंच जाओ. वहां होटल में मौजमस्ती के लिए कमरा आराम से मिल जाता है.’’

हालांकि उस दिन राजेंद्र की शाम के समय एक समारोह की बुकिंग थी पर संजू से मिलने की चाहत में उस ने हां कर दी.

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