एसओ कमलेश शर्मा ने रवि को अस्पताल बुलाने के लिए एक सिपाही उस के घर भेजा. सिपाही रवि के घर पहुंचा तो वह वहां भी नहीं था.
पूछने पर घर वालों ने बताया कि वह रात से अस्पताल से घर नहीं लौटा है. सिपाही ने लौट कर यह बात एसओ को बता दी. कमलेश शर्मा सोच में पड़ गए कि जब रवि न अस्पताल में है और न ही घर पर, तो वह कहां गया?
इस का मतलब वह फरार हो चुका था. निस्संदेह पत्नी की हत्या के प्रयास के पीछे उस का भी हाथ था. उस के फरार होने से यह बात साफ हो गई कि माया ने जो बयान दिया था, वह सच था. अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए रवि की गिरफ्तारी जरूरी थी. हकीकत जानने के लिए पुलिस ने रवि के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई.
काल डिटेल्स से पता चला कि रवि और माया के बीच बातें होती रहती थीं. घटना वाले दिन भी रवि और माया के बीच काफी देर तक बात हुई थी. इस डिटेल्स से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि रवि ने अपनी प्रेमिका माया के साथ मिल कर पत्नी की हत्या का षडयंत्र रचा था. लेकिन वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया था.
बहरहाल, सुलेखा ठीक हो कर अस्पताल से घर आ गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी रवि पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा. इस बीच पुलिस ने माया को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. आखिरकार घटना के एक महीने बाद रवि उस वक्त पुलिस के हत्थे चढ़ गया, जब वह गया रेलवे स्टेशन से कहीं भागने के लिए ट्रेन के इंतजार में वेटिंग रूम में बैठा था.
पुलिस रवि को गिरफ्तार कर के थाने ले आई और सुलेखा की हत्या की योजना जानने के लिए उस से पूछताछ की. चाह कर भी रवि हकीकत को छिपा नहीं सका. उस ने पुलिस के सामने सच उगल दिया. पूछताछ में रवि ने अपनी और माया की प्रेम कहानी सिलसिलेवार बतानी शुरू की.
माया मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सूढ़ीटोला की रहने वाली थी. वह शादीशुदा और 3 बच्चों की मां थी. उस का पति मनोहर बाहर रह कर नौकरी करता था. वह 6 महीने या साल भर में एकाध बार ही घर आ कर कुछ दिन बिता पाता था.
माया भले ही 3 बच्चों की मां थी, लेकिन उस का शारीरिक आकर्षण खत्म नहीं हुआ था. उस का कसा हुआ शरीर और गोरा रंग पुरुषों को आकर्षित करने के लिए काफी था. सजसंवर कर माया जब घर से बाहर निकलती थी तो अनचाहे में लोगों की नजरें उस की ओर उठ ही जाती थीं.
कभीकभी रवि माया के घर के सामने से हो कर घाटबाजार स्थित अपनी दुकान पर जाया करता था. एकदो बार का आमनासामना हुआ तो दोनों की नजरें टकरा गईं. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित होने लगे. जल्दी ही वह समय भी आ गया, जब दोनों ने आकर्षण को प्यार का नाम दे दिया. इस प्यार को शारीरिक संबंधों में बदलते देर नहीं लगी. इस की एक वजह यह भी थी कि माया का पति परदेस में था और वह शारीरिक रूप से प्यार की प्यासी थी.
धीरेधीरे रवि और माया के प्यार के चर्चे पूरे सूढ़ीटोला में होने लगे. रवि घर से दुकान पर जाने की कह कर निकलता और पहुंच जाता माया के पास. जब तक वह दुकान पर पहुंचता, तब तक उस के दोनों भाई विक्की और शुक्कर दुकान पर पहुंच कर पिता के साथ काम में लग जाते.
रवि देर से पहुंचता तो पिता श्यामसुंदर राउत उस से देर से आने की वजह पूछते, लेकिन वह चुप्पी साध लेता था. इस से श्यामसुंदर और भी परेशान हो जाते थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि रवि को आखिर हो क्या गया. उन्होंने उस के देर से आने का रहस्य पता लगाने का फैसला किया.
आखिरकार श्यामसुंदर ने जल्द ही सच का पता लगा लिया. पता चला उन का बड़ा बेटा रवि एक शादीशुदा और 3 बच्चों की मां माया के प्रेमजाल में फंसा है. बेटे की सच्चाई जान कर वह परेशान हो गए.
उन्होंने रवि को माया से दूर रखने के बारे में सोचना शुरू किया. सोचविचार कर वह इस नतीजे पर पहुंचे कि रवि की शादी कर दी जाए तो वह माया को भूल जाएगा. उन्होंने रवि की शादी की बात चलाई तो बात बन गई. फलस्वरूप सुलेखा से रवि का रिश्ता तय हो गया.
रिश्ता तय हो जाने के बाद रवि जब कभी माया के घर के सामने से गुजरता तो उस से नजरें मिलाने के बजाय चुपचाप निकल जाता. रवि में अचानक आए बदलाव से माया परेशान हो गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक रवि को क्या हो गया, जो उस ने मुंह फेर लिया.
माया से रवि की जुदाई बरदाश्त नहीं हो पा रही थी. एक दिन वह रवि का रास्ता रोक कर उसे अपने घर ले आई. फिर उस ने रवि से पूछा, ‘‘तुम्हें अचानक ऐसा क्या हो गया जो मुझ से मुंह फेर लिया.’’
‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है माया.’’ रवि ने सहज भाव से कहा.
‘‘ऐसी कोई बात नहीं है तो अचानक मुझ से मुंह क्यों मोड़ लिया?’’
‘‘माया, अब हमारा मिलना संभव नहीं है.’’ रवि ने नजरें झुका कर कहा.
‘‘क्यों, संभव नहीं है हमारा मिलना? मैं तुम से कितना प्यार करती हूं, जानते तो हो. फिर हमारा मिलना क्यों नहीं संभव है?’’
“‘क्योंकि मेरे घर वालों ने मेरी शादी करने का फैसला कर लिया है.’’
रवि का जवाब सुन कर माया के होश उड़ गए. माथे पर हाथ रख कर वह बिस्तर पर जा बैठी. कुछ देर दोनों के बीच खामोशी छाई रही.
उस खामोशी को माया ने ही तोड़ा, ‘‘आखिर क्या समझ रखा है तुम ने मुझे? मैं कोई खिलौना नहीं हूं कि जब चाहा, खेला और जब चाहा छोड़ दिया. मेरी जिंदगी बरबाद कर के तुम किसी और के साथ शादी रचाओगे? तुम ने यह कैसे सोच लिया कि मैं ऐसा होने दूंगी? मेरे जीते जी ऐसा हरगिज नहीं हो सकता.’’