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आरोपियों की निशानदेही पर शव बरामद

पुलिस ने हत्यारोपी की निशानदेही पर कार, लोहे की रौड और सुहेल की बाइक भी बरामद कर ली थी. सुहेल की हत्या कर शव मुरादाबाद के थाना क्षेत्र छजलैट से बरामद किया गया था. उसी कारण उस के शव का पोस्टमार्टम भी मुरादाबाद में ही किया गया था. पोस्टमार्टम के बाद उस का शव उस के घर वालों को सौंप दिया गया.

पुलिस ने दिनरात एक करते हुए इस मर्डर केस का खुलासा किया तो लोग खुलासे पर भी सवाल उठाने लगे थे. इस खुलासे को ले कर लोगों को मत था कि इस मर्डर में 2 नहीं बल्कि कई लोग मौजूद रहे होंगे.

इसी बात को ले कर सुहेल के घर वालों ने कोतवाली के सामने ही धरनाप्रदर्शन शुरू कर दिया था. उन लोगों की मांग थी कि इस मामले में लिप्त अन्य लोगों को भी शीघ्र गिरफ्तार किया जाए.

धरनाप्रदर्शन को देखते हुए माहौल खराब होने की आशंका के चलते आसपास के थानों और चौकियों से पुलिस फोर्स बुला ली गई. इस दौरान एसपी (क्राइम) डा. जगदीश चंद्र, एसपी (सिटी) हरवंश सिंह व सीओ बलजीत सिंह भी कोतवाली में मौजूद रहे. इस केस के खुलासे के बाद आरोपी भरत आर्या को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया.

भरत आर्या को जेल भेजने के बाद पुलिस इस अपराध में शामिल दिनेश टम्टा की खोज में लग गई. वह भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया गया.

पूछताछ में उस ने अपना अपराध स्वीकारते हुए बताया कि इस मामले में गांव चोरपानी निवासी योगेश बिष्ट उर्फ यूवी बिष्ट व मनोज सिंह उर्फ मुन्नू नेपाली भी शामिल थे.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने तीसरे आरोपी योगेश बिष्ट को भी गिरफ्तार कर लिया. जबकि चौथा आरोपी मुन्नू नेपाली घर से फरार हो गया था.

सुहेल की दुकान पर भरत करता था काम

जिंदगी में कभीकभी ऐसा चक्रव्यूह भी बन जाता है जिस में घिर कर इंसान को अपनी जिंदगी भी दांव पर लगाने पर मजबूर होना पड़ता है. यह कहानी भी एक मजदूर से फौजी बनने तक की ऐसी ही कहानी है. जिस अपराध के कारण उस का जीवन संकट में फंस गया.

उत्तराखंड के जिला नैनीताल के कस्बा रामनगर के चोरपानी बुद्ध विहार कालोनी में हरीश राम अपने परिवार के साथ रहते हैं. वह पेशे से लुहार हैं. हरीश राम के 5 बच्चों में 2 बेटियां और 3 बेटे थे. हरीश राम जैसेतैसे लुहार का काम कर के अपने बच्चों का पालनपोषण कर पाते थे.

बच्चे कुछ समझदार हुए तो बाप के काम में हाथ बंटाने लगे थे. जीतोड़ मेहनत करने के बाद हरीश राम ने सब से बड़े बेटे और उस के बाद एक बेटी की शादी कर दी. 2 बच्चों की शादी के बाद तीसरे नंबर की बेटी पूजा और भरत आर्या का नंबर था. पूजा और भरत आर्या ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी. इस के बाद हरीश राम ने पूजा की पढ़ाई छुड़ा दी थी.

भरत आर्या का शुरू से ही फौजी बनने का सपना था. लेकिन उस नौकरी के लिए उस की गरीबी आड़े आ रही थी. जिसे पूरा करने के लिए उसे काफी मेहनत की जरूरत थी.

हरीश राम की दुकान के पास ही सुहेल सिद्दीकी ने काफी समय पहले स्टेशनरी की दुकान खोल रखी थी. सुहेल का परिवार रामनगर शहर में ही रहता था. वह 5 भाइयों में तीसरे नंबर का था.

हरीश राम के पास इतना काम नहीं था कि वह अपने सभी बच्चों को दुकान पर रख सकें. घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए भरत आर्या ने सुहेल की दुकान पर काम कर लिया था. साथ ही उस ने आर्मी में जाने के लिए तैयारी भी करनी शुरू कर दी थी.

पूजा की सुहेल से बढ़ गईं नजदीकियां

भरत आर्या का घर दुकान से कुछ दूर था, इसलिए पूजा ही भरत और पिता का खाना पहुंचाती थी. पूजा देखनेभालने में खूबसूरत और पढ़ीलिखी थी. वह जब कभी खाना ले कर आती तो सुहेल की दुकान पर काम में उस का हाथ बंटाने लगती थी.

सुहेल उस वक्त कुंवारा था. जब कभी पूजा उस की दुकान पर आती तो उस की नजरें उसी पर गड़ी रहती थीं. लेकिन पूजा ने उसे कभी भी ऐसी नजरों से नहीं देखा था.

लेकिन सच्चाई तो यह है कि लोहे को लोहे से घिसते रहो तो एक दिन ऐसा भी

आता है कि लोहे में भी निशान बन जाता है. सुहेल ने पूजा को चाहत भरी निगाहों से देखना शुरू किया तो वह उस की मंशा समझ गई.

पूजा एक पढ़ीलिखी और समझदार थी. वह यह भी जानती थी कि सुहेल मुसलमान है. लेकिन जब किसी के प्रति चाहत का बीज अंकुरित हो जाता है तो उसे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. यही पूजा के साथ हुआ.

पूजा उस वक्त नाबालिग थी. लेकिन सुहेल के प्यार की भावनावों में बह कर उस ने कांटों भरा रास्ता चुन लिया था. उसी वक्त भरत आर्या ने आर्मी की तैयारी करने के लिए सुहेल की दुकान का काम छोड़ दिया. फिर उस की जगह पर पूजा ही काम करने लगी थी. भरत आर्या के दुकान से हटते ही सुहेल की तो जैसे चांदी कट गई. अपने भाई के हटते ही पूजा भी टेंशन फ्री हो गई थी.

सुहेल ने मौके का फायदा उठाते हुए पूजा को पूरी तरह से अपने मोहपाश में फांस लिया था. दोनों के बीच प्यार का बीज अंकुरित होते ही प्यार की बेल भी हरीभरी होने लगी थी. पूजा गरीब घर से थी, जबकि सुहेल खातेपीते परिवार से. यही कारण रहा कि पूजा सुहेल के पीछे पागल हो गई थी. सुहेल ने पूजा के साथ शादी करने का वादा करते हुए उसे हसीन सपने दिखाए तो उस ने भी उस के साथ जीनेमरने की कसमें खाई थीं.

सुहेल ने जीवन भर साथ निभाने का किया था वायदा

भावनाओं की नींव पर जमे प्यार के रिश्तों की डोर जितनी मजबूत होती है, उस से कहीं ज्यादा कच्चे धागे की भांति कमजोर भी. यही कारण था कि पूजा ने सुहेल पर पूरा विश्वास किया और उस के साथ जीवन बिताने के लिए वह अपने परिवार से भी टकराने को तैयार हो गई थी. पूजा के घर वालों ने सुहेल के प्रति उस की दीवानगी देखी तो उसे समझाने की कोशिश की.

पूजा का भाई भरत आर्या ही सब से ज्यादा उस के संपर्क में था. क्योंकि उसे पूजा से बहुत प्यार था. कई बार उस ने अपने परिवार की इज्जत को देखते हुए उसे समझाने की कोशिश की. लेकिन उस के समझाने का भी उस पर कोई असर नहीं हुआ. सुहेल के प्रति बढ़ी प्यार की दीवानगी के सामने भाई के प्यार की नसीहत भी काट खाने को दौड़ने लगी थी.

सुहेल ने पूजा पर जादू ही ऐसा कर रखा था कि उस वक्त उसे उस के अलावा कोई नजर नहीं आता था. जब उसे लगने लगा कि पूजा पूरी तरह से उस के प्यार के जाल में फंस चुकी है तब वह अपनी हकीकत पर उतर आया.

एक दिन सुहेल ने पूजा को साथ लिया और एक होटल में पहुंच गया. पूजा ने सोचा कि शायद वह नाश्तापानी करने जा रहा होगा. होटल जा कर उसे पता चला कि उस ने पहले से ही वहां पर एक रूम बुक करा रखा है.

रूम में पहुंचते ही पूजा ने उस से सवाल किया, ‘‘सुहेल, यह क्या? आप मुझे होटल में किस लिए लाए हो?’’

‘‘पूजा, क्या तुम्हें अभी भी मुझ पर विश्वास नहीं? हम दोनों ने एक साथ मिल कर साथ जीनेमरने की कसमें खाई हैं तो फिर तुम परेशान क्यों हो? हम दोनों को अब कोई भी जुदा नहीं कर सकता. फिर हमें एकांत में मिलने से एतराज क्यों? हम थोड़ा नाश्तापानी कर के होटल छोड़ कर चले जाएंगे.’’

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