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जब जब इश्क की कलम से दिल के कागज पर मोहब्बत की इबादत लिखी गई है, तबतब मोहब्बत करने वाले फना हुए हैं. इस तरह की कहानी में तब और दिलचस्प मोड़ आया है, जब वह त्रिकोण प्रेम पर आधारित हुई है और प्रेम त्रिकोण की कहानी में अकसर खूनी खेल सामने आता है. कुछ ऐसा ही इस त्रिकोण प्रेम में भी हुआ.

8 दिसंबर, 2017 की अलसाई सुबह चटख धूप के साथ खिली. लोग अपने घरों से निकल कर अपनी दिनचर्या में रम रहे थे.

उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के बिलरियागंज थाने के भदाव गांव के कुछ लोग अपने खेतों की तरफ जा रहे थे. तभी गांव से बाहर कच्ची सड़क से दाईं ओर करीब 500 मीटर की दूरी पर कुदारन तिवारी के खेत में सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार लावारिस हालत में खड़ी दिखी. उत्सुकतावश लोग उस कार की ओर चले गए कि सुबहसुबह खेत में किस की कार खड़ी है.

लोगों ने जब कार के भीतर झांक कर देखा तो भीतर कोई नहीं था. कार का नंबर था यूपी53सी 3262. कार से कुछ दूरी पर एक युवक की लाश पड़ी थी. उस के सिर के घाव से लग रहा था कि किसी ने सिर में गोली मार कर उस की हत्या की है. उस का चेहरा खून से सना था.

मृतक काले रंग की पैंट और नीलेपीले रंग की धारीदार डिजाइन वाली जैकेट पहने था. उसके पैरों में कोई चप्पल या जूते नहीं थे. चेहरे पर दाढ़ी थी. वह शक्लसूरत और पहनावे से किसी अच्छे परिवार का लग रहा था.

लाश पड़ी होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांव के और लोग भी वहां जुटने लगे. उसी भीड़ में से किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. चूंकि मामला बिलरियागंज थाने का था, इसलिए पुलिस कंट्रोलरूम ने बिलरियागंज थाने को घटना की इत्तला दे दी. लाश मिलने की खबर पा कर बिलरियागंज के थानाप्रभारी विजय प्रताप यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

घटनास्थल पहुंचने के बाद थानाप्रभारी ने अपने आला अधिकारियों को भी मामले की सूचना दे दी. इस के अलावा उन्होंने फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी सूचना दे कर मौके पर बुला लिया.

खबर पा कर एसपी अजय कुमार साहनी, एसपी (देहात) एन.पी. सिंह, सीओ (सगड़ी) सुधाकर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने कार के नंबर की जांच की तो वह नंबर गोरखपुर आरटीओ का था.

जांचपड़ताल से पता चला कि वह कार गोरखपुर के दीपक सिंह के नाम से रजिस्टर्ड थी. इस से यही अंदाजा लगाया गया कि मृतक गोरखपुर का रहने वाला होगा. फिर पुलिस ने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो उस की जेब से सगड़ी के बाबू शिवपत्तर राय स्मारक कालेज का एक परिचयपत्र मिला. उस परिचयपत्र से उस की शिनाख्त एमए के छात्र विभांशु प्रताप पांडेय के रूप में हुई, जिस में उस का पता गांव भौवापार थाना बेलीपार लिखा था.

कार की तलाशी लेने पर डिक्की में उल्टी और खून के धब्बे मिले. कार में एक जोड़ी लेडीज चप्पल पड़ी मिली. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा था कि बदमाश हत्या कहीं और कर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे थे, लेकिन कार खेत में फंस जाने की वजह से दूर नहीं भाग सके और उस की लाश फेंक कर फरार हो गए. इस का मतलब साफ था कि कार में कोई महिला भी सवार थी. वह कौन थी? यह मामला और भी पेचीदा हो गया.

पुलिस इस मामले को प्रेम संबंधों से जोड़ कर देखने लगी थी. कार में लेडीज चप्पल और उल्टी ने गुत्थी बुरी तरह उलझा कर रख दी थी. विभांशु के मुंह से झाग निकले थे. वह झाग किसी जहरीले पदार्थ के सेवन से थे या किसी और के, यह बात जांच के बाद ही पता चलना था.

मौके की जरूरी काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दी. कागजी काररवाई पूरी करने के पहले पुलिस ने घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दे दी थी. सूचना मिलने के बाद वह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

मृतक के बड़े भाई जोकि पेशे से एक वकील थे, उन की तहरीर पर पुलिस ने रुचि राय पुत्री अरविंद राय, ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय और उस के भाई सत्यम राय सहित 8 अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

सभी आरोपी कोतवाली जीयनपुर के बांसगांव के निवासी थे. घनश्याम पांडेय का आरोप था कि भाई को उस की प्रेमिका रुचि राय ने फोन कर के बुलाया था और उस की हत्या करवा दी. रिपोर्ट नामजद लिखाई गई थी, इसलिए पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी.

चूंकि वादी घनश्याम पांडेय एक वकील के साथसाथ रसूखदार और ऊंची पहुंच वाला था, पुलिस की थोड़ी सी भी चूक कानूनव्यवस्था बिगाड़ सकती थी, इसलिए एसपी अजय कुमार साहनी ने सीओ सुधाकर सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम को निर्देश दे दिए थे कि नामजद आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए.

पुलिस टीम ने आरोपियों के घर दबिश डाली तो वह अपने ठिकानों पर नहीं मिले. उन के न मिलने पर पुलिस की समस्या और बढ़ गई. उन की तलाश के लिए पुलिस ने अपने सभी मुखबिरों को भी अलर्ट कर दिया.

9 दिसंबर, 2017 की सुबह थानाप्रभारी विजय प्रताप यादव को एक मुखबिर ने आरोपी ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय के बारे में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. उस से मिली जानकारी के बाद थानाप्रभारी अपनी टीम के साथ सगड़ी-खालिसपुर मार्ग पर पहुंच गए. श्यामनारायण वहीं खड़ंजे के पास खड़ा मिल गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. वह वहां से कहीं भागने की फिराक में था.

तलाशी लेने पर उस के पास से एक पिस्टल .32 बोर व 2 जिंदा कारतूस के अलावा एक कारतूस का खोखा भी मिला. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई, उस ने विभांशु की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया.

पुलिस ने उस के पास से जो पिस्टल बरामद किया था, उसी से उस ने विभांशु की हत्या की थी. उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह प्रेम त्रिकोण वाली निकली—

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