कश्मीर के किसी भी हिस्से में पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी संख्या में मौजूदगी वैसे तो कोई नई बात नहीं है. लेकिन दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में 11 जनवरी, 2020 की सुबह से ही पुलिस की गहमागहमी अन्य दिनों से कुछ ज्यादा ही थी. जगहजगह बैरीकेड लगे थे, जहां सीआरपीएफ के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस की मौजूदगी बता रही थी कि पुलिस किसी खास शख्स की तलाश में है.
जिले में हर बैरीकेड पर तमाम वाहनों की सघनता से जांच हो रही थी. हर आनेजाने वाले वाहन और उस में सवार लोगों की पहचान के साथ तलाशी ली जा रही थी. हर नाके पर जम्मूकश्मीर पुलिस का कोई न कोई बड़ा अफसर मौजूद था.
करीब सवा 1 बजे का वक्त था, जब काजीकुंड के पास मीर बाजार में तेजी से आ रही एक सफेद रंग की आई-10 कार को सुरक्षा बलों ने रुकने पर मजबूर कर दिया. दरअसल, सुरक्षा बलों ने बैरीकेड कुछ इस तरह लगा रखा था कि तेजी से दौड़ रही कार के ड्राइवर को न चाहते हुए भी कार रोकनी पड़ी.
‘‘सर, क्या बात है बड़ी तेजी से गाड़ी चला रहे थे, कोई गड़बड़ है क्या?’’ ड्राइविंग सीट के समीप पहुंचे एक सुरक्षाकर्मी ने पूछा.
‘‘कोई गड़बड़ नहीं है डियर, डिपार्टमेंट का आदमी हूं जरा जल्दी में था, यहां इतना बड़ा नाका… कोई खास बात है क्या?’’ ड्राइविंग सीट पर बैठे सिख ने थोड़ा रूआब झाड़ते हुए कहा.
‘‘डिपार्टमेंट के आदमी हैं तो आप को पता ही होगा कि कश्मीर में कुछ खास न भी हो तो भी इतनी सिक्युरिटी जरूरी है.’’ सरदारजी से मुखातिब हुए जम्मूकश्मीर पुलिस के उस अधिकारी ने कहा और बोला, ‘‘आप जरा नीचे आइए, गाड़ी की तलाशी लेनी है और गाड़ी में ये तीनों जनाब कौन हैं?’’
‘‘आप को सीनियर से बात करने की तमीज नहीं है क्या… मैं ने बताया ना कि डिपार्टमेंट का आदमी हूं, ये है मेरा कार्ड डिप्टी एसपी फ्राम एंटी हाइजैकिंग स्क्वायड.’’ नाके पर खड़े पुलिस अफसर ने जब गाड़ी चला रहे सरदारजी की गाड़ी की तलाशी लेने की बात की तो वे भड़क गए और मजबूरी में उन्हें अपना परिचय देना पड़ा और विश्वास दिलाने के लिए पुलिस विभाग का अपना परिचय पत्र भी दिखाया.
सरदारजी की गाड़ी रुकवाने वाले कश्मीर पुलिस के अफसर से वाकई ओहदे में बड़े अफसर निकले, लिहाजा उस ने कार्ड देखने के बाद एक कदम पीछे हटते हुए जोरदार सैल्यूट मारा, ‘‘सौरी सर, लेकिन आप को थोडा कष्ट होगा. ऊपर से और्डर है कि हर गाड़ी की तलाशी लेनी है.’’
पूरा सम्मान देने के बावजूद उस बावर्दी अफसर ने जब गाड़ी की तलाशी लेने की जिद की तो सरदारजी का पारा हाई हो गया. वे ड्राइविंग सीट छोड़ कर बाहर निकल आए और चिल्लाते हुए पूछा, ‘‘कौन है वो ऊपर वाला जिस ने ये और्डर दिया है? आप लोगों को डिपार्टमेंट का भी लिहाज नहीं है.’’
‘‘हम ने दिया है ये और्डर, आप को कोई ऐतराज है.’’ चंद कदम की दूरी पर कुछ सुरक्षाकर्मियों के साथ बातचीत कर रहे दक्षिण कश्मीर के डीआईजी अतुल कुमार गोयल ने सरदारजी को अपने स्टाफ से बहस और ऊंची आवाज में बात करते देखा तो उन्होंने वहां पहुंचते ही कहा.
सामने खड़े अधिकारी की वरदी पर लगे सितारे देख कर खुद को डीएसपी बताने वाले सरदारजी अचानक सकपका गए और बोले ‘‘नो.. सर, नो.. सर.’’ कहते हुए उन्होंने डीआईजी साहब को जोरदार सैल्यूट मारा.
‘‘कहां पोस्टिंग है आप की?’’ डीआईजी अतुल गोयल ने पूछा तो खुद को डीएसपी बताने वाले सरदार ने बताया कि उस का नाम देविंदर सिंह है और वह श्रीनगर में इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर जम्मूकश्मीर पुलिस के एंटी हाईजैकिंग स्क्वायड में डीएसपी है. डीएसपी देविंदर सिंह ने बताया कि इस समय वह छुट्टी पर है और अपनी पहचान वाले दोस्तों के साथ जम्मू जा रहे थे. डीएसपी देविंदर सिंह की गाड़ी के अगले शीशे पर जम्मूकश्मीर पुलिस अफसरों को मिलने वाला स्टीकर भी लगा था.
‘‘सौरी डीएसपी, हमें गाड़ी की तलाशी लेनी है.’’ डीआईजी अतुल ने पूरा परिचय जानने के बाद भी जब देविंदर सिंह से कहा तो देविंदर सिंह बोला, ‘‘सर, मैं एक औपरेशन पर हूं आप ये सब कर के मेरा सारा खेल खराब कर दोगे.’’
जब तक डीएसपी देविंदर सिंह डीआईजी अतुल गोयल से ये सब बात कर ही रहे थे कि तभी वहां तेजी से 2 बड़ी प्राइवेट गाडि़यां आ कर रुकीं, जिन में से एक के बाद एक सादे लिबास में हथियारबंद कई लोग उतरे और उन्होंने डीएसपी देविंदर सिंह की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया.
गाड़ी में से उतरे एक शख्स ने डीआईजी अतुल गोयल को सैल्यूट किया और फिर उन के पास जा कर कान में धीमे से कुछ फुसफुसाया. जिस के बाद अचानक डीआईजी अतुल गोयल के तेवर कड़क हो गए, ‘‘बाहर निकालो सब को.’’
डीएसपी की कार में मिले आतंकी
डीआईजी का इतना बोलना था कि बिजली की गति से सुरक्षाकर्मियों ने डीएसपी देविंदर सिंह की गाड़ी में सवार तीनों लोगों को तेजी से खिड़की खोल कर बाहर निकाल लिया. उन के चेहरे पर ढके गर्म मफलर व सिर पर पहनी टोपियां हटवाईं तो वहां खड़े हर सुरक्षाकर्मी तथा पुलिस वालों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं.
क्योंकि उन में सें एक शख्स का चेहरा काफी हद तक नावीद बाबू से मिलताजुलता था. नावीद बाबू कोई ऐरागैरा शख्स नहीं था, बल्कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का कश्मीर का कमांडर था. कई संगीन हत्याकांडों और आतंकवादी घटनाओं में पुलिस को उस की तलाश थी और उस की गिरफ्तारी पर सुरक्षा एजेंसियों ने 20 लाख रुपए का ईनाम भी घोषित किया हुआ था.
गाड़ी की तलाशी ली गई तो उस में से एक हैंडग्रेनेड, एक एके 47 राइफल भी मिली. देविंदर सिंह की गाड़ी में बैठे तीनों लोगों से उन की पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, तो उन की पहचान सैय्यद नवीद अहमद उर्फ नावीद बाबू, उन के सहयोगी आसिफ राथेर और इरफान के रूप में हुई.
‘‘तुम एक आतंकवादी को अपनी गाड़ी में साथ ले कर घूम रहे हो. शर्म नहीं आती… आखिर तुम्हारे इरादे क्या हैं? किस गेम को खेल रहे हो तुम?’’ नावीद अहमद को पहचानते ही डीआईजी अतुल गोयल का पारा चढ़ गया. उन्होंने उसी समय डीएसपी देविंदर सिंह को एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया.
डीआईजी अतुल कुमार के इशारे पर डीएसपी देविंदर सिंह और उस के साथ कार में मौजूद तीनों लोगों की तलाशी लेने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. पुलिस ने उन की गाड़ी भी कब्जे में ले ली. सभी को कुलगाम की मीर बाजार कोतवाली में ले जाया गया.
थाने में लाते ही डीएसपी देविंदर सिंह समेत हिरासत में लिए गए तीनों लोगों से पूछताछ शुरू हो गई. कई घंटे की पूछताछ के बाद जो सनसनीखेज खुलासा हुआ, उस ने सभी के पांव के नीचे से जमीन जैसे खिसका दी. किसी को पता भी नहीं था कि जम्मूकश्मीर पुलिस की आस्तीन में एक ऐसा सांप पल रहा है, जो आतंकवादियों से मिला हुआ है.
डीआईजी अतुल गोयल ने देविंदर सिंह और उस के साथ गाड़ी में साथ मौजूद दोनों आतंकवादियों से हुई पूछताछ की जानकारी तत्काल कश्मीर जोन के आईजी विजय कुमार को दी. जिन्होंने तत्काल जम्मूकश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह को इस की सूचना दी. डीजीपी के निर्देश पर पुलिस की एक टीम ने श्रीनगर के बादामी बाग इलाके के इंदिरानगर में रहने वाले डीएसपी देविंदर सिंह के निर्माणाधीन बंगले पर छापा मारा.
देविंदर सिंह के घर से मिले हथियार और नकदी
वहां से 2 एके 47 राइफलें और 2 पिस्तौलों के साथ कुछ महत्त्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए . इस से साफ हो गया कि देविंदर सिंह का आतंकवादियों के साथ न सिर्फ गठजोड़ है बल्कि वह उन्हें पनाह देने का काम भी करता है.
तलाशी में सेना की 15वीं कोर का पूरा नक्शा, साढ़े 7 लाख रुपए नकद भी बरामद किए गए . देविंदर सिंह के निमार्णाधीन मकान की तलाशी में जो दस्तावेज बरामद किए गए, उस से आतंकवादियों के उस के यहां पनाह लेने के पर्याप्त सबूत थे.
इधर कुलगाम पुलिस को अब तक हुई पूछताछ में पता चल चुका था कि देविंदर सिंह के साथ कार में जो 3 लोग सवार थे, उन में से एक नावीद अहमद शाह उर्फ नावीद बाबू दक्षिणी कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के सब से वांछित कमांडरों में से एक था. पुलिस को काफी समय से उस की तलाश थी. खासतौर से 2018 में सेब बागानों में काम करने वाले गैरकश्मीरी लोगों की हत्या में उस का नाम आने के बाद से पुलिस व सुरक्षाबल सरगर्मी से उस की तलाश में जुटे थे और इसी मामले में उस पर 20 लाख का ईनाम घोषित किया गया था.
बताया जाता है कि नावीद अहमद उर्फ नावीद बाबू पहले जम्मूकश्मीर पुलिस में कांस्टेबल था, लेकिन 2017 में वह पुलिस के 4 हथियार ले कर भाग गया था और जा कर हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया था.