बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी करने वाली सौफ्टवेयर इंजीनियर निशा की उम्र 45 साल हो गई थी. लेकिन करिअर बनाने के चक्कर में अभी तक उन का विवाह नहीं हो पाया था. पहले पढ़ाई, फिर नौकरी और व्यवस्थित होने के चक्कर में वह विवाह के बारे में सोच ही नहीं पाईं. जब सोचा, तब तक इतनी उम्र हो चुकी थी कि लडक़ा मिलना आसान नहीं था.
घर वाले तो पहले ही हथियार डाल चुके थे. क्योंकि जब वह विवाह के लिए कह रहे थे, तब निशा करिअर का हवाला दे कर मना करती रही. अब इस उम्र में वे उस के लिए कहां लडक़ा ढूंढते. इसलिए उन्होंने तो पहले कह दिया था कि जब तुम्हारी इच्छा हो, तब विवाह कर लेना.
अब निशा को विवाह के बारे में खुद ही फैसला लेना था. वह अपने लिए कहां लडक़ा खोजने जाती. इसलिए उस ने अपना बायोडाटा और फोटो मैट्रीमोनियल साइट शादी डौट कौम पर डाल दिया था, साथ ही वह खुद भी शादी डौट कौम की साइट खोल कर लडक़ों की प्रोफाइल देखा करती थी कि शायद उस के लायक कोई लडक़ा मिल ही जाए.
निशा को महेश लगा कुछ खास
एक दिन उस की नजर एक प्रोफाइल पर पड़ी, जो उसे जम गई. लडक़ा डाक्टर था हड्डी रोग विशेषज्ञ, नाम था महेश केबी नायक. उम्र 35 साल, देखने में भी काफी स्मार्ट था. मैसूर का रहने वाला महेश उसे जम गया. लडक़ा उसे पसंद आया तो साइट के जरिए निशा ने उस से संपर्क किया. यह अगस्त, 2022 की बात है.
इस के बाद दोनों में बातें होने लगीं. बातचीत से निशा को लगा कि लडक़ा ठीकठाक है. जब वह मानसिक रूप से पूरी तरह संतुष्ट हो गई तो उस ने महेश नायक से शादी की बात की. दूसरी ओर महेश नायक भी विवाह के लिए तैयार था. जब दोनों को लगा कि सब ठीक है तो उन्होंने मिलने की बात की.
तब डाक्टर साहब ने कहा, “मेरा घर मैसूर में है, मैं यहीं रहता हूं. मेरी क्लीनिक भी यहीं है. मैं तो क्लीनिक बंद कर के आ नहीं सकता. क्या आप मैसूर आ सकती हैं?”
“क्यों नहीं, विवाह करना है तो मैसूर तो क्या, जहां आप बुलाओगे, वहां आना होगा. मैं बिलकुल मैसूर आ सकती हूं. आप से मुलाकात भी हो जाएगी और इसी बहाने मैसूर भी घूम लूंगी.” निशा ने कहा.
इस के बाद निशा मैसूर पहुंच गई. महेश ने उस की खूब आवभगत की. दोनों खूब घूमे, खूब बातें कीं. महेश ने निशा को मैसूर के पर्यटक स्थलों और प्रसिद्ध स्थानों को दिखाया. उसे अपना घर भी दिखाया, जो किराए का था. पर महेश ने उस घर को अपना बताया था. इस के बाद रिश्ता पक्का हो गया. यह 28 दिसंबर, 2022 की बात है.
निशा बेंगलुरु लौट आई. उस ने यह बात अपने घर वालों को बताई तो घर वाले भी खुश हुए और बेटी की शादी की तैयारी में लग गए. उधर महेश भी विवाह की तैयारी में लग गया. निशा विशाखापट्टनम की रहने वाली थी और बेंगलुरु में नौकरी करती थी. इसलिए विवाह विशाखापट्टनम से ही होने वाला था. दूसरी ओर महेश ने निशा को पहले ही बता दिया था कि उस के मांबाप नहीं है. केवल एक बड़ा भाई और कजिन हैं.
शादी के बाद महेश ने मांगे 70 लाख रुपए
विवाह के कार्ड वगैरह छप गए. विवाह की तारीख थी 28 जनवरी, 2023 तय हो गई. तब डा. महेश केबी नायक अपने बड़े भाई, कजिन और रिश्तेदारों के अलावा कुछ दोस्तों के साथ 28 जनवरी को विशाखापट्टनम पहुंच गया. विशाखापट्टनम के शानदार होटल में डाक्टर साहब और निशा की शादी होनी थी.
निशा के परिवार वाले, रिश्तेदार और दोस्तों की भीड़ थी, जबकि महेश की तरफ से गिनेचुने लोग ही बाराती के रूप में थे. यह बात डा. महेश ने पहले ही बता दी थी, इसलिए किसी ने भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया. अगर दिया भी तो किसी और को इस से क्या मतलब था? विवाह में आया, खायापिया और जो उपहार देना था, दे कर चला गया.
अगले दिन 29 जनवरी को विदा हो कर निशा पति के घर यानी ससुराल आ गई. महेश निशा को अपार्टमेंट के उसी फ्लैट में ले आया था, जिसे उस ने अपना बताया था. जबकि अपने पुश्तैनी मकान के बारे में उस का कहना था कि उस के पुश्तैनी मकान को ले कर भाइयों में झगड़ा चल रहा है. इसलिए जब तक फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें इसी फ्लैट में रहना होगा. निशा को भला क्या ऐतराज होता. पति जहां रखेगा, वह वहीं रहेगी. फिर उस फ्लैट में कोई खराबी भी नहीं थी, जो निशा ऐतराज जताती. बहुत लोग फ्लैटों में रहते हैं.
वह पति के साथ आराम से रहने लगी और शादी एंजौय करने लगी. ही बीते थे कि महेश कहने लगा कि उसे अपना खुद का क्लीनिक बनवाना है. इस के लिए वह उसे 70 लाख रुपए उधार दे दे. पर निशा ने पैसे देने से मना करते हुए कहा कि उस के पास इतने पैसे नहीं है. इसलिए वह उसे पैसे नहीं दे सकती. क्लीनिक ही बनवाना है तो बाद में बनवा लेना.
जब महेश को निशा से पैसे नहीं मिले तो वह कहने लगा कि उस के पास पैसे नहीं हैं तो अपने घर वालों से मांग ले. इस के लिए वह उस पर दबाव भी डालने लगा. पर निशा मायके वालों से भी पैसे लाने को तैयार नहीं हुई. इस से महेश को गुस्सा आ गया और उस ने निशा को धमकी दी. निशा का कहना था कि घर वालों ने शादी में पैसे खर्च किए, इतना दहेज दिया, फिर भी वह पैसे मांग रहा है.
यह सब चल ही रहा था कि एक दिन डाक्टर साहब ने कहा, “एक बहुत जरूरी सर्जरी के लिए मुझे मुंबई जाना है.”
“ठीक है, आप जाइए, पर लौटेंगे कब?”
“काम होते ही मैं लौट आऊंगा. पर एक बात का खयाल रखना. अगर कोई ढूढने आए या मेरे बारे पूछने आए तो उसे कुछ बताना मत कि मैं कहां गया हूं. क्योंकि जानती ही हो कि प्रौपर्टी को ले कर भाइयों में झगड़ा चल रहा है. करोड़ों की प्रौपर्टी का मामला है, कुछ भी हो सकता है. क्या पता क्या हो जाए.
“आज के समय में किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता, भले ही वह भाई ही क्यों न हो. और हां, पुलिस भी आ सकती है, क्योंकि मुकदमा तो चल ही रहा है, लोग पुलिस से भी पकड़वा कर जेल भिजवा सकते हैं. इसलिए अगर पुलिस आए तो उस से भी मेरे बारे में कुछ मत बताना.”
निशा पढ़ी लिखी समझदार थी. उस ने कहा, “ठीक है, आप निश्चिंत हो कर जाइए, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी.”
“एक बात और, मैं डाक्टर हूं. पता नहीं किस समय कहां रहूं. हो सकता है, सर्जरी में रहूं, इसलिए तुम मुझे फोन मत करना. क्योंकि काम के समय मैं किसी का फोन अटेंड नहीं करता. जब मैं खाली रहूंगा, खुद ही फोन कर लूंगा.”
यह सब पत्नी को समझा कर डा. महेश चला गया. एक दिन बीत गया, महेश का फोन नहीं आया. दूसरा दिन भी बीत गया और तीसरा भी. जब महेश का फोन नहीं आया तो निशा को चिंता हुई. अभी नईनई शादी थी. नईनई शादी में लोग घंटे भर अकेले नहीं रह पाते, यहां तो 3 दिन बीत गए थे और पति का फोन नहीं आया तो चिंता होगी ही.
कहां गायब हो गया था महेश? जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग….