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अपनी करनी पर अवधेश पछता रहा था. उस का दिमाग काम नहीं कर रहा था. काफी देर तक वह उसी तरह बैठा सोचता रहा कि अब क्या करे. काफी सोचविचार के बाद दिमाग कुछ दुरुस्त हुआ तो उस ने उठ कर कपडे़ पहने और खुद को दुरुस्त कर के क्षेत्रीय थाना सेक्टर-39 जा पहुंचा.

थानाप्रभारी धर्मेंद्र चौधरी से मिल कर उस ने अपना परिचय दे दिया. लेकिन सच्चाई बताने के बजाय उस ने एक दूसरी ही कहानी बता कर थाना सेक्टर-39 रिपोर्ट दर्ज करा दी. उस ने थानाप्रभारी को बताया, ‘‘पिछले कई दिनों से कोई फोन कर के मुझ से मिलने की गुजारिश कर रहा था. मैं ने उसे औफिस में आ कर मिलने को कहा. लेकिन औफिस आने में उस ने असमर्थता व्यक्त की.

जब वह बारबार मिलने के लिए कहने लगा तो मैं ने उस से मिलने का मन बना लिया. उसी से मिलने के लिए मैं 11 बजे के करीब नोएडा स्थित जीआईपी मौल अपनी गाड़ी से पहुंच गया. तय प्रोग्राम के अनुसार वहां गेट के बाहर खड़े हो कर उस का इंतजार करने लगा. उसे फोन किया तो इस बार दूसरी ओर से किसी महिला की आवाज आई. महिला की आवाज सुन कर मैं चौंका.’’

महिला ने कहा, ‘‘आप इंतजार कीजिए. मैं थोड़ी देर में पहुंच रही हूं.’’

थोड़ी देर बाद एक लड़की आ कर अवधेश की कार के पास खड़ी हो गई. वह उसे पहचानता नहीं था. उस ने उसे पहचानने की कोशिश की, लेकिन पहचान नहीं सका. लड़की कार का दरवाजा खोल कर उस की बगल वाली सीट पर बैठ कर बोली, ‘‘सर, मैं आप से पहली बार मिल रही हूं, लेकिन मैं अपनी इस पहली मुलाकात को यादगार बनाना चाहती हूं.’’

लड़की ने उसे काफी प्रभावित किया था. वह उस की बात पर विचार कर ही रहा था कि तभी लड़की के मोबाइल पर किसी का फोन आया. लड़की ने फोन रिसीव कर के कहा, ‘‘मैं अभी एक जरूरी मीटिंग में हूं, बाद में फोन करना.’’

इतना कह कर लड़की ने फोन काट दिया. इस के बाद उस ने कहा, ‘‘सर, मैं आप की जनभावना पार्टी में शामिल हो कर पार्टी की कार्यकर्ता बनना चाहती हूं, क्योंकि राजनीति में मुझे बहुत रुचि है.’’

वह लड़की अभी उस से बातें कर रही थी कि 2 लड़के आ कर वहां खड़े हो गए. उन के साथ एक महिला भी थी. उन तीनों को देख कर अवधेश की कार में बैठी लड़की ने हाथ हिलाते हुए कहा, ‘‘आइए, मैं आप लोगों का ही इंतजार कर रही थी.’’

अवधेश कुछ समझ पाता, उस के पहले ही बगल में बैठी लड़की अपनी ओर का दरवाजा खोल कर जैसे ही उतरी, तुरंत उस का परिचित युवक उस की जगह पर बैठ गया. दोनों महिलाएं पीछे की सीट पर बैठ गईं तो दूसरा युवक अवधेश को धकेल कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया.

अब वह दोनों युवकों के बीच फंस गया था. उन लोगों ने उसे चुप रहने की धमकी दे कर उस की कार तेज रफ्तार से भगा दी. चलती गाड़ी में ही उन्होंने उस के पर्स से 12 हजार रुपए निकाल लिए. थोड़ी दूर जाने के बाद उसे जान से मारने की धमकी दे कर उसे भी कार से उतार दिया और खुद कार ले कर फरार हो गए. उस के बाद किसी तरह पूछतेपाछते हुए वह थाने तक पहुंचा है. इतना सब बता कर अवधेश ने अपनी कार दिलाने की गुजारिश की.

बात पूरी होतेहोते अवधेश की आंखें छलक पड़ी थीं. उसे इस तरह परेशान देख कर थानाप्रभारी ने उसे आश्वासन दे कर अपराध संख्या 19/2014 पर भादंवि की धारा 392, 386, 120बी, 34 के तहत मुकदमा दर्ज करा कर इस मामले की जांच जीआईपी के चौकीप्रभारी सबइंसपेक्टर विवेक शर्मा के नेतृत्व में एक टीम बना कर सौंप दी. उन की इस टीम में कांस्टेबल सिंकू चौधरी, ओमप्रकाश राय, सुदेश कुमार और महिला कांस्टेबल चित्रा चौधरी को शामिल किया गया था.

सबइंसपेक्टर विवेक शर्मा ने उस मोबाइल नंबर पर फोन मिलाया तो वह बंद मिला. उन्होंने उस नंबर को सर्विलांस पर लगवाने के साथ उस की आईडी निकलवाई तो पता चला कि वह नंबर सुहैल खान के नाम था, जो मकान नंबर बी-17डी, मेनरोड, मंडावली, दिल्ली में रहता था. पुलिस अवधेश को साथ ले कर उस पते पर पहुंची तो वहां उसे सुमन मिली.

अवधेश ने सुमन को पहचान कर पुलिस को बताया कि दोनों महिलाओं में एक यही थी. पुलिस सुमन को नोएडा ले आई. पूछताछ में सुमन ने अपने अन्य साथियों के बारे में बता दिया. इस के बाद पुलिस ने उस के साथियों मनोज कुमार, नीरज और शालिनी की तलाश में कई जगहों पर छापे मारे, लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं लगे. शायद उन्हें सुमन के पकड़े जाने की भनक लग गई थी, इसलिए वे अपनेअपने ठिकानों से फरार हो चुके थे.

सुमन से की गई पूछताछ में अवधेश मिश्रा को लूटने और ब्लैकमेल करने की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी.

दरअसल अवधेश मिश्रा ने अपने लूटे जाने के बारे में पुलिस को जो बताया था, वह पूरी तरह से सच नहीं था. उस की कार और रुपए जरूर अभियुक्त ले गए थे, लेकिन उस ने अपने अपहरण की कोशिश की जो बात पुलिस को बताई थी, वह झूठ थी. इस मामले में सच्चाई यह थी.

इस कहानी की शुरुआत 5-6 साल पहले से हुई थी. तब सुमन की शादी नहीं हुई थी. 33 वर्षीया सुमन अपने परिवार के साथ दिल्ली के पांडवनगर के गणेशनगर में रहती थी. उस के पड़ोस में ही मूलरूप से झारखंड का रहने वाला अवधेश मिश्रा भी अपने परिवार के साथ रहता था. 45 वर्षीय अवधेश मिश्रा इलाके का जानामाना आदमी था. इस की वजह यह थी कि वह ‘जनभावना पार्टी’ का राष्ट्रीय अध्यक्ष था.

सुमन भाईबहनों में सब से बड़ी थी, इसलिए घर या बाहर के कामों के लिए ज्यादातर उसे ही बाहर जाना पड़ता था. जब कभी किसी सरकारी दफ्तर का काम होता था, वह काम आसानी से हो जाए, इस के लिए वह अवधेश मिश्रा की मदद लेती थी. चूंकि अवधेश नेता था, इसलिए कैसा भी काम होता था, वह एक बार में ही करवा देता था.

लगातार अवधेश से मिलने की वजह से सुमन की उस से अच्छी जानपहचान हो गई थी. सुमन देखने में भी ठीकठाक थी और पढ़ीलिखी होने की वजह से बातें भी ढंग से करती थी. इसलिए अवधेश जब उसे देखता, उस का दिल उस के लिए मचल उठता था. यही वजह थी कि वह उसे चाहत से एकटक ताकता रहता था.

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