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कागजी काररवाई पूरी कर के खान ने राधा के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की इजाजत दे दी. खान वहां नहीं रुके. वह थाने में लौट आए. उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसएचओ सत्येंद्र दलाल को दे दी. राधा की मौत की खबर डीसीपी संजय कुमार सैन को दे दी गई. उन्होंने राधा की हत्या को बड़ी गंभीरता से लिया.

पुलिस टीमों का किया गठन

अज्ञात हत्यारों की तलाश करने के लिए सत्येंद्र दलाल की अगुवाई में एसआई गिरिराज, नूर हसन खान, एएसआई महेश सिंह, आदेश धामा, हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र की एक टीम गठित की. साथ ही स्पैशल स्टाफ के अलावा क्राइम ब्रांच की औपरेशन विंग को भी उन अज्ञात हत्यारों की तलाश में लगा दिया.

तीनों टीमों ने संयुक्त काररवाई करने के लिए सब से पहले अपनी कार्यप्रणाली पर गहनता से विचार किया. सब से पहले अस्पताल में दाखिल इमरान चौधरी को बयान देने की स्थिति में आने पर उस का बयान लिया गया. इमरान चौधरी से पूछताछ भी की गई.

उस से मालूम हुआ कि तीनों युवकों की उम्र ज्यादा नहीं थी. उन में एक की भाषा में पंजाबी पुट था. शायद वह पंजाब से था. शेष दोनों यूपी की भाषा बोल रहे थे. एक का नाम काका था, पिस्टल से उसी ने राधा और उस पर (इमरान) गोलियां चलाई थीं.

गोली चलाने की वजह इमरान ने रुपयों के लेनदेन में गड़बड़ी करने पर तूतूमैंमैं होना बताया. उन की तलाशी लेने के लिए राधा ने उस से कहा तो एक लडक़े ने अपनी पैंट में सामने खोंस कर रखी पिस्टल निकाल कर काका को रखने को दी थी.

राधा ने यह देख कर पुलिस बुलाने के लिए शोर मचाया. कोठे के 2-3 लोग भी शोर सुन कर वहां आ गए. तब पिस्टल देने वाला चिल्ला कर बोला, “काके, गोली चला.” उस के यह कहते ही काका ने फायरिंग कर दी, जिस से मैं और राधा घायल हो गए. मैंने उन तीनों को सीढिय़ों से भागते देखा, मैं घायल हो गया था, गिर पड़ा. फिर पुलिस की वैन मुझे और राधा को यहां हौस्पीटल में ले आई.

इमरान ने उन लडक़ों का हुलिया भी बताया. उसी आधार पर पुलिस टीमों ने कोठा नंबर 52 के नीचे सडक़ पर सीसीटीवी ढूंढ कर उन्हें चैक किया. 2 से 3 बजे दोपहर तक की फुटेज देखी गई. उस में बहुत से चेहरे थे. शंकर और भूरे ने उन लडक़ों को पास से देखा था. उन्हें वह फुटेज दिखाई गई तो उन्होंने 3 लडक़ों को पहचान कर बता दिया कि ये वही 3 लडक़े हैं.

डंप डाटा से मिला सुराग

सीसीटीवी में उन के चेहरे स्पष्ट नहीं थे. उन को अजमेरी गेट की तरफ भाग कर जाने की बात बताई गई थी. अजमेरी गेट पर भी सीसीटीवी लगे थे. वहां की फुटेज देखी गई तो वे तीनों यहां भी अस्पष्ट नजर आए.

स्पैशल टीम और औपरेशन विंग ने यहां आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. कोठा नंबर 52 और अजमेरी गेट के एरिया का मोबाइल डंप डाटा उठाया गया. कोठा नंबर 52 में घटी घटना के बाद वहां करीब 20 हजार फोन ऐक्टिव थे. अजमेरी गेट पर 15 हजार फोन की ऐक्टिव पोजिशन मिली.

DCP sanjay sain

इन की बड़ी बारीकी से जांच की गई तो कुछ नंबर दोनों जगह पाए गए. इसी तकनीक को आजमाते हुए परेड ग्राउंड होते हुए कश्मीरी गेट बस अड्डा पहुंच गई. हर जगह के सीसीटीवी की फुटेज खंगाली गई और डंप डाटा उठाया गया. इस जांच में पता चला कि तीनों लडक़े कश्मीरी गेट बस अड्डा आए थे, यहां से वे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे.

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर भी उन लडक़ों की सीसीटीवी में फुटेज मिल गई. यहां का भी डंप डाटा उठाया गया. पुलिस का अनुमान था कि वे ट्रेन पकड़ कर दिल्ली से बाहर चले गए हैं.

अब पुलिस के पास डंप डाटा ही उन लडक़ों तक पहुंचने का जरिया था. पुलिस की टीमें मोबाइल डंप डाटा की जांच में जुट गईं. पुलिस टीम को डंप डाटा में एक नंबर ऐसा मिला, जो हर जगह मौजूद था.

उस नंबर को मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी में दे कर यह मालूम किया गया कि यह नंबर किस का है और कहां इस्तेमाल किया जा रहा है. मोबाइल कंपनी ने बताया कि यह नंबर दिल्ली का नहीं, राजस्थान का है. वहीं जा कर इस को इस्तेमाल करने वाले का नाम पता मिल सकता है.

पुलिस के लिए यह एक नई सिरदर्दी थी, लेकिन इस का सोल्यूशन भी निकल गया. कमला मार्किट थाने के तेजतर्रार एसआई गिरिराज ने मुसकरा कर कहा, “सर, यह फोन कौन यूज कर रहा है, इस का पता मीनू मैडम निकाल सकती हैं.”

एएसआई मीनू बाला वहीं मौजूद थी. वह चौंक कर बोली, “मैं कैसे पता निकाल सकती हूं?”

“आप को बकरे के सामने चारा डालना है मैडम,” एसआई गिरीराज ने कहा. फिर गिरिराज ने एएसआई मीनू बाला को समझा दिया कि उन्हें क्या करना है.

एएसआई मीनू ने चलाया तीर

एएसआई मीनू बाला ने अपने मोबाइल डंप डाटा द्वारा हासिल किया गया नंबर मिलाया. दूसरी ओर घंटी बजी, फिर किसी ने फोन उठा लिया. मीनू बाला ने स्पीकर औन कर लिया. दूसरी ओर कुछ देर खामोशी रही फिर एक मरदाना आवाज उभरी,

“हैलो! आप को किस से बात करनी है?”

मीनू ने आवाज को सुरीला बना कर कहा, “आप बहुत भाग्यशाली हैं. आप का नंबर हमारी मोबाइल कंपनी ने लक्की ड्रा में डाला था. आप का दूसरा ईनाम निकला है. आप को 50 हजार रुपए मिलेंगे.”

“50 हजार का ईनाम.” दूसरी तरफ से खुशी से कोई बोला, “मेरी तो किस्मत खुल गई.”

“आप अपना नाम, पता बताइए ताकि 50 हजार का ईनाम आप को भेजा जा सके और हां अपनी फोटो भी भेज दीजिए.”

“ठीक है मैम. आप मेरा एड्रैस नोट करिए.”

“एक मिनट, मैं कागज पैन ले लूं.” मीनू बाला ने पास में खड़े हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र को इशारा किया. धर्मेंद्र ने तुरंत पैन कागज मीनू बाला को दे दिया.

“बताइए,” मीनू ने कहा.

“मेरा नाम हैप्पी है, पिता का नाम गोपी उर्फ चूरामन है. मेरा मूल पता डूंगर वाला, पोस्ट थाना- शाइपू, जिला धौलपुर (राजस्थान) है. फिलहाल मैं पिता और भाई के साथ मुल्ला पियाऊ, महारानी अहिल्या बाई स्कूल आगरा में रह रहा हूं.”

“अपना फोटो मुझे वाट्सऐप पर भेज दीजिए. मेरा नंबर आप के पास आया होगा.”

“जी हां मैडम. मैं अपना फोटो भेज रहा हूं.” दूसरी तरफ से कहने के बाद बात खत्म हो गई.

थोड़ी ही देर में हैप्पी ने अपना फोटो मीनू बाला के वाट्सऐप पर भेज दिया. देखते ही मीनू बाला की आंखों में चमक आ गई.

उस ने अपनी खुशी छिपा कर कहा, “मिस्टर हैप्पी, आप को आज ही 50 हजार रुपए एमओ द्वारा भेज दिए जाएंगे.” कहने के बाद मीनू बाला ने फोन काट दिया.

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वहां एसएचओ सत्येंद्र दलाल, एसआई नूर हसन खान, गिरिराज और हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र के अलावा औपरेशन विंग और स्पैशल स्टाफ के लोग मौजूद थे. सभी ने हैप्पी की फोटो देखी. हैप्पी वही लडक़ा था, जो अपने साथियों के साथ कोठा नंबर 52 से वारदात को अंजाम दे कर भागा था.

तुरंत उसे गिरफ्तार करने के लिए एसआई गिरिराज, नूर हसन खान, एएसआई महेश सिंह और औपरेशन विंग के 3 हट्टेकट्टे पुलिस वालों की टीम आगरा के लिए भेज दी गई.

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