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इसी साल 22 मार्च की सुबह के करीब 10 बजे जयपुर में कुछ पत्रकारों को सूचना मिली कि टोंक फाटक के पास किताबों की कुछ दुकानों पर राजस्थान विश्वविद्यालय का बीएससी द्वितीय वर्ष का फिजिकल कैमिस्ट्री का प्रश्नपत्र बेचा जा रहा है. यह पेपर उसी दिन दोपहर 3 बजे होने वाला था. किसी परीक्षार्थी ने दुकानों पर बिक रहे उस पेपर की कौपी वाट्सऐप द्वारा एक पत्रकार को भेज दी थी. उस पत्रकार ने इस मामले की जानकारी अपने एक साथी को दी.

उन दिनों जयपुर में राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था. दोनों पत्रकारों ने सावधानी के तौर पर विधानसभा पहुंच कर कुछ विधायकों को इस मामले के बारे में बताया ही नहीं, वह पेपर भी दिखाया. दोनों पत्रकारों ने उस प्रश्नपत्र पर 4 विधायकों से हस्ताक्षर करवा कर समय भी दर्ज करवा लिया. उन में सत्तापक्ष भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी, कांग्रेस के घनश्याम मेहर, श्रवण कुमार और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल शामिल थे.

शाम 6 बजे जब पेपर समाप्त हुआ तो उस पेपर का मिलान किया गया. हूबहू वही पेपर आया था, जो उन के पास था. उस में न कोई सवाल बदला था और न ही सवालों का क्रम. ओरिजिनल पेपर और बाजार में बिक रहे पेपर की भाषा और छपाई का फोंट भी एक ही था.

जब यह मामला सामने आया तो राजस्थान यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस की जांच कराएगा. यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक बी.एल. गुप्ता ने कहा कि परीक्षाओं में पूरी गोपनीयता बरती जा रही है, फिर भी मामला कमेटी के पास जांच के लिए भेजा जाएगा.

जांच के बाद आखिर यूनिवर्सिटी ने वह पेपर निरस्त कर दिया. राजस्थान यूनिवर्सिटी की पूरे देश में बहुत अच्छी साख है. पेपर आउट होने की इस घटना से यूनिवर्सिटी की छवि पर विपरीत असर पड़ सकता था. निस्संदेह यह बेहद गंभीर मामला था, इसलिए उच्चाधिकारियों ने राजस्थान पुलिस के स्पैशल औपरेशन ग्रुप (एसओजी) को इस मामले की जांच करने को कहा.

एसओजी ने सूचनाएं जुटानी शुरू कीं तो जानकारी मिली कि राजस्थान के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की ओर से आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कई माध्यमों से लीक हो रहे हैं.

गहराई से जांच की गई तो पता चला कि बीकानेर यूनिवर्सिटी की ओर से इसी साल 5 अप्रैल को होने वाली एमकौम फाइनल की परीक्षा, राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा 10 अप्रैल को कराई गई बीए तृतीय वर्ष के भूगोल के प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा और 12 अप्रैल को होने वाली द्वितीय प्रश्नपत्र और 13 अप्रैल को होने वाली एमए प्रीवियस एवं एबीएसटी द्वितीय के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो गए थे.

इस से परीक्षाओं की गोपनीयता भंग हुई थी. जांच के बाद एसओजी ने पेपर माफिया के विरुद्ध 3 मामले दर्ज किए. एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन. के निर्देश पर एसओजी के एसपी संजय श्रोत्रिय के निर्देशन में करीब एक दर्जन टीमों का गठन किया गया. इन टीमों ने पेपर लीक होने के मामले में तकनीकी जांच कर संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी.

इस के बाद 17 अप्रैल को सब से पहले राजस्थान यूनिवर्सिटी के एक विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन में राजस्थान यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष जगदीश प्रसाद जाट, राजस्थान विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर गोविंद पारीक, भूगोल के सेवानिवृत्त प्रोफेसर बी.एल. गुप्ता थे.

इस के अलावा राजकीय कालेज खाजूवाला (बीकानेर) के प्राचार्य एन.एस. मोदी और बीकानेर निवासी उन के बेटे निपुण मोदी, एसएसजी पारीक गर्ल्स कालेज चौमूं (जयपुर) के प्रोफेसर शंभुदयाल झालानी, अग्रसेन कालेज भादरा (हनुमानगढ़़) के लेक्चरर कालीचरण शर्मा, रमेश बुक डिपो, मानसरोवर, जयपुर का कर्मचारी शरद शामिल थे.

इन लोगों से पूछताछ में पता चला कि बीकानेर यूनिवर्सिटी की ओर से 5 अप्रैल को एमकौम फाइनल वर्ष के ओआर एंड क्यूटी की परीक्षा आयोजित की गई थी. लेकिन इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के सवालों को 4 दिन पहले यानी 1 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गोविंद पारीक ने एसएसजी पारीक गर्ल्स कालेज चौमूं के प्रोफेसर शंभुदयाल झालानी से नोट कर के बीकानेर यूनिवर्सिटी के खाजूवाला कालेज के प्राचार्य एन.एस. मोदी को बता दिया.

मोदी ने उन सवालों को अपने बेटे निपुण मोदी को बता दिया. वह इस पेपर की परीक्षा दे रहा था. यही पेपर रमेश बुक डिपो के कर्मचारी शरद ने परीक्षा से पहले ही अग्रसेन कालेज भादरा (हनुमानगढ़) के व्याख्याता कालीचरण शर्मा के जरिए फोन पर हासिल कर लिया और अन्य लोगों को वितरित कर दिया.

इसी तरह राजस्थान यूनिवर्सिटी में 10 अप्रैल को होने वाली बीए फाइनल ईयर की परीक्षा में भूगोल प्रथम प्रश्नपत्र का पेपर 8 अप्रैल को ही राजस्थान यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष जगदीश प्रसाद जाट ने पेपर सैटर बी.एल. गुप्ता से नोट किया और परीक्षार्थियों को वितरित कर दिया.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की 12 अप्रैल को होने वाली बीए तृतीय वर्ष का भूगोल द्वितीय प्रश्नपत्र का पेपर 11 अप्रैल को ही जगदीश प्रसाद जाट ने हासिल कर विद्यार्थियों में बांट दिया था. इस तरह यह पेपर भी आउट कर दिया गया था.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की 13 अप्रैल को होने वाली एबीएसटी द्वितीय प्रश्नपत्र (एडवांस्ट कोस्ट एकाउंटिंग) की परीक्षा का पेपर एक दिन पहले 12 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा के कर्मचारी नंदलाल सैनी, अशोक अग्रवाल एवं महेश गुप्ता तथा अन्य लोगों ने आउट कर दिया था.

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि 17 अप्रैल को हो रहे बीकौम फाइनल ईयर के इनकम टैक्स का पेपर भी परीक्षा से पहले लीक हो चुका था. इस सूचना पर 17 अप्रैल को ही एसओजी की एक टीम ने दौसा जिले के बांदीकुई कस्बे में छापा मारा. अगले दिन यानी 18 अप्रैल को एसओजी ने पेपर लीक प्रकरण में 3 अन्य मुकदमे दर्ज कर 5 लोगों को गिरफ्तार किया.

इन में राजस्थान यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा का अनुभाग अधिकारी नंदलाल सैनी, राजकीय कालेज कालाडेरा (जयपुर) का लेक्चरर शंकर चोपड़ा, बांदीकुई (दौसा) का कोचिंग संचालक चंद्रप्रकाश सिंधी तथा फाइनल ईयर के छात्र अखिल रावत एवं अजय कुमार सैनी शामिल थे. इन में कालाडेरा कालेज के लेक्चरर शंकर चोपड़ा ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के एमए फाइनल ईयर के वाटर रिसोर्स एवं एडवांस ज्योग्राफी औफ इंडिया के पेपर परीक्षा से पहले 8 अप्रैल को ही यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष जगदीश प्रसाद जाट को बता दिए थे.

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