इंसपेक्टर अरविंद सिंह ने इस की जानकारी सीपी मनदीप सिंह सिद्धू को दी. थोड़ी देर बाद जिले के तमाम पुलिस अफसर, एफएसएल टीम और मीडिया मौके पर पहुंच गई थी. पुलिस अब इस बात की खोजबीन करने में जुट गई थी कि बदमाश वाहन यहीं क्यों छोड़ कर फरार हुए? किनकिन रास्तों से होती हुई ये वैन यहां तक पहुंची?
पुलिस ने जहांजहां संभावना थी, वहां के सीसीटीवी की फुटेज खंगाली मगर फुटेज में इस की कहीं तसवीर नहीं दिखी थी. इस से पुलिस का शक पुख्ता हो गया कि बदमाशों ने राष्ट्रीय राजमार्ग इस्तेमाल करने के बजाए गांव के रास्तों का इस्तेमाल किया था ताकि पुलिस उन तक किसी कीमत में न पहुंच सके. कुल मिला कर इस घटना ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था. पूरे दिन की जांच का कोई खास नतीजा नहीं निकला था. मतलब ये था पुलिस की जांच जहां से चली थी, वहीं आ कर खड़ी थी.
कर्मचारी मनजिंदर पर हुआ शक
अगले दिन यानी 11 जून, 2023 को पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली. सीएमएस कंपनी में करीब 300 कर्मचारी काम करते थे. पुलिस ने सभी वर्कर्स को सख्त हिदायत दे रखी थी कि जब तक घटना का खुलासा नहीं हो जाता, तब कोई भी वर्कर न तो छुट्टी करेगा और न ही शहर छोड़ कर बाहर जाएगा. ऐसे में कंपनी का एक पुराना कर्मचारी मनजिंदर सिंह उर्फ मनी निवासी अब्बुवाल थाना डेहलो, लुधियाना काम पर नहीं आया था और घटना वाले दिन भी घर पर नहीं था. और तो और उस का फोन भी बंद आ रहा था.
प्रबंधक प्रवीण ने इस की जानकारी एडिशनल पुलिस कमिश्नर शुभम अग्रवाल को दे दी थी. एडिशनल सीपी अग्रवाल ने इंसपेक्टर सिंह को उस पर कड़ी नजर रखने की सख्त हिदायत दी, क्योंकि कंपनी में घटित घटना के बाद से उस का हावभाव कुछ अलग तरीके का ही दिख रहा था. ये बात मैनेजर प्रवीण को पता नहीं क्यों अजीब लग रही थी, इसीलिए उन्होंने इस की जानकारी पुलिस को दे दी थी.
अब तक तक की जांच में पुलिस के शक की सूई बारबार वहीं जा कर टिक जा रही थी, जहां से संदिग्ध हालत में सीएमएस की कैश वैन बरामद की गई थी. पुलिस को अनुमान था कि लूटकांड से जुड़े लुटेरे इसी इलाके के इर्दगिर्द होंगे या छिपे होंगे. उस के बाद पुलिस ने उस इलाके के चारों ओर अपने मुखबिरों का जाल फैला दिया.
इस का सकारात्मक रिजल्ट पुलिस को मिला भी. मुखबिरों द्वारा पुलिस को सूचना मिली की कैश वैन बरामद स्थल से करीब 5 किलोमीटर की रेंज में कुछ लुटेरों की हलचल दिखी है, अगर सतर्कता बरती जाए तो लुटेरे काबू में किए जा सकते हैं. मुखबिर की इस सूचना के बाद पुलिस और ज्यादा सक्रिय हो गई थी और सादे वेश में जगरांव गांव में चारों तरफ फैल गई थी.
मुखबिर की निशानदेही पर गांव के बाहर झुरमुट में 2 युवक छिपे दिखे तो पुलिस ने दोनों युवकों, जिन की उम्र 25 से 30 के करीब थी, को हिरासत में ले ली. उन से मौके पर ही कड़ाई से पूछताछ करनी शुरू की. क्योंकि खबरी ने पुलिस को पक्की जानकारी थी कि लूटकांड के 2 आरोपी उक्त जगह छिपे बैठे हैं और उन के पास बड़ी रकम भी मौजूद है, जिसे काले रंग के पौलीथिन रख कर एक गड्ढे के भीतर छिपा रखे हैं.
दोनों आरोपियों ने खोल दिया डकैती का राज
कड़ाई से की गई पूछताछ में दोनों युवकों ने अपना नाम मंदीप सिंह उर्फ विक्की और हरविंदर सिंह उर्फ लंबू बताया. दोनों युवक कोठे हरिसिंह गांव के थे. पुलिस ने दोनों पर जब थोड़ी लगाम और कसी तो उन्होंने डर के मारे ऐसे राज उगल दिए, जिसे सुन कर पुलिस वाले ऐसे उछले थे जैसे उन्होंने बहुत बड़ी जंग फतह कर ली हो.
पुलिस के सामने विक्की और लंबू दोनों हाथ जोड़े गिड़गिड़ा उठे कि उन्हें मारना मत, वह सब सचसच बता देंगे. उस के बाद दोनों में से एक विक्की ने गड्ढे खोद कर उस में छिपा कर रख काले रंग की 2 पौलीथिन निकाल कर उन की ओर बढ़ा दीं. पुलिस वालों ने जल्दीजल्दी पौलीथिन खोल कर देखी तो उन के होश उड़ गए थे. दोनों पैकेट में 500-500 रुपए की गड्डियां थीं. ये वही रकम थी, जो 2 दिन पहले सीएमएस कंपनी में डकैती के दौरान उन्होंने लूटी थी.
एक पैकेट में 500 रुपए के 10 बंडल तो दूसरे पैकेट में 500 रुपए के 15 बंडल थे. हरेक बंडल में 5 लाख रुपए थे, जो प्लास्टिक की रस्सी से अलगअलग बंधे हुए थे. यह कुल रकम 1 करोड़ 25 लाख रुपए की हो रही थी, जिस में 75 लाख रुपए लंबू के थे और 50 लाख रुपए विक्की के थे.
मतलब मुखबिर ने पुलिस को जो सूचना दी थी शत प्रतिशत पक्की थी. 7 करोड़ रुपए लूट के असल आरोपी पुलिस के हाथ लग चुके थे. यह देख पुलिस की खुशी का ठिकाना नहीं था, पुलिस रुपए से भरे पैकेट और दोनों आरोपियों को अपने कब्जे में ले कर सराभा थाने ले आई.
दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ शुरू की तो 7 करोड़ डकैती का पूरा मामला खुल कर सामने आ गया, लेकिन पुलिस ने इस बात को अतिगोपनीय ही रखा, ताकि मामला लीक न हो सके, नहीं तो बाकी के आरोपी फरार हो सकते थे.
खैर, इंसपेक्टर अरविंद सिंह ने लूटकांड के 2 आरोपियों के सवा करोड़ रुपए के साथ गिरफ्तार करने और मामले का खुलासा होने की सूचना कप्तान मनदीप सिंह सिद्धू को दिया तो वे खुशी से उछल उठे. इस के बाद उन्होंने उन्हें कुछ खास हिदायत दी और जौइंट पुलिस कमिश्नर सौम्या मिश्रा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर शुभम अग्रवाल को आरोपियों से आगे की पूछताछ के लिए थाने भेज दिया.
अन्य आरोपियों की हुई धड़ाधड़ गिरफ्तारी
अपने कप्तान का आदेश पा कर दोनों अधिकारी थाने पहुंच कर गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों विक्की और लंबू से कड़ाई से पूछताछ शुरू की तो पूरा मामला परत दर परत खुलता गया. पूछताछ में विक्की और लंबू ने बताया कि लूटकांड की मास्टरमाइंड मनदीप कौर उर्फ मोना उर्फ डाकू हसीना है. उसी के इशारे पर यह डकैती डाली गई थी. मोना का साथ सीएमएस कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी मनजिंदर सिंह उर्फ मनी ने दिया था. इस के अलावा 6 और लोग घटना में शामिल थे.
सनद रहे, पुलिस का शक पहले से ही मनजिंदर सिंह पर शक था. उस के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर अब्बुवाल से मनजिंदर सिंह उर्फ मनी को गिरफ्तार कर उस से डेढ़ करोड़ रुपए, परमजीत सिंह उर्फ पम्मा को गिरफ्तार कर उस के पास से 25 लाख रुपए, नरिंदर सिंह उर्फ हैप्पी को गिरफ्तार उस से 25 लाख रुपए और हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर उस के पास से 25 लाख रुपए कैश बरामद किया.
उक्त चारों से पूछताछ के बाद पता चला कि अरुण कुमार कोच नामक एक और आरोपी के घर के पास खड़ी क्रूज गाड़ी में 2 करोड़ 25 लाख रुपए रखे हैं. पुलिस इन की निशानदेही पर क्रूज गाड़ी और उस में से एक करोड़ 55 लाख रुपए ही बरामद कर सकी थी. कार का शीशा तोड़ कर किसी ने 70 लाख रुपए गायब कर दिए थे.
6 आरोपियों से पुलिस ने कुल 5 करोड़ 7 सौ रुपए बरामद किए थे. इन 6 के अलावा 5 और आरोपी मनदीप कौर उर्फ मोना उर्फ डाकू हसीना, उस का पति जसविंदर सिंह, अरुण कुमार कोच, आदित्य कुमार उर्फ नन्नी और गौरव कुमार उर्फ गुलशन अभी भी पुलिस की पकड़ से बहुत दूर थे.
ऐसे पकड़ में आई डाकू हसीना
इन आरोपियों के पास कितनी नकदी है, किसी को पता नहीं था. अलबत्ता पुलिस कमिश्नर सिद्धू ने मास्टरमाइंड मनदीप कौर और उस के पति को गिरफ्तार करने के लिए सीआईए (काउंटर इनवैस्टीगेशन एजेंसी) के प्रभारी बेअंत जुनेजा और इंसपेक्टर कुलवंत सिंह को लगा दिया था.