हेमंत लांबा सुंदर, स्वस्थ और पैसे वाले परिवार से था. दीप्ति भी व्यवसाई पिता की एकलौती बेटी थी. हेमंत के अपने प्रति लगाव को देख दीप्ति ने अपने नजरिए से ठीक ही सोचा था कि वह हेमंत से शादी करेगी. लेकिन जब बात शादी की आई तो हेमंत ने न केवल अपनी इस प्रेयसी की हत्या कर दी, बल्कि अपना अपराध छिपाने के लिए ड्राइवर देवेंद्र को भी मार डाला. लेकिन… हरियाणा के जिला रेवाड़ी में एक कस्बा है धारूहेड़ा. इस कस्बे के नंदरामपुर बास रोड की रामनगर कालोनी के पास सड़क पर लोगों की भीड़ और पुलिस की मौजूदगी बता रही थी कि वहां कोई अनहोनी हुई है.
दरअसल किसी राहगीर ने रामनगर कालोनी में सड़क किनारे एक खाली प्लौट में एक युवती का खून से लथपथ शव देखा तो उस ने फोन कर के यह सूचना पुलिस नियंत्रण कक्ष को दे दी थी. इस सूचना पर वहां पीसीआर की गाड़ी पहुंची. राहगीर की सूचना सही थी, इसलिए पीसीआर ने यह सूचना धारूहेड़ा इलाके की पुलिस को दे दी.
सूचना मिलने पर धारूहेड़ा थाने के एसएचओ सुधीर कुमार अपने मातहतों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. राहगीर ने पूछताछ में बताया कि वह दिल्ली से आया था और पैदल अपने घर की तरफ जा रहा था, तभी उस की नजर खाली प्लौट में पड़ी लाश पर गई तो उस ने पुलिस को सूचना दे दी.
देखने से पहली नजर में ही स्पष्ट हो रहा था कि जिस युवती का शव है, उस की हत्या सिर और पेट में गोलियां मार कर की गई थी. युवती के शरीर पर पुलिस को ऐसा कोई निशान नहीं मिला, जिस से उस की पहचान हो पाती. इंसपेक्टर सुधीर कुमार को लग रहा था कि मृतका आसपास के इलाके की ही रहने वाली होगी.
उन्होंने सुबह होने का इंतजार किया और उजाला होने पर आसपास की कालोनियों के लोगों को बुला कर शव की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली.
इस बीच शव मिलने की जानकारी पा कर धारूहेड़ा के डीएसपी मोहम्मद जमाल और रेवाड़ी जिले की एसएसपी नाजनीन भसीन भी क्राइम ब्रांच और फोरैंसिक टीम ले कर घटनास्थल पर पहुंच गई थीं.
फोरैंसिक टीम ने वारदात वाली जगह की फोटो व शव को उलटपलट कर उस के फोटो लेने शुरू कर दिए. जिस युवती की लाश थी, उस की उम्र करीब 20 साल से ऊपर रही होगी. वह काले रंग की जींस और उसी रंग का बनियान पहने थी, जिस के ऊपर उस ने गेहुएं रंग की जैकैट पहन रखी थी. फोरैंसिक टीम ने जब युवती की जींस और जैकेट की तलाशी ली तो उस की जेब से उस का आईडी प्रूफ और एक ब्यूटीपार्लर का विजिटिंग कार्ड मिला.
विजिटिंग कार्ड किसी पैरिस ब्यूटी पार्लर, दिल्ली का था, जबकि शव के साथ मिली आईडी में दीप्ति गोयल पुत्री हनुमान प्रसाद गोयल निवासी संगरिया, जिला हनुमानगढ़, राजस्थान लिखा था.
आईडी मिलने के बाद 2 चीजें साफ हो गईं कि युवती की उम्र करीब 22 वर्ष थी और वह इस इलाके की रहने वाली नहीं थी. पुलिस के पास अब 2 ऐसी चीजें थीं, जिस से उस की शिनाख्त कराना आसान हो गया था.
आवश्यक जांचपड़ताल के बाद युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए रेवाड़ी जिला अस्पताल भिजवा दिया गया.
चूंकि पुलिस को शक था कि कहीं युवती के साथ किसी तरह का दुष्कर्म तो नहीं किया गया है, इसलिए एसएसपी नाजनीन भसीन ने शव का पोस्टमार्टम एक मैडिकल बोर्ड द्वारा कराए जाने की संस्तुति दी. साथ ही दुष्कर्म के बिंदु पर भी जांच के निर्देश दिए.
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद डीएसपी मोहम्मद जमाल ने धारूहेड़ा कोतवाली में अज्ञात हत्यारों के खिलाफ युवती की हत्या का केस दर्ज करा दिया. इस मामले की जांच का दायित्व इंसपेक्टर सुधीर कुमार को सौंपा गया.
डीएसपी ने जांच अधिकारी की मदद के लिए धारूहेड़ा थाने के स्टाफ और सीआईए स्टाफ को मिला कर एक विशेष टीम का गठन कर दिया.
पुलिस ने सब से पहले विजिटिंग कार्ड और आईडी प्रूफ के आधार पर जांचपड़ताल शुरू की. एक टीम को हनुमानगढ़ भेजा गया. दूसरी टीम ने विजिटिंग कार्ड पर लिखे फोन नंबरों पर काल कर के छानबीन करनी शुरू कर दी.
5 घंटे की मशक्कत के बाद यह जानकारी मिल गई कि मृतका कौन थी. आईडी प्रूफ के आधार पर और ब्यूटी पार्लर के विजिटिंग कार्ड में दिए गए फोन नंबरों को खंगालते हुए पुलिस उस सिरे तक पहुंच गई, जहां से युवती की पहचान होनी थी.
पता चला कि मृतका दीप्ति हनुमानगढ़ जिले के संगरिया निवासी एक प्रतिष्ठित व्यापारी हनुमान प्रसाद की इकलौती बेटी दीप्ति थी. उस की मां का निधन हो चुका था. दीप्ति के पिता का संगरिया में आढ़त का व्यवसाय है.
पिछले 2 साल से वह दिल्ली के रोहिणी में अपनी ननिहाल में रह कर फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही थी. ननिहाल में फोन पर बात करने से पता चला कि दीप्ति 6 दिसंबर को पार्क में घूमने की बात कह कर घर से निकली थी, लेकिन उस के बाद वापस नहीं लौटी थी.
यह भी पता चला कि पैरिस ब्यूटी पार्लर पर दीप्ति 2 घंटे ट्रेनिंग लेने के लिए जाती थी. संगरिया गई पुलिस टीम दीप्ति के पिता हनुमान प्रसाद को ले कर धारूहेड़ा लौट आई. उन्हेें रेवाड़ी ले जा कर जब दीप्ति का शव दिखाया गया, तो उन्होंने पहचान कर बता दिया कि शव उन की बेटी दीप्ति का ही है.
दीप्ति के शव की आधिकारिक रूप से पहचान हो चुकी थी. पुलिस ने कागजी खानापूर्ति के बाद जांचपड़ताल तेज कर दी. अगली सुबह दीप्ति के शव का पोस्टमार्टम भी हो गया, जिस के बाद उस का शव उस के घर वालों के सुपुर्द कर दिया गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से 2 बातें साफ हो गईं. एक तो यह कि दीप्ति के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था. दूसरे उसे 2 गोली मारी गई थीं. दीप्ति के पिता से पुलिस को दीप्ति का मोबाइल नंबर मिल गया था, साथ ही एक हैरान कर देने वाली जानकारी भी मिली थी.
पुलिस को दीप्ति के शव के पास से कोई मोबाइल फोन नहीं मिला था. जबकि उस के पिता ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे दीप्ति के फोन से उन के फोन पर एक वाट्सऐप मैसेज आया था, जिस में उस ने लिखा था कि पापा मैं ठीक हूं.
हैरानी की बात यह भी थी कि दीप्ति के शव के बारे में पुलिस को अलसुबह करीब साढे़ 3 बजे सूचना मिली थी. इस का मतलब उस की हत्या रात में किसी वक्त की गई थी.
ऐसे में यह संभव नहीं था कि वह सुबह 4 बजे पिता को वाट्सऐप मैसेज करती. इस से जाहिर था कि दीप्ति का फोन उस के कातिल के पास रहा होगा. इस से लग रहा था कि दीप्ति का कातिल उस का कोई परिचित रहा होगा. पुलिस को अब यह गुत्थी भी सुलझानी थी कि दीप्ति की हत्या दिल्ली में हुई थी या धारूहेड़ा में.
इंसपेक्टर सुधीर कुमार ने साइबर सेल की मदद से उसी दिन दीप्ति का मोबाइल सर्विलांस पर लगवा दिया. साथ ही उस की काल डिटेल्स भी निकलवा ली. सीडीआर के अध्ययन से सामने आया कि दीप्ति की हत्या होने के बाद उस का फोन अगले दिन सुबह करीब 9 बजे तक चालू था.
इस दौरान उस के फोन पर कई काल आई थीं, जिन में कुछ वाट्सऐप की मिस्ड काल भी थीं. इस मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन जयपुर में थी, इस के बाद दीप्ति का फोन स्विच्ड औफ हो गया था.
पुलिस टीम को लग रहा था कि दीप्ति दिल्ली से धारूहेड़ा किसी अनजान शख्स के साथ तो नहीं आई होगी. जाहिर है, उस के साथ जो शख्स था, वह उस का खास परिचित रहा होगा. इसलिए पुलिस टीम ने दीप्ति के घर वालों से उस के सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी ले कर खंगालना शुरू कर दिया.