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सारिका का दिल धड़क सा उठा. उस ने एकदम से स्वीटी को आवाज दी, तो मोहित ने अचकचा कर उसे एकदम छोड़ दिया. उस 12 साल की कमसिन लड़की को समझ ही नहीं आया कि उस के अंकल को अचानक क्या हुआ.

‘‘तुम्हें दीदी बुला रही हैं,’’ कह कर सारिका ने एक नजर मोहित पर डाली. वे कुछ घबराए से थे, जैसे चोरी करते पकड़े गए हों.

पर खाने के समय सारिका ने ध्यान दिया कि मोहित सामान्य ढंग से ही बात कर रहे थे, जबकि स्वीटी अंकलअंकल कहती उन के आगेपीछे घूम रही थी. मोहित के चेहरे पर कोई भाव नहीं था. सारिका को अपनी सोच पर शर्मिंदगी सी होने लगी थी.

धीरेधीरे मोहित की बातों का जादू सारिका के पूरे परिवार पर चल गया. शब्दों की मिठास और अपनेपन से हर कोई उन से प्रभावित हो उठता. मां तो मोहित पर निछावर थीं. उन्हें लगता था कि उन का दामाद नखरों और अकड़ से दूर बेटे जैसा है और सारिका की बहन निहारिका तो उन के आगेपीछे ही घूमती रहती. मोहित निहारिका के लिए आइसक्रीम, चौकलेट, बर्गर जैसी ढेरों चीजें ले जाते तो वह खिल उठती. दोनों जीजासाली की खूब छेड़छाड़ चलती. सारिका खुश थी कि मोहित उस के परिवार को अपना मानते हैं और खूब घुलमिल गए हैं.

पर कुछ ही समय बीता था कि मोहित की सचाई सारिका के सामने खुलने लगी. वे जबान से जितने मीठे थे, उन की सोच उतनी ही जहरीली थी. औरत उन के लिए ऐसा खिलौना थी, जो मर्दों के खेलने के लिए बनाई गई थी. उन के दिल में रिश्तों की कोई इज्जत नहीं थी. उन की मां की लापरवाही के कारण उन के पिता के मुंह से निकले अपशब्दों ने इस रिश्ते की इज्जत भी खत्म कर दी थी. फिर उन की कोई बहन भी नहीं थी. नौकरों की संगत और आजाद माहौल ने उन की सोच को गलत दिशा दे दी थी.

एक बार किसी गर्भवती स्त्री को देख उन्होंने इतना भद्दा मजाक किया कि सारिका शर्म से गड़ गई. पर उस के बाद तो जैसे मोहित की सारी झिझक खत्म हो गई. वे राह चलती लड़कियों व फिल्मी हीरोइनों पर ऐसीऐसी बातें कहते कि सारिका का खून खौल उठता, उस की नाराजगी देख कर वे बात को मजाक में टाल देते. मोहित को देख कर कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि ऊपर से इतना शानदार व्यक्तित्व रखने वाला इंसान अंदर से इतनी घटिया सोच रखने वाला है. लेकिन सारिका जानती थी कि औरतों से बाहरी तौर पर बहुत सलीके से बात करने वाला यह इंसान जब सारिका से बात करने वाली महिलाओं को छिपछिप कर घूरता है, तो उस की निगाहों में क्या होता है.

वह नहीं चाहती कि ऐसी अप्रिय स्थिति कभी भूले से भी किसी के सामने आए. इसीलिए वह महल्लेपड़ोस की औरतों से ज्यादा मतलब नहीं रखना चाहती थी. न खुद किसी के घर जाती थी, न किसी का आना पसंद करती थी और लोग उसे शक्की, घमंडी व बदमिजाज कहने लगे थे.

सारिका मन से तो उदास रहती ही पर कुछ दिनों से उस का तन भी शिथिल सा होने लगा था. आखिर एक दिन चक्कर खा कर गिर ही गई, तो मोहित उसे डाक्टर के पास ले गए. चैकअप के बाद डाक्टर ने खुशखबरी होने की बधाई दी तो मोहित खुश हो गए और उस के नाजनखरे उठाने लगे. यह मत करो, वह मत करना, वजन मत उठाना जैसी ढेरों बातें. कभीकभी सारिका झुंझला भी जाती पर मोहित उस का जरूरत से ज्यादा ही खयाल रखते. लेकिन सारिका के मन में मोहित के लिए जहर भरता जा रहा था, क्योंकि मोहित ने उसे अपने दोस्तों के सामने आने से मना कर रखा था. उन के हिसाब से उन के दोस्त ऐसी स्त्रियों का मजाक बनाते हैं. दूसरों की पत्नियों को ऐसी गंदी नजर से देखने वाले को अब अपनी पत्नी की चिंता सताने लगी थी. पतिपत्नी के रिश्ते का कितना घिनौना रूप था उन के मन में. सारिका का मन कसैला हो उठता था.

पर धीरेधीरे सारिका की तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी, तो मोहित ने निहारिका को घर के कामों में मदद के लिए बुला लिया. निहारिका चंचल लड़की थी. घर आते ही उस ने सारे काम संभाल लिए.

सारिका और मोहित दोनों के काम वह पूरे मन से करती थी. उस के आने से सारिका कुछ निश्चिंत सी हो गई थी. निहारिका अकेले में डरती थी इसलिए वह सारिका के पास ही सोती थी. काम कर के थक कर वह ऐसी बेसुध हो कर सोती कि उसे अपना ही होश नहीं रहता था कि उस के कपड़े कैसे अस्तव्यस्त हो रहे हैं. सारिका ही उस की चादर ठीक करती रहती.

मोहित बराबर वाले कमरे में सोते थे पर बाहर निकलने का रास्ता सारिका के कमरे में से ही था, इसलिए सारिका निहारिका का विशेष ध्यान रखती थी.

एक दिन मोहित किसी दोस्त के साथ घर आए और सारिका से बोले, ‘‘निहारिका से कहो चायनाश्ता ले आए. मेरा दोस्त आया है और हां, तुम मत आना.’’

सारिका निहारिका को बुलाने गई, तो देखा वह गहरी नींद में सो रही थी. उसे देख सारिका का स्नेह उमड़ आया. उस ने निहारिका को उठाने का इरादा छोड़ दिया और उसे धीरे से चूम कर रसोई में आ कर चाय बनाने लगी. चाय की ट्रे ले कर वह ड्राइंगरूम का दरवाजा खटखटाने जा ही रही थी कि अंदर से आती आवाज को सुन कर उस के हाथ थम गए.

‘‘हां, साली आई हुई है. इतनी खूबसूरत है कि मैं तो मदहोश होने लगता हूं. कभीकभी इतने करीब होती है कि सांसें रुकने लगती हैं. कयामत है यार वह भी.’’

सारिका के हाथ कांप गए, उस के कानों में धमाके होने लगे. यह आवाज तो वह लाखों में पहचान सकती थी. यह आवाज निहारिका के प्यारे जीजू की थी, जो उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानती थी और मोहित भी उसे बच्ची, गुडि़या कह कर बात करते थे. मोहित की स्त्रीजाति के प्रति घटिया सोच को सारिका समझती थी, लेकिन उस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अपनों के प्रति भी वे ऐसी ही सोच रखते हैं. यह उन की घटिया सोच का हद से गुजरना था.

‘‘क्या वह सच में बहुत हसीन है?’’ दोस्त पूछ रहा था.

‘‘हां, कच्ची कली है,’’ मोहित आह भर रहा था.

‘‘वाह यार, सामने अप्सरा है और तू तरस रहा है,’’ दोस्त बेहूदगी से हंस रहा था.

‘‘नहीं यार, मैं ऐसा कुछ नहीं कर सकता. वैसे भी वह अभी बहुत छोटी है,’’ मोहित जैसे अपनी मजबूरी पर दुखी था.

सारिका के तनमन में जैसे अंगारे सुलग उठे थे. भ्रम के सारे शीशे चूरचूर हो गए थे. वह अपने बैडरूम में आ कर पलंग पर ढह गई. उस की नजर सोती हुई मासूम बहन पर पड़ी, जो शायद सपने में भी रिश्तों के सुनहरे फ्रेम में कैद उस शैतान की असली सूरत कभी नहीं देख सकती थी. सारिका की आंखों से झरझर आंसू बह रहे थे. शर्मिंदगी से सिर झुका था और वे सारी शर्मनाक बातें उस के दिमाग पर हथौड़े की तरह चोट कर रही थीं. उसे अपना होश नहीं रहा.

‘‘क्या हुआ, क्या हुआ? आंखें खोलो,’’ मोहित उस का कंधा पकड़े हुए थे. सारिका ने आंखें खोलीं तो मोहित को देख कर उसे लगा जैसे उस के सामने भेडि़या अपनी लाल जबान बाहर निकाले लार टपकाते हुए खड़ा है. उस के मुंह से जोर की चीख निकली और फिर वह बेहोश हो गई. न जाने कितनी देर में उसे होश आया. निहारिका उस के पास ही बैठी थी. उस की आंखों में आंसू भरे थे. सारिका ने मुश्किल से खुद को संभाला. उस का सिर अभी भी दर्द से फटा जा रहा था.

आगे पढ़ें- सारिका ने प्यार से उस का हाथ थाम लिया. उस की…

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